आइए जानें, पितृपक्ष में घर पर तर्पण करने का क्या है सही तरीका

पितृ पक्ष की शुरुआत 13 सितंबर से शुरू हो चुकी हैं और यह 28 सितंबर तक चलेगी| ऐसे में आप इन 15 दिन के अंदर अपने पितरों का तर्पण कर सकते हैं, तर्पण करने से हमारे पितरों को मुक्ति मिलती हैं, ऐसे कहा जाता हैं कि पितरों की पूजा करने से भगवान भी प्रसन्न होते हैं| ऐसे में आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आप अपने घर पर ही कैसे तर्पण कर सकते हैं| दरअसल बहुत लोगों के पास समय नहीं होता हैं कि वो किसी कर्मकांडी पुरोहित के पास जाकर विधि-विधान पूर्वक तर्पण करे| लेकिन जहां तक संभव हो सके तो आप किसी कर्मकांडी पुरोहित से ही तर्पण कराये, ऐसा करने से आपके पितृ आपसे से प्रसन्न रहते हैं|

घर पर पितृ तर्पण कैसे करे

यदि आपके पास समय हैं तो आप किसी कर्मकांडी पुरोहित द्वारा ही तर्पण कराये| लेकिन आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी में हर किसी के पास समय कम होता हैं| लेकिन ऐसा भी नहीं कि इस भागदौड़ जिंदगी में लोग अपने पितरों का तर्पण ना करे, ऐसे में लोग अपने घर भी तर्पण करके उनको तृप्त कर सकते है|

(1) आप अपने घर पर ही तर्पण कर सकते हैं, इसके लिए सबसे पहले आप हाथ जोड़कर अपने मन में भगवान श्री गणेश का ध्यान करें और आपकी जलांजलि को निर्विघ्न पूर्ण कर उसे पितरों द्वारा स्वीकारे जाने की प्रार्थना करें। इसके बाद अब गहरे तले वाले दो बर्तन लें, बर्तन स्टील या पीतल का हो तो ज्यादा अच्छा है।

(2) अब एक बर्तन में सबसे पहले शुद्ध जल लेकर इसमें थोड़ी मात्रा में गंगा जल मिलाएं और फिर इसमें दूध, काले तिल, चंदन, जौ, चावल और चंदन डालकर अच्छी तरह मिला लें|

(3) अब आप दक्षिण दिशा की ओर मुंह कर के बैठ जाएं, इसके बाद एक कुशा लेकर उसे दोहरा करें और तिरछा रखते हुए दाहिने हाथ में अंगूठे से पकड़ें| अब आप अपने गोत्र का नाम लेते हुए पितरों का आह्वान करते हुए कहें ‘हे पितर! कृपा कर मेरी ये जलंजलि स्वीकार करें|’

(4) जैसे यदि आप अपने पिता के लिए तर्पण कर रहे हों, तो पिता का नाम लेते हुए कहें- ‘मैं अपने पिता, (नाम) की तृप्ति के लिए यह तिल सहित जल अर्पण करता हूं या करती हूं। तस्मै स्वधा नम:’ और फिर दूसरे पात्र में जल छोड़ें।

(5) अब इस विधि का पालन करते हुए माता, दादा, दादी आदि के लिए भी करें। मंत्र में हर पुरुष पितरों के लिए ‘तस्मै स्वधा नम:!’ और हर महिला पितर के लिए ‘तस्यै स्वधा नम:!’ कहें। जैसे पिता के लिए ‘तस्मै’, तो मात के लिए ‘तस्यै’।

(6) एक बात का हमेशा ध्यान रखें कि माह की जिस भी तिथि को आपके पितरों की मृत्यु हुई हो, उसी तिथि को उनका तर्पण करें। यदि तिथि का ज्ञान नहीं हैं तो श्राद्ध के आखिरी दिन (अमावस्या) उनके नाम पर दान या तर्पण करें। आप अपने सभी ज्ञात पितरों के लिए जलांजलि अर्पित करने के पश्चात् अपने अन्य सभी अज्ञात पितरों के लिए इसी प्रकार तर्पण करें|

(7) जो लोग नरक आदि में यातना भुगत रहे हैं और हमसे जल पाना चाहते हैं तो उन सभी की तृप्ति के लिए मैं जलांजलि अर्पण करता हूं/करती हूं, जो मेरे बंधु-बांधव हैं और जो मेरे बंधु-बांधव नहीं हैं, जो पिछले किसी जन्म के बंधु-बांधव हैं, उनकी तृप्ति के लिए भी मैं ये जलांजलि अर्पण करता हूं|

(8) देव, ऋषि, पितृ, मानव सहित ब्रह्म पर्यंत सभी की तृप्ति के लिए मैं ये जलांजलि अर्पण करता हूं/करती हूं। माता और नाना के कुल के और करोडों कुलों के सातों द्वीपों और समस्त लोकों में रहने वाले प्राणियों की तृप्ति के लिए भी मैं ये जलांजलि अर्पण करता हूं/करती हूं।

(9) जो मेरे पिछले किसी जन्म के बंधु-बांधव हैं, वे सभी मेरे द्वारा अर्पण किए इस तर्पण से पूरी तरह तृप्त हों जाए।’ इस तर्पण के पश्चात् संभव तो सबसे पहले ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद को भोजन कराएं और फिर किसी गाय को रोटी खिलाएं| तर्पण करने के बाद ही परिवार के सभी सदस्य भोजन ग्रहण करे| आप यम स्त्रोत्र और पितृ स्त्रोत्र का पाठ भी कर सकते हैं|

(10) अब आप अपने घर के पूजन स्थल पर जाएं और एक बर्तन में काले तिल और एक खाली कटोरी या कोई भी बर्तन लें। आप अपने दाएं हाथ से तिल उठाकर दूसरे प्लेट या कटोरी में डालते हुए हाथ जोड़कर कहें ‘हे पितृ देवताओं! ये जलांजलि और भोजन सामग्री ग्रहण करें और हमें आशीर्वाद प्रदान करें।’

(11) इस तरह से आपका तर्पण, घर पर ही पूर्ण हो जाता है। ऐसा करने से जहां सभी अतृप्त या मोक्ष के लिए भटक रहे आपके पितरों को मुक्ति और शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद भी आपको मिलता है। पितरों के आशीर्वाद से आपके जीवन की अनावश्यक परेशानियां, विघ्न-बाधाएं आदि दूर होती हैं| इसलिए सभी को पितृ पक्ष में तर्पण जरूर करना चाहिए|

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