बसंत पंचमी विशेष : जानें मां सरस्वती के पूजन में पीले रंग का क्यों है महत्व?

जैसा की हम सभी जानते हैं की इस वर्ष बसंत पचंमी 22 जनवरी को है। हिंदू मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी हर साल माघ माह के पांचवे दिन मनाई जाती है, यही वजह है कि इस त्योहार का नाम बंसत पंचमी पड़ा। चूंकि बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है इसीलिए इस दिन को सरस्वती पूजा के नाम से भी जाना जाता है। अक्सर अपने देखा होगा की माँ सरस्वती को पीले रंग के वस्त्रों से सुसज्जित किया जाता है और इसके साथ ही इस शुभ अवसर पर सभी लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं इसके साथी ही मां सरस्वती को इस दिन पीले रंग के फूल चढ़ाए जाते हैं और पीले रंग के व्यंजनों का भोग भी  लगाया जाता है लेकिन क्या अपने कभी सोचा है की आखिर ऐसा क्या कारण है जिसके वजह से बसंत पंचमी के दिन पीले रंग का इतना महत्व है।

आज हम आपको इसके पीछे की वजह बताने वाले है, जैसा की हम जानते है की नया साल शुरू होते ही सबसे पहला जो पर्व मनाया जाता है वो होता है लोहड़ी और मकर संक्रांति का और उसके बाद तो जैसे त्योहारों की बहार ही आ जाती है। मकर संक्रांति और लोहड़ी के ठीक बाद बंसत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है और इस वर्ष ये पर्व 22 जनवरी को है यानी की कल मनाया जाएगा। बसंत पंचमी के दिन माँ सरस्वती की पूजा की जाती है और जैसा की हम भी जानते हैं कि माँ सरस्वती को ज्ञान की देवी कहा जाता है और इसीलिए ये दिन विद्यार्थियों के लिए बेहद ही शुभ दिन माना जाता है।

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बताना चाहेंगे कि बसंत पंचमी के महापर्व को पूरे उत्तर भारत में बहुत ही धूमधाम से मनाया जाता है और ऐसा भी देखा गया है कि भारतीय संस्कृति में वसंत ऋतु को सबसे महत्वपूर्ण मौसम माना जाता है। इस मौसम में न तो चिलचिलाती धूप होती है, न सर्दी और न ही बारीश, वसंत में पेड़-पौधों पर ताजे फल और फूल खिलते हैं। वसंत के नजरिये से तो ये माह काफी शुभ होता ही है वहीं दूसरी तरफ ये दिन बच्चों का बच्चे के पढ़ने और लिखने के लिए बेहद ही शुभ मानते हैं।

 

बसंत पंचमी की पूजा में सबसे खास महत्व होता है पीले रंग का और ऐसा इसीलिये होता है क्योंकि पीले रंग को वंसत का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि मां सरस्वती को पीला रंग बेहद प्रिय होता है और इसीलिए इस दिन पीले रंग को खास महत्व दिया जाता है।

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