आइए जानें, नवरात्रि पूजा समाप्त होने के बाद ज्वारे का क्या करें ?

नवरात्रि पूजा का समापन हो चुका हैं, ऐसे में नवरात्रि के दिनों में स्थापित कलश, कलश में जल, सिक्का और बोये हुये ज्वारे आदि सामग्री का विसर्जन कैसे करे| दरअसल नवरात्रि शुरू होने के पहले ही दिन कलश की स्थापना की जाती हैं, कलश में जल और जल के अंदर एक, पाँच या दस का सिक्का डाला जाता हैं, साथ में जौ को बोया जाता हैं, ये सभी चीजें नवरात्रि के दिनों मे शुभ मानी जाती हैं| जब नवरात्रि की पूजा नौ दिनों के बाद समाप्त हो जाती हैं तो देवी माँ के मूर्ति का विसर्जन किसी पवित्र नदी या तालाब में कर दिया जाता हैं| लेकिन जो कलश, जल, सिक्का और जौ का विसर्जन कैसे करे, इसके बारे में बताने जा रहे हैं|

ज्वारे का क्या करें, नवरात्री पूजा समापन बाद

सबसे पहले कलश के जल को ले और इसे अपने घर में छिड़क दे, इससे घर में उपस्थित नकारात्मक ऊर्जा का नाश हो जाता हैं, साथ में यदि कलश में थोड़ा बहुत जल बच गया तो इसे आप तुलसी के पेड़ में डाल दे, यदि तुलसी का पेड़ नहीं हैं तो आप इसे किसी पवित्र पेड़ बरगद या पीपल के पेड़ में डाल दे| अब कलश में डाले गए सिक्के को लीजिये और इसे अपने तिजोरी में रख दे, इससे आपके घर में पैसों की कमी नहीं होगी|

नवरात्रि के दिनों में बोये हुये ज्वारे का अपना एक अलग महत्व होता हैं क्योंकि ज्वारे सभी लोग लगाते हैं लेकिन हर किसी के ज्वारे एक जैसे नहीं होते हैं| यदि आपके घर के ज्वारे बड़े हुये हैं और नीचे सफ़ेद तथा ऊपर हरा हैं तो यह आपको शुभ संकेत देता हैं यानि की आपका आने वाला समय अच्छा रहने वाला हैं| लेकिन आपके ज्वारे छोटे और पीले होकर खत्म हो जाते हैं तो यह आपके लिए बुरा संकेत बताता हैं यानि आपका आने वाला दिन आपके लिए सही नहीं रहने वाला हैं|

जब नवरात्रि की पूजा समाप्त हो जाये तो ज्वारे के कुछ पत्ते निकाल ले और उन पत्तियों को देवी माँ के चरणों में रख दे, ऐसा करने से ये ज्वारे अभिमंत्रित हो जाते हैं| अब इस ज्वारे को उठाकर अपने तिजोरी में रख दे या फिर किसी पवित्र जगह पर रख दे| अब बाकी ज्वारे में से तीन, पाँच, सात की संख्या में निकाल ले और फिर इसे प्रसाद वाले थाली में रख ले, प्रसाद देते समय इसे भी अपने बच्चो दे और उन्हें कहें कि इसे तिजोरी में रखे या फिर अपने किताबों में रख ले| इतना करने के बाद बचे हुये ज्वारे के हरे वाले भाग को काट ले और इसका रस बना ले और प्रसाद स्वरूप इसे ग्रहण करे, परिवार को भी प्रसाद स्वरूप दे, इससे ज्वारे गलत जगह नहीं जाते हैं और उनका अपमान भी नहीं होता हैं|

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