Pakistani Mahadev के नाम से जाना जाता है काशी का ये अनोखा शिवालय, दर्शन से पूरी होती है मनचाही मुराद

Pakistani Mahadev Temple In Varanasi : देवाधिदेव महादेव की बनाई नगरी काशी है और इसके कण-कण में है भगवान शिव। यहां आपको हर एक गली में भोलेनाथ के कई छोटे-बड़े मंदिर देखने को मिलेंगे, जिनमें से कई मंदिर ऐसे भी है जिनके साथ कोई न कोई पौराणिक मान्याता जुड़ी हुई है। आज हम आपको धर्म व अध्यात्म की नगरी काशी में स्थित भगवान शिव (Lord Shiva) के एक ऐसे मंदिर के बारे में बताने जा रहे है जो काफी प्राचीन है और इसके बारे में शायद बहुत कम ही लोग जानते होंगे। इस मंदिर को पाकिस्तानी महादेव (Pakistani Mahadev) के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर के नाम के पीछे बड़ी ही दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। यह शिवलिंग आजादी के बाद हुए बंटवारे की एक अनोखी दास्तान को बयां करता है। तो चलिए जानते है कि काशी में यह अद्धभुत मंदिर कहां है और इसका नाम Pakistani Mahadev क्यों पड़ा…

Pakistani Mahadev : यहां स्थित है मंदिर

Pakistani Mahadev

काशी की कहानी भी बड़ी अनोखी है, कहते हैं जो यहाँ आता है वो यहीं का होकर रह जाता है। काशी जिसे मोक्ष की नगरी भी कहते हैं यहाँ आपको ऐसी ऐसी चीजें और जगह देखने-सुनने को मिलेगी जिसके बारे में जानकर आप हैरान हो जायेंगे। आज हम आपको ऐसी ही एक अनोखी और एकदम हैरान कर देने वाली जगह के नाम से परिचित कराने जा रहे, जिसके बारे में आधे से ज्यादा काशीवासी भी अनभिज्ञ होंगे। पाकिस्तानी महादेव के नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर गंगा नदी के किनारे शीतला घाट (Sitla Ghat) पर स्थित है। गंगा नदी में स्नान करने के बाद लोग पाकिस्तनी महादेव का दर्शन करते है। इनकी पूजा का खास महत्व है। ऐसा माना जाता है कि इनके दर्शन से भक्तों की हर मनोकामना पूरी होती हैं।

इसलिए नाम पड़ा Pakistani Mahadev

बता दें कि भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के दौरान इस शिवलिंग को पश्चिम बंगाल (West Bengal) से काशी लाया गया था, जिसके बाद इनका नाम पाकिस्तानी महादेव (Pakistani Mahadev) रख दिया गया। तब से बाबा को इसी नाम से जाना जाता है। इसे लेकर मंदिर के पुजारी का कहना है कि इस मंदिर की स्थापना के लिए बूंदी स्टेट के अखाड़ा परिषद ने शीतला घाट के पास यह स्थान दिया। जिसे रघुनाथ व मुन्नू महाराज के सहयोग से यहां स्थापित कराया गया। बाद में इस मंदिर में महादेव की पूजा दायित्व कई लोगों ने लिया।

Pakistani Mahadev

मंदिर से जुड़ी ये कहानी

सन 1947 का वक़्त था, देश में आजादी का जश्न भी था और हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बंटवारे का दर्द भी। उस समय देश में हालात कुछ ठीक नहीं थे। पूरा देश दंगों की आग में जल रहा था। इसी दौरान पश्चिम बंगाल (West Bengal) में भी दंगा भड़क गया और वहां के लोग देश के अन्य हिस्सों में पलायन करने लगे। इन्हीं पीड़ितों में में से एक था जानकी बाई बोगड़ा का परिवार, जो पश्चिम बंगाल में दंगा भड़कने के बाद वहां से पलायन कर काशी आ गया।

Pakistani Mahadev

बताया जाता है कि बंगाल में जहां जानकी बाई बोगड़ा का परिवार रहता था, उन्होंने वहीं पर एक शिवलिंग की स्थापना भी की थी। दंगों के दौरान जब वो बंगाल से पलायन कर रहें थे तो उसी दौरान उन्होंने वह शिवलिंग भी अपने साथ काशी लेते आएं। हालाँकि यहाँ आकर उन्होंने उस शिवलिंग को परिवार के साथ शीतला घाट (Sitala Ghat) किनारे पहुँच कर गंगा में विसर्जन करने लगे तो वहां के कुछ पुरोहितों ने उन्हें ऐसा करने से रोका और उसी दौरान एक मंदिर की स्थापना यही काशी में कराई गयी, जिसका नाम पाकिस्तानी महादेव पड़ा।

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