महाराणा प्रताप के अनमोल विचार | Maharana Pratap Quotes in Hindi

देश के पहले स्वतंत्रता सेनानी के रूप में जाने जाने वाले महान योद्धा महाराणा प्रताप के बहादुरी की आगरा में बहुत चर्चा होती थी। महाराणा प्रताप का नाम इतिहास में अपनी वीरता और दृढ़ता के लिए प्रसिद्ध है। यही कारण है कि अकबर जैसे महान और शक्तिशाली सम्राट को भी रात में उनके सपने आते थे। आज हम आपके लिए शूरवीर महाराणा प्रताप के अनमोल विचार लेकर आये हैं जिन्हें हर किसी को ना सिर्फ पढ़ना चाहिए बल्कि उसे अपने जीवन में अमल भी करना चाहिए। 9 मई 1540 को कुंभलगढ़ दुर्ग (पाली) में जन्मे वीरता और युद्ध कला के लिए मशहूर महाराणा प्रताप सिसोदिया राजवंश के महाराणा उदयसिंह एवं माता रानी जीवत कंवर के पुत्र थे।

 

महाराणा प्रताप के अनमोल विचार

1. ये संसार कर्मवीरो की ही सुनता है। अतः अपने कर्म के मार्ग पर अडिग और प्रशस्त रहो।
2. मातृभूमि और अपने मां में तुलना करना और अन्तर समझना निर्बल और मूर्खों का काम है।
3. हल्दीघाटी के युध्द ने मेरा सर्वस्व छीन लिया हो। पर मेरी गौरव और शान और बढा दिया। – महाराणा प्रताप के अनमोल विचार
4. समय इतना बलवान है कि राजा को भी घास की रोटी खिला सकता है।
5. जो अत्यंत विकट परिस्तिथत मे भी झुक कर हार नही मानते। वो हार कर भी जीते होते है।

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6. ये दुनिया कर्म करने वालों को ही पसंद करती है, इसलिए कर्म करो।
7. अपनी कीमती जीवन को सुख और आराम कि जिन्दगी बनाकर कर नष्ट करने से बढिया है कि अपने राष्ट्र कि सेवा करो।
8. हार आपसे आपका धन छीन सकती है लेकिन आपका गौरव नहीं।
9. गौरव,मान- मर्यादा और आत्मसम्मान से बढ कर कीमती जीवन भी नही समझना चाहिए।
10. जो बुरे वक्त से डर जाते है उन्हें न सफलता मिलती है और न ही इतिहास में जगह।

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महाराणा प्रताप के अनमोल विचार | Maharana Pratap Quotes in Hindi

11. जो सुख मे अतिप्रसन्न और विपत्ति मे डर के झुक जाते है, उन्हें ना सफलता मिलती है और न ही इतिहास मे जगह।
12. जो इंसान अपने और परिवार के आलावा भी सबके विषय में सोचे वो ही सच्चा नागरिक कहलाने के योग्य है।
13. अपने कर्मों से वर्तमान को इतना विश्वास दिला दो कि वो भविष्य को भी अच्छा होने पर मजबूर कर दे।
14. कष्ट,विपत्ती और संकट ये जीवन को मजबूत और अनुभवी बनाते है। इनसे डरना नही बल्कि प्रसन्नता पूर्वक इनसे जुझना चाहिए।
15. सुख से जीवन जीने से अच्छा है, राष्ट्र के लिए कष्ट सहो।
16. अपने कतर्व्य,और पुरे सृष्टि के कल्याण के लिए प्रयत्नरत मनुष्य को युग युगांतर तक स्मरण रखा जाता है।
17. सम्मानहीन व्यक्ति मुर्दे के समान है।

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