Religion

Karwa Chauth : गुरुवार का करवा चौथ क्यों माना जाता है बेहद शुभ, जानें महत्व व पौराणिक कथा

Karwa Chauth : हिन्दू धर्म में करवा चौथ (Karwa Chauth) के व्रत का विशेष महत्व है, इस दिन सुहागिन महिलाएं अपनी पति की दीर्घायु के लिए दिनभर निर्जला व्रत रखती है। इसके बाद शाम में भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय जी की पूजा अर्चना कर, चंद्रमा के निकलने के बाद उसे अर्घ्य देकर अपने व्रत का पारण करती है। इस साल करवा चौथ 13 अक्टूबर को मनाया जाएगा, आइये जानते है इस (Karwa Chauth) व्रत का शुभ मुहूर्त पूजा विधि और महत्व…

Karwa Chauth : शुभ मुहूर्त

Karwa Chauth
  • चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – अक्टूबर 13, 2022 को 01:59 AM
  • चतुर्थी तिथि समाप्त – अक्टूबर 14, 2022 को 03:08 AM
  • करवा चौथ पूजा मुहूर्त – 05:54 PM से 07:09 PM
  • अवधि – 01 घण्टा 15 मिनट्स
  • करवा चौथ व्रत समय – 06:20 AM से 08:09 PM
  • अवधि – 13 घण्टे 49 मिनट्स
  • करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय- 08:09 PM

Karwa Chauth : क्या है गुरुवार का महत्व

हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की चतु्र्थी तिथि पर Karwa Chauth मानाया जाता है। इस साल करवा चौथ 13 अक्टूबर, यानी गुरुवार को पढ़ रहा है और गुरुवार की चतुर्थी तिथि को अति शुभ माना गया है। क्योंकि गुरुवार का दिन भगवान विष्णु को समर्पित होता है, जबकि चतुर्थी तिथि भगवान श्रीगणेश को। इस दिन विधि विधान के साथ भगवान शिव, माता पार्वती, भगवान गणेश और कार्तिकेय जी और करवा माता की पूजा होती है इसलिए इसे करवा चौथ कहा जाता है।

Karwa Chauth

Karwa Chauth : पूजा विधि

करवा चौथ के दिन सुहागिन महिलाएं 16 शृंगार कर, आभूषण आदि पहन कर शिव, पार्वती, गणेश, कार्तिकेय और चंद्रमा की पूजा करती हैं। पूजा से पहले पीले रंग की मिट्टी से गौरी जी की प्रतिमा बनाई जाती है और उनकी गोद में गणेशजी को बिठाया जाता हैं। अगर आप मिट्टी की प्रतिमा नहीं बना पाएं है तो बाजार से इसी तरह की प्रतिमा खरीद सकते हैं। प्रतिमा लाने के बाद मां गौरी को सुहाग का सामान अर्पित कर उनकी पूजा-आराधना करते है। इसके बाद करवा भरा जाता है, वहीं कुछ जगहों पर करवा में अनाज, मेवे आदि भरते हैं। करवा पर 13 रोली की बिंदी को रखा जाता है और हाथ में गेहूं या चावल के दाने लेकर करवा की पूजा की जाती है और चौथ की व्रत कथा सुनी जाती है। इसके बाद चंद्रमा के दिखने पर अर्घ्य दिया जाता है। इसके साथ ही, गणेश जी और चतुर्थी माता को भी अर्घ्य देना चाहिए।

Karwa Chauth : कथा

करवा चौथ (Karwa Chauth) की पौराणिक कथा के अनुसार, तुंगभद्रा नदी के पास देवी करवा अपने पति के साथ निवास करती थीं। एक दिन उनके पति नदी में स्नान करने गए थे, तो वहां उन्हें एक मगरमच्छ ने उनका पैर पकड़ लिया और नदी में खींचने लगा। करवा के पति उन्हें पुकारने लगे। आवाज सुनकर जैसे ही करवा दौड़कर नदी के पास पहुंचीं तो उन्हें देखा कि मगरमच्छ उनके पति को मुंह में पकड़कर नदी में ले जा रहा था। यह देखकर तुरंत ही करवा ने एक कच्चा धागा लिया और मगरमच्छ को एक पेड़ से बांध दिया। करवा का सतीत्व इतना मजबूत था कि वो कच्चा धागा टस से मस नहीं हुआ।

Karwa Chauth

अब मगरमच्छ और करवा के पति दोनों के ही प्राण संकट में थे। फिर करवा यमराज को पुकारने लगी। करवा ने यमराज से प्रार्थना की कि वो उनके पति को जीवनदान और मगरमच्छ को मृत्युदंड दें। लेकिन यमराज ने उन्हें इंकार कर दिया। उन्होंने कहा कि मगरमच्छ की आयु अभी बाकी है तो वो उन्हें मृत्युदंड नहीं दे सकता है, लेकिन उसके पति की आयु शेष नहीं है। यह सुनकर करवा बेहद क्रोधित हो गईं। उन्होंने यमराज को श्राप देने को कहा। उनके श्राप से डरकर यमराज ने तुरंत ही मगरमच्छ को यमलोक भेज दिया, साथ ही करवा के पति को जीवनदान दे दिया।

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