काशी में एक बार फिर होगा मोदी का आगमन, शुरू होने जा रहा जंगमबाड़ी मठ में वीर शैव महाकुम्भ

काशी के अद्भुत जंगबाड़ी मठ में 38 दिवसीय श्री जगद्गुरु विश्वराध्य गुरुकुल शतमानोत्सव एवं वीरशैव महाकुम्भ बुधवार से शुरू से शुरू हो चुका है। 18 जनवरी को योगी आदित्यनाथ एवं 15 फरवरी को कर्नाटक के मुख्यमंत्री येदुरप्पा व संसदीय कार्यमंत्री प्रह्लाद जोशी आएंगे मेले में शामिल होंगे।

पीएम मोदी भी होंगे शामिल

बता दें कि आज महाकुम्भ में रेल राज्यमंत्री सुरेश अंगड़ी आएंगे, बता दें कि प्रधानमंत्री यहां पर 19 देसी-विदेशी भाषाओं में अनुवादित ‘श्री सिद्धांत शिखामणि’ एवं इसी ग्रंथ के मोबाइल एप को लांच करेंगे तो योगी आदित्यनाथ ‘श्रीकाशी विश्वराध्य गुरुकुलम’ नामक पुस्तक का लोकार्पण करेंगे। महाकुंभ में कई राज्यों के वीर शैव समाज के उप अधिवेशन भी शामिल होंगे।

इस दौरान ग्रंथों के प्रकाशन के अलावा कई प्रोगाम भी होंगे। आपको बताते चले कि जंगमबाड़ी मठ के सौ साल पूरा होने पर दो साल पहले जित शतमानोत्सव पर्व के शुभारंभ पर भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचे थे।

5वीं शताब्दी में काशी के अद्भुत जंगमबाड़ी मठ की हुई थी स्थापना

यह काशी का सबसे प्राचीन मठ है, इस मठ में बटुकों को ज्ञान प्राप्त होता है और दूर से आने वाले श्रद्धालुओं को सुविधा भी दी जाती है। वर्ष 1918 में जगदगुरु विश्वराध्य गुरुकुल की स्थापना वीर शैव धर्म के पांच पीठों के आचार्यों की देख रेख में हुई। काशी के अद्भुत जंगबाड़ी मठ में अनगिनत शिवलिंग मौजूद हैं। 5वीं शताब्दी में काशी विश्वनाथ ज्योतिर्लिंग से गतगुरु विश्वाराध्य जी ने मठ की स्थापना की थी। तो वहीं शिवलिंग की स्थापना जगतगुरु विश्वाराध्य के बाद से शुरू हुई थी। इसके बाद में राजा जयचंद ने भूमि दान दिया और निर्माण कराया।

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मुक्ति के लिए शिवलिंग की स्थापना

देश के कई राज्यों में वीर शैव सम्प्रदाय के लोग हैं जो पूर्वजों के मुक्ति के लिए यहां पिंडदान की जगह शिवलिंग स्थापित करते हैं। ऐसी मान्यता है कि वीर शैव सम्प्रदाय के जिन लोगों की अकाल मृत्यु होती है उनके नाम से यहां शिवलिंग स्थापित किया जाता है। ऐसा करने से उन लोगों को मुक्ति की प्राप्ति होती है।

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