अंतरिक्ष में घूम रहे ग्रहों का ऐसे होता है नामकरण, जानें बड़ी दिलचस्प है ये प्रक्रिया

हमारे सौर मंडल में कई छोटे-बड़े ग्रह हैं और समय-समय पर नए ग्रहों की खोज भी होती रहती हैं| जिस प्रकार बुध, बृहस्पति, पृथ्वी, मंगल, शुक्र समेत बड़े ग्रहों के नाम हैं, ठीक ऐसे ही इन छोटे ग्रहों को भी अपना एक नाम दिया जाता है और उन्हें इसी नाम से पहचाना जाता हैं| हालांकि ऐसे ही किसी ग्रह को नाम नहीं दिया जाता हैं बल्कि नए ग्रह को नाम देने की प्रक्रिया होती हैं और उसी प्रक्रिया के तहत ग्रहों को नाम दिया जाता हैं|

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि किसी ग्रह को दिए जाने वाले नाम का अंतिम निर्णय अंतरराष्ट्रीय खगोल वैज्ञानिक संघ की एक समिति द्वारा किया जाता है, आईएयू एक खगोल वैज्ञानिकों की वैश्विक संस्था है। हालांकि आईएयू भी हर नाम को अनुमति नहीं देती हैं बल्कि इसके लिए भी कुछ नियम बने हुए हैं, क्या हैं वो नियम इसकी बारे में आइए जानते हैं|

ग्रहों को नाम देने की ये हैं प्रक्रिया

(1) जब सौर मंडल में किसी छोटे ग्रह की खोज की जाती हैं तो इस मामले में उस ग्रह के खोज करने वाले व्यक्ति के पास उस ग्रह के नाम का सुझाव देने अधिकार होता हैं|

(2) जिस व्यक्ति ने सौर मंडल में किसी छोटे ग्रह की खोज की हैं, उसके पास 10 सालों तक उस ग्रह के नाम का सुझाव देने का अधिकार होता हैं|

(3) जब किसी छोटे ग्रह की खोज की जाती हैं तो उस समय उसे एक अस्थाई नाम दिया जाता हैं|

(4) अस्थाई नाम में उस ग्रह के खोज का साल, दो अल्फाबेट और दो अन्य नंबर दिए जाते हैं। जैसे कि साल 2006 में खोजे गए एक ग्रह को पहले ‘2006VP32’ नाम दिया गया था।

(5) अस्थाई नाम के बाद जब उस ग्रह के ऑर्बिट का पता चलता है तो कम से कम चार जगहों पर उसका उल्लेख किया जाता है| इसके बाद उस ग्रह को एक स्थाई नंबर दिया जाता है।

(6) इस प्रक्रिया के बाद खोजकर्ता को उस ग्रह के लिए एक नाम का सुझाव देने के लिए आमंत्रित किया जाता है।

(7) सुझाव में खोजकर्ता जो भी नाम देता हैं, उस प्रस्तावित नाम में 16 या इससे कम अक्षर होने चाहिए।

(8) इस बात का भी ध्यान दिया जाता हैं कि ग्रह को दिये जाने वाला नाम किसी के लिए अपमानजनक ना हो|

(9) इसके अलावा जो नाम पहले प्रस्तावित किए जा चुके हैं, उसे मिलता-जुलता नाम नहीं होना चाहिए|

(10) छोटे ग्रहों को पालतू जानवरों या व्यवसायिक प्रवृत्ति के नाम नहीं दिए जा सकते हैं।

(11) यदि किसी राजनेता या सैनिक के नाम पर किसी ग्रह का नाम रखा जाना हैं तो उस राजनेता और सैनिक के मृत्यु के 100 साल बाद ही उसके नाम को प्रस्तावित किए जा सकता हैं।

(12) इतना ही नहीं ग्रह किस जगह स्थित है, इस बात पर भी उस ग्रह के नाम का भी चुनाव निर्भर करता है।

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