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Mother’s Day Special : मां का दुख सह नहीं सके ये बेटे, आश्रय सदन से घर ले जाकर निभाया ‘दूध का फर्ज’

Mother’s Day Special : मां का दुख सह नहीं सके ये बेटे, आश्रय सदन से घर ले जाकर निभाया ‘दूध का फर्ज’

माँ और उसके बच्चे का रिश्ता इस दुनिया में सबसे अनोखा होता है, यही एक रिश्ता है जो बच्चे के जन्म से पूर्व ही जुड़ जाता है। एक माँ ही होती है जो जीवन के पड़ाव में खुद से पहले अपने बच्चों के बारे में सोचती है। लेकिन यह मनुष्य की अजीब विडम्बना है कि जब बुढ़ापे में माँ को उसके बच्चे की ज़रूरत होती है तो वही बच्चे उसे अनदेखा कर अपने जीवन में आगे बढ़ जाते हैं। आप अक्सर ही ऐसी ख़बरों को सुनते होंगे कि किसी पुत्र ने अपनी माँ को घर से बाहर निकाल दिया या किसी बूढी माँ को उसके बच्चो द्वारा प्रताड़ित होने की खबर सुनते होगें। यहाँ तक कि कई बार तो बच्चे अपनी माँ की देखभाल न करनी पड़े इसलिए उसे किसी वृद्ध आश्रम में भी छोड़कर आ जाते हैं। आज Mother’s Day के मौके पर हम आपको इसी कहानी का एक अलग पहलू के बारे बताएँगे।

Mother’s Day Special : मां का दुख सह नहीं सके ये बेटे, आश्रय सदन से घर ले जाकर निभाया ‘दूध का फर्ज’

Mother’s Day के दिन किया बड़ा काम

आपको बता दें ऐसे भी बहुत से वाक़ये देखने को रहे हैं जहाँ पर पुत्र अपनी माँ को वृद्ध आश्रम से घर वापस ले गए हैं। हम बात कर रहे हैं वृन्दावन, मथुरा की जहाँ पर स्तिथ तीन मीरा आश्रय सदनों में से अब तक 50 माताओं को उनके बहु-बेटे और बेटियां अपने साथ घर वापस ले गए हैं। जो कि बहुत ही सरायनीय है, यह लोग समाज में एक अच्छा उदाहरण बन कर सामने आये हैं जिससे प्रेरित हो कर और भी लोग इस दिशा में सोचकर, आश्रय सदनों में रह रही अपनी माताओं को अपने घर वापस ले जायेंगे।

उड़ीसा की निवासी श्रीमति पिछले करीब 10 वर्षों से वृंदावन में रह रहीं थी लेकिन, जब उनके स्वास्थ्य खराब होने की खबर परिजनों को लगी तो वे भी उनसे मिले बिना नहीं रह सके। उनका परिवार तुरंत ही वृन्दावन पहुँच गया और उन्हें अपने साथ घर वापस ले गया। इस माँ और पुत्र के मिलन को देखकर आश्रम में मौजूद सभी लोगो की आखें नम हो गईं।

Mother’s Day Special : मां का दुख सह नहीं सके ये बेटे, आश्रय सदन से घर ले जाकर निभाया ‘दूध का फर्ज’

वही दूसरी ओर 15 साल से वृंदावन निवास कर रही पश्चिम बंगाल निवासी 75 वर्षीय मालती सरकार की बेटी को वृन्दावन में रह रही अपनी माँ के बारे में सुचना मिली तो वह फ़ौरन ही उनसे मिलने पहुँच गयी और फिर अपने साथ घर वापस लेकर आ गयी। आपको बता दें कि वृन्दावन में स्तिथ आश्रय सदनों में सितंबर, 2015 से अब तक 50 वृद्ध माताएं अपने घर लौट चुकी हैं।

अपने घर वापस लौट चुकी महिलाओं को नाम मीना घोष, सरस्वती दास, रघुदासी, गीता पाल, फूलमाला सरकार, कृष्णा बाई, किरन शर्मा, प्रेम ठाकुर, ऊषा दास, कमला बाई, मुन्नी देवी सिकरवार, गीता मंडल, शिव कुमारी, माया शाह, सुंदर मंडल, मल्लिका अहिल्या, कमलमति, दुर्गा शर्मा, प्रमिला सरकार, मीरा सिंह, ममता शाह, सुषमा मंडल, निशारानी हलदर, श्रीमति, बीना बाई, कौशल्या देवी, गौरी विश्वास, धनवंती देवी, शकुंतला देवी, मूर्ति दासी, लतिका सरकार, सीता देवी, पार्वती बुधोलिया, मालती सरकार आदि हैं।

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