Saturday, December 16

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तो इस वजह से महिलाएं नहीं फोड़ती नारियल, जानें क्‍या है कारण

तो इस वजह से महिलाएं नहीं फोड़ती नारियल, जानें क्‍या है कारण

Lifestyle, Religion
भारतीय वैदिक परंपरा अनुसार श्रीफल शुभ, समृद्धि, सम्मान, उन्नति और सौभाग्य का सूचक माना जाता है। किसी को सम्मान देने के लिए उनी शॉल के साथ श्रीफल भी भेंट किया जाता है। भारतीय सामाजिक रीति-रिवाजों में भी शुभ शगुन के तौर पर श्रीफल भेंट करने की परंपरा युगों से चली आ रही है। विवाह की सुनिश्चित करने हेतु अर्थात तिलक के समय श्रीफल भेंट किया जाता है। बिदाई के समय नारियल व धनराशि भेंट की जाती है। यहां तक की अंतिम संस्कार के समय भी चिता के साथ नारियल जलाए जाते हैं। वैदिक अनुष्ठानों में कर्मकांड में सूखे नारियल को वेदी में हूम किया जाता है। प्राचीन समय से ही नारियल से संबंधित कई प्रकार की परंपराएं प्रचलित हैं।इन्ही परंपराओं में से एक अनिवार्य परंपरा यह है कि हिन्दू धर्म में स्त्रियां नारियल नहीं फोड़ती हैं। आमतौर पर स्त्रियों द्वारा नारियल फोड़ने को अपशकुन माना जाता है।इसीलिए घर के बुजुर्ग और
जानें आखिर हिन्दू धर्म में क्यों किया जाता है नवजात शिशु का मुंडन, क्‍या है इसके पीछे का रहस्‍य

जानें आखिर हिन्दू धर्म में क्यों किया जाता है नवजात शिशु का मुंडन, क्‍या है इसके पीछे का रहस्‍य

Religion
सदियों से हिन्दू धर्म को परम्पराओ से भरा हुआ धर्म माना जाता है और इस धर्म में व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक तमाम तरह की परम्पराओ का पालन करना पड़ता है। उन्ही परम्पराओ में से एक है व्यक्ति के जन्म के कुछ समय बाद में मुंडन संस्कार की परंपरा, जो बेहद अहम मानी जाती है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को पहले हमारे पूर्वज मानते थे और अब हम मानते है। करीब-करीब हर हिन्दू परिवार इस परंपरा का वर्षों से पालन करता आ रहा है, शायद इसलिए भी क्योंकि हमारे जीवन में इनका अपना विशेष महत्व रहा है। शास्त्रों के अनुसार मुंडन संस्कार में शिशु के सिर के सारे बाल उतारे जाते हैं, जिसे हिन्दुओं में बहुत ही पवित्र संस्कार माना जाता है। अक्सर इस तरह के संस्कारों को निभाने के लिए एक विशेष मुहूर्त का होना अनिवार्य होता है। बताना चाहेंगे की हिन्दू धर्म में इसे चूड़ाकर्म संस्कार भी कहा जाता है, क्योंकि अगर आपने
आइए जानते हैं हिन्दू धर्म में क्‍या है रुद्राक्ष का वास्तविक महत्व

आइए जानते हैं हिन्दू धर्म में क्‍या है रुद्राक्ष का वास्तविक महत्व

Interesting, Religion
रुद्राक्ष का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि इसकी उत्पत्ति भगवान शंकर की आँखों के जलबिंदु से हुई है। रुद्राक्ष का अर्थ है रुद्र अर्थात शिव की आंख से निकला अक्ष यानी आंसू। रुद्राक्ष के बारे में एक कथा प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है की एक बार भगवान शिव ने अपने मन को वश में कर संसार के कल्याण के लिए सैकड़ों सालों तक तप किया, तभी एक दिन अचानक ही उनका मन दु:खी हो गया और जब उन्होंने अपनी आंखें खोलीं तो उनमें से कुछ आंसू की बूंदें गिर गई। इन्हीं आंसू की बूंदों से रुद्राक्ष नामक वृक्ष उत्पन्न हुआ। शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता के अनुसार रुद्राक्ष 14 प्रकार बताए गए हैं तथा सभी का महत्व व धारण करने का मंत्र अलग-अलग है। इन्हें माला के रूप में पहनने से मिलने वाले फल भी भिन्न होते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इन रुद्राक्षों को विधि-विधान से धारण करने से विशेष लाभ