BHU के वैज्ञानिकों का बड़ा रिसर्च, बिना डाइटिंग-योग मात्र 3 माह में 6-10 किलो होगा Weight Loss

Weight Loss Tips : आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी (Life) और बिजी लाइफस्टाइल के कारण लोग अपनी हेल्थ (Health) पर ज्यादा ध्यान नहीं दे पाते हैं। ऐसे में उन्हें कई तरह की बीमारियां घेरने लगती है, जैसे आपका शरीर (Body) बेडोल होना, वजन बढ़ना व ऐसी कई अन्य समस्याएं। इनमें सबसे गंभीर समस्या में से एक है, जिससे अधितर लोग पीड़ित हैं वो हैं वजन बढ़ने (Weight Loss) का खतरा। जिससे आपको डायबिटीज ((diabetes) ब्लड प्रेशर बढ़ना (blood pressure), कैंसर (Cancer), कोरोना वायरस (Covid-19) सहित कई गंभीर बीमारियां होने के चांस होते है। वैसे तो इन सभी बीमारियों से खुद को बचाने के लिए कई उपाय है, जैसे आप डेली योगा-व्यायाम करें, लेकिन अपनी व्यस्त व अनियमित दिनचर्या के कारण बहुत से लोग है जो इसके लिए समय नहीं निकाल पाते।

तो चलिए ऐसे लोगों के लिए हमारे पास एक बहुत ही कमाल की खबर है। अगर हम आपसे कहे कि बिना योग और डाइटिंग के आप आराम से 5-10 किलो वजन घटा सकते है, तो शायद ही आपको यकीन हो। लेकिन यही सच है, क्योंकि बीएचयू (BHU) के चिकित्सा विज्ञान संस्थान के आयुर्वेद संकाय में काय चिकित्सा विभाग के विज्ञानियों ने एक महत्वपूर्ण रिसर्च (Research) किया है, जिससे ये संभव हो पाया है। तो चलिए जानते है इसके बारे में पूरी डिटेल्स

Weight loss

बीएचयू के चिकित्सा विज्ञान संस्थान (Institute of Medical Sciences of BHU) के आयुर्वेद संकाय में काय चिकित्सा विभाग के विज्ञानियों ने दुनिया में तेजी से बढ़ती ओबेसिटी (मोटापे) का उपचार ढूंढ लिया है। उन्होंने 82 मरीजों के दो समूहों पर किए गए प्रयोग से तीन माह में छह से दस किलो वजन कम करने में सफलता पाई है। यह संभव हुआ केवल आयुर्वेद की शास्त्रीय औषधियों के प्रयोग से।

खास बात यह कि इन दवाओं से साइड इफेक्ट तो दूर, व्यक्ति की आंतरिक शारीरिक शक्ति (Physical Strength) में वृद्धि ही हुई। डायबिटीज (Diabetes), हाइपरटेंशन (hypertension), शुगर लेवल घटा तो ब्लड प्रेशर (BP) बढ़ाने वाले खराब कोलेस्ट्राल की मात्रा घटी और अच्छे कोलेस्ट्राल में वृद्धि हुई। यही नहीं, गुणवत्तापूर्ण जीवन के विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के चार मानकों (Standards) फिजिकल, साइकोलाजिकल, वातावरण (Environment) संबंधी और सामाजिक में से दो मानकों फिजिकल, साइकोलाजिकल के मूल्यांकन का Result भी उत्साहजनक पाया गया।

Weight Loss 3 महीने तक की गई स्टडी

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यह शोध (Research) एसोसिएट प्रोफेसर डा. अजय पांडेय (Dr. Ajay Pandey) के निर्देशन में एमडी की छात्रा डा. मीनू (Dr. Meenu) ने किया है। डा. मीनू ने बताया कि शोध के दौरान मोटापे से ग्रस्त 40 से 60 वर्ष के 82 मरीजों के दो ग्रुप बनाए। 42 मरीजों वाले एक ग्रुप को तीन महीने तक फलत्रिकादि घनवटी की एक-एक टेबलेट तीनों टाइम लेखनीय महाकषाय क्वाथ के 40 मिलीलीटर के साथ दी गई। 40 मरीजों वाले दूसरे ग्रुप को आधुनिक चिकित्सा विज्ञान में इस्तेमाल होने वाली दवा मेटफार्मिन-500 एमजी की निर्धारित डोज दिन में एक बार दी गई।

प्रत्येक मानकों पर दिखा सुधार

आयुर्वेदिक औषधि लेने वाले समूह का औसत वजन तीन माह में 6-10 किलोग्राम घटा (Weight Loss), हीं अंग्रेजी दवा लेने वालों के वजन में 2-3 किलोग्राम कमी आई। बाडी मास इंडेक्स (BMI) आयुर्वेदिक औषधि से औसतन 30 से घटकर 27 हुआ। अंग्रेजी दवा में यह 29.7 से 29.5 रहा। पहले Group के लोगों की एब्डामिनल ओबेसिटी भी औसतन 120 से 114 सेमी घटा, जबकि मेटफार्मिन-500 से 119.9 से 119.6 सेमी कमी आई।

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आयुर्वेद से कोलेस्ट्राल (TGL) की मात्रा 290 से कम होकर 166.3 एमजी/डीएल हुई तो एलोपैथ की दवा से 277.6 एमजी/डीएल से 263.5 एमजी/डीएल ही कम हुई। पहले समूह के लोगों का गुड कोलेस्ट्राल (एचडीएल) बढ़कर 36.68 एमजी/डीएल से 50.87 एमजी/डीएल हुआ तो अंग्रेजी दवा लेने वालों का 35.94 से बढ़कर 36.82 एमजी/डीएल हुआ। आयुर्वेदिक दवा से मरीजों का शुगर (फास्टिंग) 138.3 से घटकर 108.29 तक पाया गया। वहीं, अंग्रेजी दवा से यह 144.59 से 106.8 पर आया। आयुर्वेदिक दवा लेने वालों का ब्लड प्रेशर (सिस्टोलिक) औसत 130 से घटकर 118 हुआ तो एलोपैथिक दवा से 130 से 120 हुआ।

डब्लूएचओ के गुणवत्ता पूर्ण जीवन के मानकों पर भी आयुर्वेदिक औषधि लेने वाले समूह के लोग शारीरिक और मनोवैज्ञानिक रूप से बेहतर पाए गए। इन मानकों का निर्धारण 26 प्रश्नों के उत्तरों के आधार पर किया जाता है। वहीं, एलोपैथ दवा लेने वाले इन दोनों मानकों पर अप्रभावित रहे।

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फलत्रिकादी घनवटी

आयुर्वेद के ग्रंथ ‘योग रत्नाकर’ में वर्णित एक औषधीय टेबलेट है। इसमें त्रिफला (हर्र, बहेड़ा, आंवला), त्रिकटु (सोंठ, काली मिर्च, पिप्पली) का योग होता है।

लेखनीय महाकाषाय

क्वाथ ‘चरक संहिता’ में वर्णित 50 महाकषायों में से एक है। इसमें नागरमोथा, कुष्ट, कुटकी, वचा (बालवज), हरिद्रा (हल्दी), चित्रक (चिरायता), चिरबिल (चिलबिल), हेमवती, अतिविषा होता है।

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इस शोध में प्रयुक्त आयुर्वेदिक औषधियां शास्त्रीय हैं

इस शोध (Research) में प्रयुक्त आयुर्वेदिक औषधियां शास्त्रीय हैं। ये औषधियां सिर्फ मेटाबोलिज्म (चयापचय) को ही ठीक नहीं करतीं, बल्कि रोगी के शारीरिक व मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाती हैं। आधुनिक चिकित्सा पद्धति के पास कोई ऐसी अकेली दवा नहीं, जो इतनी बीमारियों पर इतना प्रभावी हो। इन बीमारियों के लिए अनेक दवाएं लेनी पड़ती हैं, लेकिन यह औषधि अकेले ही कई बीमारियों को ठीक कर हमें स्वस्थ रखने में कारगर पाई गई है।

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