कभी करती थीं रिसेप्शनिस्ट का काम, आज करती हैं बैंकों के कर्ज वसूली का काम

आज के इस युग को महिलाओं का जमाना भी कहा जाता हैं, ये भी कहा जाता हैं कि आज के इस समय में महिलाएं किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं। आज हम आपको एक ऐसी महिला की कहानी बताने जा रहें हैं जो हर किसी के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत का काम कर सकती हैं, जिस महिला की आज हम बात कर रहें हैं उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआत एक रिसेप्शनिस्ट से की थी और आज वो एक ऐसी कंपनी चला रही हैं जिसका कार्य बैंक के फंसे हुए लोन की वसूली करना हैं। चलिए जानते हैं इस महिला के बारे में जिनका नाम हैं मंजू भाटिया,

कैसे बनी रिसेप्शनिस्ट से कलेक्शन कंपनी की मालकिन

मूल रूप से इंदौर निवासी मंजू भाटिया अपने शहर में ही एक दवाई बनाने वाली कंपनी में बतौर रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्य करने लगी थी जब उनकी उम्र महज 16 वर्ष की थी। स्कूली पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने कच्चे माल का ट्रेडिंग करना शूरु कर दिया था, इसी के साथ वो इस बात में भी निपुण हो गई थी कि एक्सपोर्ट लाइसेंस कैसे प्राप्त किया जा सकता हैं। उन्होंने कभी भी अपनी पढ़ाई को नहीं छोड़ा और बैचलर ऑफ लॉ की डिग्री प्राप्त की।

इसी बीच उनके पारिवारिक मित्र पराग ने मंजू से गुजारिश की कि वो अपनी एक लोन रिकवरी कंपनी बनाना चाह रहें हैं तो वो उनकी मदद चाहते हैं। 1998 में उनके मित्र ने कंपनी की स्थापना की और बाद में उन दोनों ने विवाह कर लिया और कंपनी चलाने की जिम्मेदारी अपनी पत्नी यानी मंजू को सौंप दी।एक मशहूर नेता से बैंक का पैसा वसूल करने का कार्य भी इनकी कंपनी ने ही किया था।

क्यों बनाया लोन रिकवरी को मुख्य पेशा

अपने पति की कंपनी संभालते हुए उन्हें ये महसूस होने लगा कि ग्राहक और बैंक के बीच कुछ गलतफहमी होने के कारण ही समस्याएं खड़ी होने लगती हैं। उन्होंने सोचा कि इन गलतफहमी को बेहतर संवाद स्थापित करके ही किया जा सकता हैं और ये काम कोई औरत ही बेहतर रूप से कर सकती हैं इसलिए उन्हें लगा कि उन्हें इस क्षेत्र को मुख्य रूप से पेशा बनाना चाहिए।

पुरुषों की जगह दी महिलाओं को वरीयता

उनके अनुसार रिकवरी करने वाले पुरुष ग्राहकों से मारपीट पर उतारू हो जाते हैं जिसके कारण समस्या बढ़ जाती हैं इसी वजह से उन्होंने अपनी कंपनी में सिर्फ महिलाओं को ही जगह दी लेकिन उनके लिए ऐसा करना आसान नहीं था क्योंकि लोगों का मानना हैं कि महिलायें रिकवरी एजेंट का काम नहीं कर सकती लेकिन उन्होंने इस मिथक को तोड़ कर इस क्षेत्र में नए आयाम स्थापित किए।

कैसे आई थीं सुर्खियों में

कुछ साल पहले की ही बात हैं जब मध्यप्रदेश के एक नामी मंत्री ने एक बैंक से लोन लिया था लेकिन उसको चुकाने में उन्होंने कोताही बरत दी थीं। जिसके कारण उस बैंक ने लोन की वापसी के लिए एक रिकवरी कंपनी को नियुक्त किया गया था, तो वो कंपनी मंजू भाटिया की ही थी। मंजू भाटिया ने मंत्री से अपॉइंटमेंट लेकर उनसे मुलाकात की और उन्हें बड़े विनम्र रूप से लोन की अदायगी करने को कहा जिसके बाद उस मंत्री ने अपने अकॉउंटेन्ट के द्वारा उसी समय लोन की बकाया राशि चुका दी। सबसे दिलचस्प बात ये थी कि उस समय मंजू की आयु केवल 19 वर्ष थीं और उन्होंने ये साबित कर दिया था कि रिकवरी के क्षेत्र में केवल पुरूषों का ही एकाधिकार नहीं हैं।

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