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Mahendra Singh Dhoni के करियर की खास घटनाएं जिन्हें आप शायद ही जानते हों। MS Dhoni के सर्वश्रेष्ठ रिकॉर्ड्स

Youthtrend Viral Desk : 15 अगस्त के दिन देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिन हैं 15 अगस्त 1947 को देश आजाद हुआ था और 15 अगस्त 2020 को क्रिकेट के सबसे महान विकेटकीपर और कप्तान में शुमार करने वाले महेंद्र सिंह धोनी ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट की दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया। कैप्टन कूल के नाम से जाने वाले धोनी सिर्फ एक क्रिकेटर नहीं हैं बल्कि संपूर्ण क्रिकेट हैं उन्होंने जो उपलब्धि देश के लिए हासिल की हैं वो किसी से छुपी नहीं हैं। किसी को ये उम्मीद नहीं थी कि रांची से आने वाला क्रिकेटर एक दिन पूरी दुनिया में छा जाएगा, आज भले ही धोनी क्रिकेट के शिखर पर पहुंच गए हो लेकिन इसके पीछे उनका कड़ा संघर्ष रहा हैं। आज हम आपकों Dhoni के करियर की यादगार घटनाएं बताने जा रहें हैं जो शायद आप को ना पता हो, आइए जानते हैं इसके बारें में।

Dhoni के करियर की यादगार घटनाएं

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फुटबॉल गोलकीपर से क्रिकेट तक

धोनी रांची के डीएवी जवाहर विद्या मंदिर में पड़ते थे और स्कूल की फुटबाल टीम के गोलकीपर थे, उनकी गोलकीपिंग स्किल्स को देखकर स्कूल के क्रिकेट कोच बनर्जी ने जब धोनी से पूछा कि क्या वो स्कूल के लिए क्रिकेट खेलेंगे, शुरू में तो धोनी ने मना किया लेकिन बाद में वो मान गए और यहीं से उनके क्रिकेट जीवन की शुरुआत हुई।

अंडर-19 में बिहार के लिए खेले धोनी

1998-99 की कूच बिहार ट्रॉफी के लिए धोनी बिहार टीम की तरफ से खेले थे, पूरे टूर्नामेंट में धोनी ने 37 की औसत से 5 मैचों में 185 रन बनाए थे जिसमें 1 अर्धशतक शामिल था, देश के लिए अंडर-19 खेलने के लिए धोनी के पास अब सिर्फ एक साल ही बचा था।

अच्छे प्रदर्शन के बावजूद नहीं खेल पाए अंडर-19 विश्वकप

1999-00 के कूच बिहार ट्रॉफी में धोनी ने बेहतरीन प्रदर्शन किया था उन्होंने टूर्नामेंट के 9 मैचों में 488 रन बनाए थे जिसमें 4 अर्धशतक शामिल थे, उन्होंने फाइनल में पंजाब के खिलाफ 84 रनों की लाजवाब पारी भी खेली थी। उन्हें उम्मीद थी कि अगले साल श्रीलंका में होने वाले अंडर-19 विश्वकप में उनका चयन हो जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हो पाया और एक बार फिर उन्हें मायूस होना पड़ा।

धोनी समेत 3 कीपर थे अंडर-19 विश्वकप की दौड़ में

श्रीलंका में होने वाले अंडर-19 विश्वकप के लिए टीम इंडिया के लिए विकेटकीपर की दौड़ में माही के अलावा अजय रात्रा और विदर्भ के अमित देशपांडे भी थे, विश्वकप चयन से पहले हुए सीके नायडू ट्रॉफी में धोनी का बल्ला शांत रहा था इसलिए उनकी जगह विश्वकप टीम में अजय रात्रा को तरजीह दी गई।

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प्रथम श्रेणी क्रिकेट में वर्ष 2000 में किया था पर्दापण

धोनी ने अपने प्रथम श्रेणी और लिस्ट ए क्रिकेट की शुरुआत साल 2000 में असम की टीम के खिलाफ जमेशदपुर में की थी, अपने पहले ही प्रथम श्रेणी क्रिकेट मैच में विकेटकीपिंग करते हुए असम के खिलाड़ी पराग दास को अपना पहला शिकार बनाया था दिलचस्प बात ये हैं कि ठीक 19 साल बाद धोनी ने पराग दास के बेटे रियान प्रयाग को आईपीएल के एक मैच में कैच आउट किया था।

पहले खेल चुके थे सेंट्रल कोल् लिमिटेड के लिए

प्रथम श्रेणी क्रिकेट से पहले धोनी सेंट्रल कोल् लिमिटेड के लिए खेल चुके थे जहां उन्हें 200 रुपये मासिक भत्ता मिलता था इसके अलावा उन्हें मैन ऑफ दी मैच बनने पर 200 रुपये अतिरिक्त मिलते थे।

दिलीप ट्रॉफी में चयन की खबर मिली बहुत लेट

महेंद्र सिंह धोनी ने प्रथम श्रेणी क्रिकेट में बंगाल के खिलाफ अपना पहला शतक लगाया था उनके इस प्रदर्शन के बाद उनका चयन अगरतला में साउथ जोन के खिलाफ होने वाले दिलीप ट्रॉफी के मैच के लिए ईस्ट जोन में हुआ था लेकिन उन्हें इस बात की जानकारी बहुत ही देर से मिली जब मैच में सिर्फ 20 घंटे बचे थे। उन्हें रांची से अगरतला पहुंचना था जो लगभग नामुमकिन था उन्होंने काफी कोशिश की लेकिन समय से अगरतला नहीं पहुंच पाए और उस मैच में शामिल नहीं हो पाए।

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क्रिकेटर से बन गए रेलवे में टी.टी

क्रिकेट में ज्यादा मौके ना मिलने से धोनी परेशान हो गए थे और फिर उन्हें खड़गपुर में भारतीय रेलवे में टी.टी की नौकरी मिल गई, रेलवे में रहते हुए वो साउथर्न ईस्टर्न रेलवे क्रिकेट टीम का हिस्सा थे, 2002 में रेलवे क्रिकेट टीम के चयन के लिए धोनी गए लेकिन चयनकर्ताओं को उनकी बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग तकनीक पसंद नहीं थी।

जब ईजाद किया हेलीकॉप्टर शॉट

खड़गपुर से वापस आने के बाद धोनी टेनिस बॉल से दुर्गा स्पोर्टिंग के लिए क्रिकेट खेलने लगें थे यहीं से उन्होंने अपने जिगरी दोस्त संतोष से हेलीकॉप्टर शॉट सीखा और आज ये शॉट धोनी की पहचान बन चुका हैं।

साल 2004 था धोनी के जीवन का महत्वपूर्ण साल

इस साल बीसीसीआई के द्वारा नए टैलेंट की खोज के लिए टैलेंट रिसोर्सेज डेवलपमेंट ऑफ विंग की शुरुआत की गई थी, उस समय बंगाल के पूर्व कप्तान और इस टैलेंट डेवलपमेंट विंग के अधिकारी प्रकाश पोद्दार की नजर धोनी पर पड़ी और उन्होंने धोनी के बारें में जानकारी राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी को भेज दी।

शरू हुआ सफलताओं का दौर

धोनी ने 2004 में खेली गई देवधर ट्रॉफी में असम के खिलाफ अपना पहला शतक जड़ा और सेंट्रल जोन के खिलाफ दूसरा, उनके लगातार बेहतरीन प्रदर्शन की वजह से उन्हें केन्या और जिम्बाब्वे के दौरे पर जाने वाली इंडिया ए में चयन हुआ। उसके बाद चार देशों के एक टूर्नामेंट में धोनी ने पाकिस्तान के खिलाफ 2 शतक जड़े और टूर्नामेंट के सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी भी चुने गए थे।

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हांगकांग सुपर सिक्स में लिया था हिस्सा

बहुत ही कम लोग जानते थे कि 2004 में महेंद्र सिंह धोनी हांगकांग में होने वाले सुपर सिक्स टूर्नामेंट में खेल चुके थे, वो निखिल चोपड़ा, प्रवीण आमरे, सुब्रोतो बनर्जी, इकबाल सिद्दीकी और देबाशीष मोहन्ती के साथ टीम इंडिया का हिस्सा थे।

शामिल हुए बोर्ड प्रेसिडेंट इलेवन में

धोनी का चयन बोर्ड प्रेसिडेंट इलेवन टीम में चयन हुआ था दक्षिण अफ्रीकी टीम के खिलाफ, जयपुर में हुए तीन दिवसीय मैच में उन्होंने 39 रन बनाए, इसके बाद रणजी में अच्छे प्रदर्शन करने का इनाम उन्हें बांग्लादेश दौरे पर जाने वाली एकदिवसीय टीम में हुआ।

23 दिसंबर 2004 को बने थे देश के 157वें एकदिवसीय क्रिकेटर

धोनी ने 23 दिसंबर 2004 को बांग्लादेश के खिलाफ एकदिवसीय में पर्दापण करने के साथ ही देश के लिए खेलने वाले 157वें क्रिकेटर बन गए थे, अपने पहले मैच में ही धोनी रन आउट हो गए थे दिलचस्प बात ये हैं कि आखिरी मैच में भी वो रन आउट हुए थे।

टीम में चयन से पहले कोई स्पांसर नहीं था धोनी के पास

धोनी के दोस्त परमजीत सिंह ने उन्हें स्पांसर दिलवाने में काफी मदद की क्योंकि अभी तक उन्हें कोई स्पांसर नहीं मिल रहा था।

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