जानें, आखिर क्यों नहीं करना चाहिए कुंवारी कन्यायों को शिवलिंग का स्पर्श

देवों के देव महादेव  को सभी देवी देवताओं में सबसे श्रेष्ठ देव माना जाता है और कहा जाता है की महादेव सबसे दयालु देवता हैं इसीलिए है जो भी व्यक्ति उनकी सच्चे मन से आराधना करता है उसके ऊपर जो बड़ी ही आसानी से प्रसन्न हो जाते है और उनके इसी व्यवहार की वजह से उनका एक नाम भोलेबाबा भी है इसके साथ ही शिवलिंग की पूजा  करने से कुंवारी कन्यायों को अच्छा और मनचाहा वर की बिह प्राप्ति होती है इसीलिए इसीलिए हर सोमवार कुंवारी कन्यायें या विवाहिता स्त्री शिव जी का व्रत रखती है ताकि उन्हें भी मनचाहा वर की प्राप्ति हो|

इन सब के अलावा हमारे हिन्दू धर्म में शिवलिंग की पूजा  से जुड़ी एक मान्यता यह भी  है कि महिलाओं को खासतौर से कुंवारी कन्याओं को शिवलिंग को छूना वर्जित माना गया है और यही नहीं कही कहीं पर तो शिवलिंग की पूजा का ख्याल करना भी कुंवारी कन्यायों के लिए निषेध है|आज हम आपको इसी मान्यता के पीछे की वजह बताने वाले हैं हैं की आखिर क्यों महिलाओं और कन्यायों को शिवलिंग को छूना वर्जित है |

शिवपुराण के अनुसार लिंगम एक साथ योनि (जो देवी शक्ति का प्रतीक है एवं महिला की रचनात्मक ऊर्जा है) का प्रतिनिधित्व करता है और यही कारण है की स्त्री और कन्यायों को शिवलिंग के करीब जाने की आज्ञा नहीं होती है.

शास्त्रों के अनुसार भगवान शिव हरदम गंभीर तपस्या में लीन रहते हैं और इसलिए महिलाओं को शिवलिंग की पूजा न करने के लिए कहा गया है क्योंकि ऐसा ना करने से महादेव की तंद्रा भंग हो जाती है और जब शिव की तंद्रा भंग होती है तो वे क्रोधित हो जाते हैं|

इन सबके अवाला एक मान्यता यह भी है की महिलाओं का शिवलिंग को छुकर पूजा करना मां पार्वती को भी पसंद नहीं  है और इससे  मां पार्वती  नाराज हो सकती हैं  और हो सकता है की इसके वजह से  पूजा करने वाली महिलाओं पर की गई पूजा का विपरीत असर हो सकता है|

शिवपुराण के अनुसार कहा गया है की महिलाओं को शिव जी की पूजा मूर्ति के रूप में करना चाहिए और यदि ये पूजा पूरे शिव परिवार की हो तो यह विशेष लाभकारी मानी जाती है।

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