सिर्फ हिंदी सिनेमा नहीं रहा भारतीय मनोरंजन जगत का एकमात्र चेहरा

– क्षेत्रीय भाषी फिल्मों को घर घर तक पंहुचा रहे B4U कड़क जैसे चैनल्स

– इंटरनेशनल मार्केट में बॉलीवुड से अधिक डिमांड में साउथ सिनेमा

– डब फिल्मों की संख्या में हुई तगड़ी बढ़ोतरी

यूं तो बॉलीवुड फिल्मों का क्रेज आने वाले कई सालों में भी कम होता नहीं दिख रहा है, लेकिन मौजूदा दौर में साउथ सिनेमा ने भी जिस कदर लोगों के दिल में अपनी जगह बनाई है, वह भी किसी से छिपा नहीं है. इन दिनों बॉलीवुड में भी दक्षिण भारतीय फिल्मों की रोचक कहानियों को रिक्रिएट करने का चलन आम हो चला है. ऐसे में हिंदी भाषी दर्शकों के लिए असल किरदारों और मूल कहानी के प्रति अधिक जुड़ाव महसूस होता है. फिर टी-सीरीज जैसे दिग्गज प्रोडक्शन हाउस, बाहुबली फेम प्रभास के साथ साहो जैसी बिग बजट फिल्में बनाने के लिए उत्साही दिखाई देते हैं, तो साउथ सुपरस्टार्स के प्रति प्रोडक्शन हाउसेस की बदलती धारणा को समझना भी आसान हो जाता है. वहीँ राजस्व के मामले में भी साउथ सिनेमा का योगदान, पिछले कुछ सालों में काफी हद तक बढ़ा है और B4U कड़क जैसे चैनल्स, इन क्षेत्रीय फिल्मों को घर घर तक पहुंचाने में अहम योगदान दे रहे हैं. जो ख़ास तौर पर साउथ की डब फिल्में दिखाने के लिए जाने जाते हैं.

साल 2017 में नॉन-हिंदी सिनेमा ने सिनेपॉलिस के कुल राजस्व में 22% का योगदान दिया था. जो कि 2005 में महज 5 फीसदी हुआ करता था. फिक्की-ईवाई मीडिया एंड एंटरटेनमेंट की पिछले साल आई रिपोर्ट के अनुसार ऑनलाइन टिकटिंग प्लेटफॉर्म BookMyShow ने 2017 में क्षेत्रीय भाषा की फिल्मों के लिए औसतन 45-46% की वृद्धि दर्ज की, जबकि 2016 में यह लगभग 39-40% थी। उदाहरण के तौर पर देखें तो बाहुबली 2: द कन्क्लूजन, महानति और मर्सल जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों की बदौलत तेलुगु और तमिल फिल्मों ने संयुक्त राज्य अमेरिका और मलेशिया में भारतीय सिनेमा के चेहरे के रूप में बॉलीवुड को पछाड़ दिया है। इसके आलावा संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया, नीदरलैंड, सिंगापुर और यहां तक कि दक्षिण अमेरिका के फ़िल्मी बाजारों में भी तेलगु, तमिल जैसी क्षेत्रीय भाषाओं की तगड़ी पकड़ देखने को मिलती है।

कुछ अन्य तथ्यों पर गौर करें तो इसे एक ऐसी रणनीति के तहत देखा जा सकता है जिसे बॉलीवुड बॉक्स ऑफिस पर कमाई के लिए तेजी से ऊपर उठा रहा है। संजय लीला भंसाली की अवधि गाथा पद्मावत, कई अन्य हालिया फिल्मों की तरह, हिंदी के अलावा तमिल और तेलुगु में भी रिलीज़ की गई। फिक्की-ईवाई की रिपोर्ट के अनुसार, 2016 में जहां हिंदी डब्ड फिल्मों की संख्या 31 थी, वहीं 2017 में यह बढ़कर 96 के पार पहुंच गईं। टीवी पर भी दर्शक बॉलीवुड से अधिक साउथ सिनेमा के प्रति अपना क्रेज दिखा रहे हैं. फिल्म बाहुबली 2 ने टीवी दर्शकों के लिए एक सर्वकालिक रिकॉर्ड स्थापित किया था, जिसने आमिर खान की दंगल को भी पीछे छोड़ दिया. इससे भी बड़ा आश्चर्य अल्लू अर्जुन की एक्शन-कॉमेडी दुवदा जगन्नाधम रही जिसने कई हिंदी फिल्मों जैसे ट्यूबलाइट, काबिल और रईस को हराया।

इंडस्ट्री के जानकार बताते हैं कि पिछले दो वर्षों में हिंदी चैनलों पर डब की गई दक्षिण भारतीय फिल्मों की संख्या और सैटेलाइट की कीमतें सात से आठ गुना तक बढ़ गई हैं।  क्योंकि B4U कड़क जैसे चैनल्स पर दिखाई जाने वाली इन डब फिल्मों को समझ पाना आसान होता है और लोग पूरी फिल्म देखना पसंद करते हैं।

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