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जन्‍मदिन विशेष :पूर्व पीएम राजीव गांधी का एक फैसला बन गया उनकी हत्या की वजह

जन्‍मदिन विशेष :पूर्व पीएम राजीव गांधी का एक फैसला बन गया उनकी हत्या की वजह

आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी की जयंती है। वे देश सबसे युवा प्रधानमंत्री थे। राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। राजीव गांधी की प्रारंभिक शिक्षा देहरादून के दून स्कूल से हुई। 1961 में वह लंदन गये और वहां के इम्पीरियल कॉलेज और कैंब्रिज यूनिवर्सिटी से उन्होंने उच्च शिक्षा ग्रहण की। आज वो भले ही हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनका विजन आज भी हम सबको प्रेरणा देता है।

जन्‍मदिन विशेष :पूर्व पीएम राजीव गांधी का एक फैसला बन गया उनकी हत्या की वजह

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राजनीति में आने से पहले वो एक पायलट थे| पहले राजीव गांधी विजन को राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं था| लेकिन छोटे भाई के मौत के बाद उन्हें माँ इंदिरा की सहायता के लिए 1982 में राजनीति में आना ही पड़ा। सबसे पहले वो अमेठी से लोकसभा का चुनाव जीतकर सांसद बने थे| 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या कर दी गयी| इन्दिरा गांधी की मृत्यु के बाद राजीव गांधी भारी बहुमत के साथ प्रधानमंत्री बन गए|

राजीव के प्रमुख फैसले

राजीव गांधी के शाहबानो केस और अयोध्या मामले के फैसले को लेकर आज भी उनकी आलोचना की जाती है| राजी गांधी के प्रमुख फैसलो में अर्थव्यवस्था के सेक्टर्स को खोलना, 1988 उनकी चीन यात्रा, आईटी क्रांति की नीव, मतदान उम्र की सीमा 18 साल, ईवीएम मशीनों की शुरुआत और पंचायती राज के लिए उन्होने विशेष प्रयास किए थे।

फैसला श्रीलंका पर, जिसने ले ली उनकी जान

जब श्रीलंका में जातीय संघर्ष चल रहा था तो उस समय भारत और श्रीलंका के बीच 1987 में एक समझौता हुआ, जिसके तहत श्रीलंका में चल रहे ग्रहयुद्ध को खत्म करना था। इस वजह से भारतीय सेना श्रीलंका पहुंची थी लेकिन लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम जैसे उग्रवादी संगठन चाहते थे की भारतीय सेना वापस लौट जाए| क्योंकि उनके रहते वो अलग देश की मांग नहीं कर पा रहे थे| राजीव गांधी के इस फैसले ने उग्रवादी संगठनो के मंसूबों को कामयाब नहीं होने दिया था।

जन्‍मदिन विशेष :पूर्व पीएम राजीव गांधी का एक फैसला बन गया उनकी हत्या की वजह

परंतु जब 1989 में वीपी सिंह की सरकार बनी तो उन्होंने भारतीय सेना को श्रीलंका से वापस बुला लिया था| जिसके बाद उग्रवादी संगठनो को काफी राहत मिला लेकिन 1991 में चुनाव होने वाले थे| इस वजह से उग्रवादी संगठनो को डर था कि कहीं फिर से राजीव गांधी सत्ता में आ गए तो वो दोबारा श्रीलंका में सेना भेज सकते हैं। इसी से निजाद पाने के लिए लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम के उग्रवादियों ने 21 मई 1991 को तमिनलाडु की एक चुनावी सभा में राजीव गांधी पर आत्मघाती हमला कर दिया और उनकी जान ले ली| राजीव गांधी की मौत एक बड़ी साजिश के तहत किया गया था| उनके हत्याकांड में शामिल आरोपी आज भी जेल में बंद हैं|

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