गांव की दशा सुधारने के लिए अच्छी खासी नौकरी छोड़ सरपंच बनी ये लड़की, पीएम ने दिया सम्मान

हिंदुस्तान में महिलाएं आज पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चल रही हैं। हर क्षेत्र में महिलाओं का योगदान है। गांव की मिट्टी से लेकर संसद भवन तक महिलाओं का वर्चस्व है। सबसे बड़ी बात ये है कि महिलाओं ने समाज मे बदलाव लाने की बहुत कोशिशें की हैं। आज हम आपको एक ऐसी लड़की की कहानी बताने जा रहे हैं जिसने मात्रा 23 साल की उम्र में अच्छी खासी नौकरी छोड़ दी और सरपंच बन गई। जी हां ये कहानी है हरियाणा के कैथक के ककराला कुचिया की रहने वाली प्रवीण कौर की। इन्होंने अपने गांव की सूरत बदलने की जिद में अपनी नौकरी तक कुर्बान कर दी।

प्रवीण ने ये कैसे किया ?

प्रवीण बचपन से ही बहुत होनहार थीं। उनका सपना था एक अच्छा इंजीनियर बनने का। उन्होंने इसके लिए बहुत पढ़ाई भी की। वो इंजीनियर बन भी गईं पर गांव की समस्याएं जैसे ही उन्हें दिखीं उन्होंने अपना इरादा बदल लिया। उन्होंने सरपंच का चुनाव लड़ने का फैसला किया। इसके बाद क्या था गांव वालों ने उन्हें रजामंदी से अपना सरपंच चुन लिया। प्रवीण शुरू से गांव में रहीं हैं। उन्होंने वहां की समस्या देखी है। वो जानती हैं कि वहां लोग कितनी तकलीफ में रहते हैं। वो शुरुवात से ही अपने गांव के लिए बहुत कुछ करना चाहतीं थीं । प्रवीण की प्राथमिकता सिर्फ और सिर्फ गांव का विकास करना है। प्रवीण का मानना है कि अगर वो आगे भी सरपंच बनी तो वो विकास के कार्य करने में पीछे नहीं हटेंगी।

प्रवीण के काम करने का तरीका जानिए

प्रवीण ने गांव में एक टीम बनाकर रखी है। ये टीम गांव के लोगों से उनकी समस्यायों के बारे में जानकारी लेती है। इससे प्रवीण को उन समस्यायों को सुलझाने में मदद मिलती है। प्रवीण ने गांव में बच्चों की पढ़ाई का इंतेजाम किया। अपने गांव के स्कूल को 12वीं तक करवाया। यहीं नहीं महिलाओं के लिए भी प्रवीण ने काम किया। घरेलू हिंसा की समस्या को उन्होंने अपनी सूझबूझ से सुलझाया।

उन्होंने गांव के पंचों के सामने अपनी बात रखी। आपको शयाद सुनकर हैरानी हो मगर उन्हें 2017 में पीएम मोदी से सम्मान भी मिला है। उन्होंने आने गांव में इतना अच्छा काम किया कि अब सभी लोग उनके बारे में जानते हैं। आजकल के वक्त को देखते हुए प्रवीण सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहती हैं। हरियाणा विधानसभा चुनाव में दौरान उन्होंने वोटर्स के बीच वोट अपील भी की। ऐसी ही महिलाओं की आज देश को जरूरत है।

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