Health

High Blood Pressure को इसलिए कहते है ‘साइलेंट किलर’, इन बातों को लेकर हमेशा रहें सतर्क

हेल्थ डेस्क। इस बात में कोई दो राय नहीं कि उच्च रक्तचाप या हाई बीपी, हाइपरटेंशन (Hypertension) की समस्या पिछले कुछ सालों में ज्यादा तेजी के साथ बढ़ी है। भारत में हर तीसरा व्यक्ति इस रोग का शिकार है। हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) साइलेंट किलर है, शायद यही वजह है कि इस बीमारी का पता हमें नहीं चल पाता है। खासकर हृदय रोगों, किडनी के निष्क्रिय होने जैसी अनेक समस्याओं के पीछे बीपी का अधिक होना ही प्रमुख वजह है। सबसे बड़ी बात यह है कि कई रोगियों को हाई ब्लड प्रेशर (High Blood Pressure) का पता ही नहीं चलता, क्योंकि इसका कोई खास लक्षण नहीं होता। हां, जब सिर में दर्द, देखने में दिक्कत, नींद सही से नहीं आने जैसी समस्याओं की जांच के लिए लोग  डॉक्टर  के पास जाते हैं तो पता चलता है कि रक्तचाप यानी हाई बीपी बढ़ा हुआ है।

ब्लड प्रेशर का खतरा बढ़ते उम्र के साथ ही हर किसी को अपनी चपेट में लेता है। 45 की उम्र के बाद ये रोग अमूमन लोगों को होता है, लेकिन ऐसा बिलकुल भी नहीं है कि ये रोग 45 के बाद ही लोगों को होता है।  कई बार ये भी देखने को मिला है कि कम उम्र भी व्यक्ति इस रोग का शिकार हो जाता है।

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भले ही ब्लड प्रेशर की समस्या को लोग गंभीरता से नहीं लेते मगर ये एक खतरनाक बीमारी है और इसे साइलेंट किलर के नाम से भी जाना जाता है।इस समस्या को कभी भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। निःसन्देह उच्च रक्त चाप एक साइलेंट किलर डिजीज है। कई बार तो रोगियों को सिर में दर्द या चक्कर आने की शिकायत होती है, लेकिन अधिकतर मस्तिष्क, हृदय, किडनी और आंखों पर असर होता है। 

High Blood Pressure: रखें इन बातों का ख्याल 

इस रोग से यदि आप बचना चाहते हैं तो 25 से 30 मिनट की कसरत कीजिए, भोजन में कम नमक का प्रयोग कीजिए। कम वसा वाले भोजन के इस्तेमाल से भी मानसिक तनाव से बचा जा सकता है। इसका बीपी रोगियों पर सकारात्मक असर दिखाई देता है। इसलिए बीपी रोगियों को उपचार और दवाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए।बता दें कि हाइपरटेंशन, हाई ब्लड प्रेशर की वह स्थिति होती है, जब धमनियों में रक्त का दबाव बढ़ता है। इसके कई कारण हो सकते हैं। इनमें तनाव, फास्ट फूड, व्यायाम की कमी, धूम्रपान का सेवन आदि शामिल है। सामान्य ब्लड सर्कुलेशन का रेंज 120/80 एमएमएच होता है। जबकि हाइपरटेंशन बढ़ने से इसका असर शरीर के मुख्य अंगों जैसे, ब्रेन, किडनी, हृदय, आंख आदि पर होता है।  

आपको पता होना चाहिए कि फास्ट फूड और फास्ट लाइफ ने हमारी जीवनशैली को पूरी तरह से बदलकर रख दिया है। इस गड़बड़ जीवनशैली के सहारे धीमे से बीमारियां कब हमें कई गंभीर व घातक बीमारियों का शिकार बना लेती हैं, कुछ पता भी नहीं चल पाता। ऐसी ही एक खतरनाक बीमारी है ‘हाई ब्लड प्रेशर’, जिसे ‘साइलेंट जानलेवा या घातक बीमारी’ भी कहते हैं।अमूमन सिर दर्द, नजर कमजोर होने, नींद सही से नहीं आने जैसी समस्याओं की जांच के लिए जब लोग जाते हैं तो पता चलता है कि रक्तचाप बढ़ा हुआ है और नियमित दवाई से ही इसे नियंत्रित रखा जा सकता है। कई बार रोगियों को सिर में दर्द या चक्कर आने की शिकायत होती है, लेकिन ज्यादातर बार मस्तिष्क, हृदय, किडनी और आंखों तक पर असर होता है।

गलत खानपान की आदतों के कारण ही हाइपरटेंशन या हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारी अन्य बीमारियों को दावत देते हैं। इसे साइलेंट किलर बीमारी भी माना जाता है। यह जानकर हैरानी होगी कि हार्ट अटैक हाइपरटेंशन की वजह से भी हो सकता है। लेकिन समय समय पर बीपी पर नजर रखकर और उसे नियंत्रित रखकर जटिलताओं को कम किया जा सकता है।रोजाना 25 से 30 मिनट की कसरत, कम नमक का प्रयोग, कम वसा वाले भोजन के इस्तेमाल से मानसिक तनाव से बचा जा सकता है। वाकई इसका बीपी रोगियों पर सकारात्मक असर दिखाई देता है। इसलिए बीपी रोगियों को उपचार और दवाओं का विशेष ध्यान रखना चाहिए। बहरहाल, ग्रामीण आबादी भी उच्च रक्तचाप की शिकार है और आज लगभग हर तीसरा भारतीय इस समस्या का शिकार है। यह लोगों की मृत्यु की भी बहुत बड़ी वजह है। पिछले कुछ सालों में बदली जीवनशैली ने लोगों के हाइपर टेंशन को बढ़ाया है।