माला के बिना क्यों पूरा नहीं माना जाता “जप”, जानिए कौन सी माला दिलाता है पूरा फल

हर धर्म में ईश्वर को याद करने के अलग-अलग तरीके हैं, ऐसे ही हिन्दू धर्म में लोग अपने ईश्वर को पूजा-पाठ द्वारा तो कभी मंत्रो के जाप द्वारा याद करते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त करते हैं, लेकिन इनमें सबसे ज्यादा प्रभावशाली मंत्रो का जाप माना जाता हैं क्योंकि मंत्र के जाप से मन को तुरंत एकाग्र किया जाता हैं| दरअसल मंत्र कई प्रकार के होते हैं और इनके जाप करने के तरीके, प्रभाव भी अलग तरीके का होता हैं, इसके अलावा इन मंत्रो के जाप के लिए अलग-अलग मालाओं का प्रयोग किया जाता हैं| दरअसल बिना मालाओं के मंत्र का जाप करना संख्याहीन माना जाता हैं और बिना माला के मंत्र के जाप का फल प्राप्त नहीं होता हैं|

माला के बिना क्यों पूरा नहीं माना जाता "जप"

क्या महत्व हैं माला का मंत्र जाप में

बता दें कि मंत्र जाप में मालाओं का इसलिए भी प्रयोग किया जाता हैं ताकि मंत्रो की संख्या में किसी प्रकार की त्रुटि ना हो सके और माला में लगे दानों को मनका कहा जाता हैं| मालाओं में अक्सर 108 दाने होते हैं| लेकिन कभी-कभी इन मालाओं में मनको की संखा 27 और 54 भी होती हैं| माला हमेशा व्यक्तिगत होना चाहिए, दूसरे किसी व्यक्ति के माला का उपयोग ना करे| एक बात का हमेशा ध्यान रखे कि जिस माला का उपयोग आप मंत्र जाप के लिए करते हैं, उसे कभी धारण ना करे|

क्यों मालाओं में होते हैं 108 मनके

बता दें कि मालाओं के 108 मनको और सूर्य की कलाओं का संबंध है क्योंकि एक वर्ष में सूर्य करीब 216000 कलाएं बदलता है। इसके अलावा सूर्य साल में दो बार अपनी स्थिति भी बदलता है और इस तरह सूर्य छह महीने की एक स्थिति में 108000 बार अपनी कलाएं बदलता है| इसी संख्या 108000 से अंतिम तीन शून्य को हटा कर मालाओं के 108 मनके निर्धारित किए गए हैं। दरअसल माला का हर एक मनका सूर्य की हर एक कला का प्रतीक होता है और सूर्य ही एकमात्र साक्षात दिखने वाले भगवान हैं।

माला के बिना क्यों पूरा नहीं माना जाता "जप"

इन मालाओं में रुद्राक्ष की माला एक ऐसी माला हैं जिसका प्रयोग आप किसी भी मंत्र के जाप के लिए कर सकते हैं| खास कर भगवान शिव और उनके परिवार के लोगों के मंत्र रुद्राक्ष पर खास कर लाभकारी होते हैं| खास कर महामृत्युंजय और लघुमृत्युंजय मंत्र के जाप के लिए रुद्राक्ष की ही माला का प्रयोग करे| रुद्राक्ष के माला के अलावा स्फटिक की माला, हल्दी की मालाचन्दन की माला और तुलसी की माला का भी प्रयोग मंत्रो के जाप के लिए किया जाता हैं|

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