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अब इन कंपनियों में मिलेंगी पार्ट टाइम फ्रीलांस नौकरियां, यहां जानें

अब इन कंपनियों में मिलेंगी पार्ट टाइम फ्रीलांस नौकरियां, यहां जानें

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन और खाद्य प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेशको को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूलित इंसेंटिव पैकेज का प्रस्ताव दिया है। यह प्रस्ताव नई सरकार के लिए मंत्रालय की एक शाखा, उद्योग और आंतरिक व्यापार (DPIIT) को बढ़ावा देने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा तैयार 100-दिवसीय कार्य योजना के अंतर्गत बनाया गया है।

योजना के अनुसार, भारत सालाना प्रत्यक्ष 100 बिलियन अमेरीकी डॉलर का विदेशी निवेश आकर्षित कर सकता है, बशर्ते वह वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के वित्तीय इंसेटिव के अनुसार ही बनाया गया हो। इस योजना के तहत पार्ट-टाइम, शेयर्ड और फ्रीलांस नौकरियों को रोजगार की नई श्रेणी माने जाने का सुझाव दिया गया है। मंत्रालय ने इसके लिए 10-पॉइंट एक्शन प्लान तैयार किया है।

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दूसरे देशो की नीतियों से प्रेरित निवेशकों के लिए तैयार होंगे खास इंसेंटिव पैकेज:

दक्षिण-पूर्वी एशियाई राष्ट्र विदेशी निवेशकों को प्रभावी इंसेंटिव प्रदान करके आकर्षित करते है, जैसे कि कॉर्पोरेट टैक्स की कम दर और चार साल तक की टैक्स में छूट। एक वाणिज्य विभाग अधिकारी ने कहा, “इलेक्ट्रॉनिक्स, विनिर्माण, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण और अन्य क्षेत्रों में प्रमुख निवेश ऐसे प्रोत्साहनों के माध्यम से आ सकते हैं। प्राथमिकता वाले क्षेत्रों/बड़े निवेशकों को अनुकूलित प्रोत्साहन पैकेज प्रदान किए जाएंगे।”

इन श्रम से जुड़े क्षेत्रों में बड़ी निवेश क्षमता और रोजगार सृजन होता है। 10-पॉइंट कार्ययोजना में एक अनुकूल टैक्स सिस्टम, कानूनी बदलावों के माध्यम से रोजगार सृजन की रणनीति तैयार करना, प्राकृतिक संसाधनों का उचित आवंटन, छोटे व्यवसायों के लिए समर्थन, नवोदित उद्यमियों को बढ़ावा देने के लिए कदम, नई औद्योगिक नीति जारी करना भी प्रस्तावित किया गया है। वाणिज्य और उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु ने विस्तृत औद्योगिक नीति तैयार करने के लिए में कई आवश्यक परामर्श किए हैं।

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श्रम आधारित सेक्टरों में बढ़ेंगे रोजगार:

इन श्रम से जुड़े क्षेत्रों में बड़ी निवेश क्षमता के कारण रोजगार का भारी संख्या में सृजन होगा। इस प्रस्ताव में यह ध्यान दिया है कि श्रम गहन उद्योग में कानूनी बाधाओं को दूर करने की आवश्यकता है क्योंकि प्रतिबंधात्मक श्रम कानून व्यवसायों को बड़े पैमाने पर रखने की अनुमति नहीं देते हैं और नौकरी की औपचारिक भर्ती को हतोत्साहित करते हैं। इसने व्यवसायों को लचीलापन प्रदान करते हुए नौकरियों की नई श्रेणियों के रूप में पार्ट-टाइम, शेयर्ड और फ्रीलांस नौकरियों को मान्यता देने का प्रस्ताव किया है।

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