बीतते समय के साथ-साथ बढ़ रही है इसरो की धड़कने, अब बचे हैं सिर्फ 12 दिन

बीतते समय के साथ-साथ बढ़ रही है इसरो की धड़कने, अब बचे हैं सिर्फ 12 दिन

इसरो के वैज्ञानिको को चंद्रयान-2 के लैंडर विक्रम की लोकेशन मिल गयी हैं और यह चाँद की सतह पर अपनी निर्धारित लोकेशन से पाँच सौ मीटर की दूरी पर दिखाई दिया हैं| बता दें कि चाँद के चक्कर काट रहे आर्बिटर ने लैंडर विक्रम की थर्मल तस्वीर भेजी हैं| हालांकि अभी तक लैंडर से संपर्क नहीं हो पाया हैं लेकिन लैंडर विक्रम से वैज्ञानिक संपर्क साधने की पूरी कोशिश कर रहे हैं| इस बात की जानकारी इसरो अध्यक्ष के सिवन ने सभी देशवासियों को दी| इसरो के वैज्ञानिकों को इस बात की खुशी हैं कि उन्हें लैंडर के लोकेशन का पता चल गया हैं| लेकिन पल-पल बितते समय के साथ इसरो के वैज्ञानिको की धड़कने भी तेज हो रही हैं क्योंकि उनके पास लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए मात्र 12 दिन बचे हैं |

बीतते समय के साथ-साथ बढ़ रही है इसरो की धड़कने, अब बचे हैं सिर्फ 12 दिन

अभी क्या कर रही है टीम इसरो

टीम इसरो मिशन कंट्रोल रूम से लगातार लैंडर से संपर्क करने की कोशिश कर रही हैं| हालांकि अभी जो तस्वीर मिली हैं उससे साफ़तौर से जाहीर नहीं होता हैं कि लैंडर पूरी तरह से सही-सलामत हैं| टीम इसरो पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि आखिर किन वजहों से लैंडर का संपर्क इसरो कमांड से टूट गया| वैज्ञानिक यह पता लगाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं कि लैंडर विक्रम चाँद की सतह पर हार्ड या सॉफ्ट लैंडिंग कर पाया| इतना ही नहीं वो यह जानने की कोशिश कर रहे हैं कि क्या विक्रम ने क्रैश किया या फिर वह सतह पर उतरने से पहले ही दिशा भटक गया, यदि क्रैश लैंडिंग हुयी तो कितना नुकसान हुआ| इतना ही नहीं वह यह जानने की भी कोशिश कर रहे हैं कि लैंडर विक्रम तक सूर्य को रोशनी पहुँच रही हैं, यदि पहुँच रही हैं तो उसे सोलर एनर्जी से रिएक्टिवेट किया जा सकता हैं|

क्या लैंडर विक्रम ने हार्ड लैंडिंग की हैं

लैंडर विक्रम के लोकेशन का पता इसरो के वैज्ञानिको को चल गया हैं, इसरो के एक वैज्ञानिक के मुताबिक लैंडर चाँद की सतह से तेजी से टकराया हैं और इस कारण वह पलट गया हैं और उसकी स्थिति ऊपर की ओर बताया जा रहा हैं| जिसकी वजह से ऐसी संभावना जताई जा रही हैं लैंडर विक्रम टूट गया हैं| वैज्ञानिक यह भी संभावना जता रहे हैं कि यदि विक्रम लैंडर हार्ड लैंडिंग के बाद भी नहीं टूटा होगा और उसके सभी उपकरण सही-सलामत होंगे तो उससे दोबारा संपर्क किया जा सकता हैं|

इसरो के पास क्यो बचे हैं केवल 12 दिन

बीतते समय के साथ-साथ बढ़ रही है इसरो की धड़कने, अब बचे हैं सिर्फ 12 दिन

इसरो के वैज्ञानिको का कहना हैं कि लैंडर विक्रम से संपर्क साधने के लिए सिर्फ 12 दिन ही बचे हैं क्योंकि अभी लूनर डे चल रहा हैं और इस लुनर डे में से 2 दिन बीत चुका हैं| एक लुनर डे पृथ्वी के 14 दिनों के बराबर होती हैं| ऐसे मे यदि इन 12 दिनों में लैंडर विक्रम से संपर्क नहीं किया जा सका तो फिर चाँद पर रात हो जाएगा, रात में इसरो के वैज्ञानिको को विक्रम से सपर्क साधने में बहुत मुश्किले होंगी| इतना ही नहीं रात के समय में चाँद पर आँधी या तूफान आने के संभावना हैं, ऐसे में विक्रम को नुकसान हो सकता हैं|

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