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Mangalsutra : मंगलसूत्र क्या है? महिलाएं ही इसे क्यों पहनती हैं? क्या है इसका महत्व? जानें ऐसे तमाम सवालों का जवाब

Mangalsutra : हिन्दू धर्म में कई तरह की रीति-रिवाज व परंपराएं होती है, जिनके पीछे कई कारण व उद्देश्य छुपे होते है। लेकिन वहीं दूसरी ओर इन रीति-रिवाज व परंपराओं का क्या उद्देश्य है जबतक हम इन्हें नहीं जानते है, तबतक हमें ये अंधविश्वास या बिना मतलब की एक धार्मिक विधि लगती है। इसी तरह सनातम धर्म में पहने जाने वाले मंगलसूत्र को लेकर भी कई तरह भ्रांतिया व मिथक बातें फैली हुई है। जिन्हें जानना आपके लिए जरूरी है। जैसा कि आप सभी जानते है हमारे हिंदू धर्म में एक विवाहित स्त्री के लिए मंगलसूत्र (Mangalsutra) का बहुत महत्व होता, इसे सुहाग का प्रतीक माना जाता है। लेकिन क्या आपको पता है कि किसने इसे पहनने की परंपरा शुरु की, इसे क्यों पहना जाता है, इसका महत्व है। ऐसे कई तरह के सवाल है जिनके बारे में शायद आप पूरी तरह से नहीं जानते होंगे, आज हम आपको मंगलसूत्र (Mangalsutra) से जुड़ी कई बाते विस्तार से बताएंगे, जिन्हें जानकर आप भी सोचेंगे कि इस बात की तो जानकारी ही नहीं थी। तो चलिए फिर जानते है…

Mangalsutra : मंगलसूत्र का अर्थ

मंगलसूत्र शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है “मंगल” और “सूत्र”। मंगल का अर्थ मंगल ग्रह और सूत्र का मतलब होता है धागा यानि कि मंगल ग्रह का धागा। मंगलसूत्र (Mangalsutra) को हिन्दू धर्म में पवित्र सूत्र समझा जाता है। भारत में सभी विवाहित हिन्दू महिलाएं मंगलसूत्र पहनती है। यह उनके सुहाग की निशानी होती है, यह एक प्रकार का आभूषण है जो सोने के लॉकेट और मोतियों से बना होता है। देखने में यह माला (हार) की तरह होता है। आइए अब जानते है कि इसे पहनने की परंपरा कब शुरु हुई।

Mangalsutra

मंगलसूत्र का मंगल ग्रह से संबंध

जैसा कि आपको बताया गया कि Mangalsutra का क्या अर्थ होता है, तो आप ये भी जान लें कि मंगल सूत्र का संबंध मंगल ग्रह से जुड़ा हुआ है, अब आप सोच रहें होंगे कि यह तो एक आभूषण है भला इसका मंगल ग्रह से कैसा संबंध। तो आपको बता दें कि महिलाओं के जीवन में ये ग्रह बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस ग्रह का रंग लाल होता है यह शरीर में रक्त को दर्शाता है और पुरुष के मुकाबले महिलाओं में रक्त की कमी पाई जाती है, रक्त की कमी की कारण एक बीमारी होती है जो महिलाओं में ज्यादा होने की संभवाना देखी जाती है, वो है एनिमिया। मंगल ग्रह की मदद से रक्त की कमी में सुधार किया जा सकता है। वहीं यह ऊर्जा साहस सहनशीलता और शक्ति का कारक ग्रह माना गया है और महिलाओं में पुरुषों के मुकाबले शारीरिक तौर पर इनमें कमी पाई जाती है और इस कमी को मंगल ग्रह पूरा कर सकता है।

Mangalsutra

कैसे हुई मंगलसूत्र की रचना

ज्योतिष विज्ञान के अनुसार सभी ग्रह हमारे कोई ना कोई रिश्तेदार से जुड़े हुए होते है। मंगल ग्रह का लाल रंग प्रेम का प्रतीक है और इसीलिए लाल रंग का गुलाब और लाल रंग का कोई भी चिन्ह प्रेम के प्रतीक के रूप में इस्तेमाल किया जाता हैं। पति के साथ प्रेम को बढ़ाने में मंगल ग्रह सहायता कर सकता है। यह स्त्री की प्रजनन क्षमता के साथ भी जुड़ा हुआ है, स्त्री की मासिक धर्म का कारक भी यही ग्रह है। स्त्री की प्रजनन क्षमता को इससे बढ़ाया जा सकता है। स्त्री के जीवन में मंगल ग्रह का कारक होने के कारण पति-पत्नी के संबंध में मधुरता लाई जा सकती है। यह पति के आयुष और स्वास्थ्य को बढ़ा सकती है। यह पति के साथ मन मोटाव को कम कर सकता है। इस प्रकार महिलाओं के जीवन पर मंगल ग्रह का प्रभाव देखते हुए वैदिक ऋषि मुनियों ने महिलाओं के लिए मंगलसूत्र (Mangalsutra) की रचना की।

Mangalsutra

मंगलसूत्र महत्वपूर्ण क्यों है

आप मंगलसूत्र को देखेंगे तो उसमें एक सोने का पेंडेंट लगा होता है और लाल रंग के मोती होते हैं। अब आप में कहेंगे कि ज्यादातक महिलाएं तो लाल नहीं बल्कि काले मोती वाला Mangalsutra पहनती है। तो बता दें कि अगर मंगलसूत्र में लाल की बजाय काले मोती है तो वो मंगलसूत्र नहीं शनिसूत्र बन जाता है क्योंकि शनि काले रंग को दर्शाता है और जिसे नजर दोष के लिए पहना जाता है। अब आप कहेंगे कि मंगलसूत्र मंगल ग्रह को दर्शाता है तो वो पूरा लाल होना चाहिए उसमें सोने का पीला रंग क्यों होता है। तो बता दें कि ज्योतिष विज्ञान में मंगल ग्रह के साथ-साथ गुरु ग्रह को भी पति का कारक मानते हैं और सोना गुरु ग्रह से संबंधित है।

Mangalsutra

अब कई लोगों के मन में यह प्रश्न होगा कि हम इतने सक्षम नहीं है कि सोने के पेंडेंट वाला मंगलसूत्र पहन सकें, तो बता दें कि ऐसे लोग पीले धागे में लाल मोतियों को पीरों कर पहन सकते हैं जिसे सही मायने में असली मंगलसूत्र मानते है। वहीं आज के जमाने में मंगलसूत्र शनिसूत्र बन चुका है क्योंकि आज के मंगलसूत्र में लाल रंग की जगह काले मोती देखने को मिलते हैं और ऐसा मंगलसूत्र पहने से मंगलसूत्र बनाने और पहनने का जो उद्देश्य था वह खत्म हो जाता है। पुरानी परंपराओं में मानने वाली स्त्री आज भी लाल मंगलसूत्र को ही धारण करती हैं। वहीं काले मंगलसूत्र को पहनने से क्या प्रभाव पड़ता है ये भी जान लिजिए।

काले मंगलसूत्र को पहनने से क्या प्रभाव पड़ता है

आपने देखा होगा कि पुराने जमाने में चोर डाकू होते थे वे लोग काले रंग के कपड़े, माथे पर काला तिलक गले में काली ताबीज पहनते थे, क्योंकि चोरी और डकैती करने के लिए आप में बहुत ज्यादा चालाकी, विश्वासघात, धोखे जैसे गुण होने चाहिए और शनि ग्रह का काला रंग आपके अंदर दुर्गुणों की बढ़ोतरी करता है। ये एक नकरात्मता की भावना जगाता है इसलिए काले रंग को अशुभ माना जाता है।

Mangalsutra

पहले के जमाने में विवाह के समय काले रंग को सख्त वर्जित माना जाता था और ऐसे काले मोती वाले मंगलसूत्र या कहे कि शनिसूत्र को धारण करने से आपमें भी शनि के गुण पनप सकते हैं। आज के समय में लोगों के मैरिड लाइफ प्रॉब्लम की समस्याएँ दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, जिसे हम सभी देख रहें हैं। उसके पीछे भी कहीं न कहीं काले मोती वाला Mangalsutra धारण करना वजह हो सकती है।

मंगलसूत्र बनाने के पीछे उद्देश्य

  • मंगलसूत्र बनाने के पीछे हमारे वैदिक ऋषि मुनियों और ज्योतिष आचार्यों का उद्देश्य यह था एक विवाहित महिला के जीवन में सहनशक्ति और आत्मविश्वास बना रहें और वो सांसारिक जिम्मेदारियों को पूरा कर सकें, इसलिए इसका निर्माण किया गया था।
  • वहीं दूसरा उद्देश्य पति के साथ वैवाहिक जीवन को मधुर बनाना, उसका पति उसको मान सम्मान दें और प्यार करें और वैवाहिक जीवन में कोई भी समस्या उत्पन्न ना हो।
  • तीसरा उद्देश्य महिलाओं की प्रजनन क्षमता अच्छी हो और उत्तम संतान को जन्म दें सके।
  • चौथा उद्देश्य महिलाओं में रक्त संबंधित बीमारियां न हो और मासिक धर्म संबंधी दिक्कतें पैदा ना हो।

इन बातों को जानकर हम इतना तो जरूर कह सकते है कि ऋषि-मुनियों ने विवाहित महिलाओं को सिर्फ मंगलसूत्र ही नहीं दिया है साथ में यह भी बताया है कि विवाहित महिलाएं मंगल ग्रह की चीजें अपने शरीर पर धारण करें जैसे कि लाल सिंदूर, लाल बिंदी, लाल चूड़ियां, लाल शादी का जोड़ा इत्यादि जिससे महिला को मंगल ग्रह की पॅाजिटिव एनर्जी प्राप्त हो।

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