आखिर क्या है महामारी अधिनियम 1897, इसके जरिए कोरोना को कैसे रोकेगा भारत

इस समय पूरा विश्व कोरोना वायरस की चपेट में है और ज्यादातर देशों ने तो इसे महामारी तक घोषित कर
 
आखिर क्या है महामारी अधिनियम 1897, इसके जरिए कोरोना को कैसे रोकेगा भारत

इस समय पूरा विश्व कोरोना वायरस की चपेट में है और ज्यादातर देशों ने तो इसे महामारी तक घोषित कर दिया हैं। चीन से शूरू हुई यह बीमारी इटली, ईरान और अमेरिका में काफी भयंकर रूप ले चुकी हैं जबकि भारत में भी इस बीमारी से पीड़ित लोगों को सूची 80 को पार कर गई है। भारत के कई राज्यों में तो यह आपदा की स्थिति बन चुकी हैं जिनमे दिल्ली, बिहार, केरला, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, पंजाब, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र जैसे राज्य शामिल हैं। इन सभी राज्यों में स्कूल, कॉलेज, सिनेमाघर, जिम, क्लब इत्यादि पर 31 मार्च तक पाबंदी लगा दी गयी हैं।

इसी को लेकर भारत सरकार ने इस जानलेवा बीमारी से निपटने के लिये एक महत्वपूर्ण कदम उठाया हैं, कैबिनेट मंत्रिमंडल ने बीते बुधवार को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से महामारी अधिनियम 1897 यानी Epidemic Diseases Act 1897 के खंड 2 को लागू करने को कहा हैं। इसी को लेकर राज्यों सरकार ने इस पर काम करना भी शुरू कर दिया है।

क्या है महामारी अधिनियम 1897

आखिर क्या है महामारी अधिनियम 1897, इसके जरिए कोरोना को कैसे रोकेगा भारत

इस नियम का मुख्य उद्देश्य किसी भी महामारी को फैलने से रोकना और उससे बचाव करना है जब केंद्र सरकार या राज्य सरकार को यह लगता है कि देश के किसी हिस्से में या किसी राज्य में महामारी फैल चुकी हैं या फेलने की आशंका है और वर्तमान कानून व्यवस्था इसे नियंत्रण में रखने में नाकाफी हैं तो सरकार यह अधिनियम लागू करके उस महामारी से निपटने के लिये बेहतर नियम तैयार कर सकें।

इस महामारी अधिनियम 1897 के दूसरे खंड के अनुसार अगर कोई महामारी से पीड़ित व्यक्ति रेल, हवाई जहाज या जल-मार्ग के द्वारा यात्रा कर रहें है तो बीच रास्ते मे उन्हें उतारकर उनका इलाज करवाया जा सकता हैं और अगर जरूरत पड़ी तो वो मरीज को जब तक वो ठीक ना हो उपचार केंद्र पर रखा जा सकता हैं। जबकि इस अधिनियम के भाग 3 के अनुसार अगर कोई भी केंद्र के आदेश को नही मानता हैं तो उन्हें भारत दंड संहिता के अनुसार दंड देने का बी प्रावधान हैं।

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आखिर क्या है महामारी अधिनियम 1897, इसके जरिए कोरोना को कैसे रोकेगा भारत

पहले कब हो चुका हैं यह अधिनियम लागू

सबसे पहले इस अधिनियम को 1890 में लागू किया गया था जब बॉम्बे प्रेसीडेंसी में प्लेग फैल चुका था लेकिन ब्रिटिश सरकार ने इस कानून का गलत फायदा उठाया और जबरन लोगों को जेल में बंद करना शुरु कर दिया। वर्ष 2009 में जब पुणे में स्वाइन फ्लू फैला था तो पुणे में इस अधिनियम का भाग 2 लागू किया गया था, इसके अलावा 2015 में चंडीगढ़ में डेंगू और मलेरिया से निपटने के लिए इस अधिनियम को लागू किया गया था।

इस बार कहा हो चुका है यह नियम लागू

कोरोना वायरस से निपटने के लिए सबसे पहले कर्नाटक ने इसे लागू किया हैं और कर्नाटक सरकार के द्वारा जारी निर्देश के अनुसार किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को अस्पताल में 14 दिन तक या रिपोर्ट सामान्य आने तक रखा जाएगा अगर कोई संदिग्ध व्यक्ति अस्पताल जाने से मना करता हैं तो अधिकारी जबरन उसे अस्पताल में दाखिल करवाएंंगे।

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