दिवाली से पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐसा क्या किया कि सेंसेक्स उछल गया ?

जीएसटी काउंसिल की बैठक होने के पहले वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दिल्ली में मीडिया को संबोधित किया, इस सम्बोधन में उन्होने कंपनियों के शिकायतों और सुस्त पड़ी अर्थव्यस्था को ध्यान में रखते हुये कई बड़े ऐलान किए| इस ऐलान में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कॉरपोरेट टैक्स को लेकर एक बहुत पड़ा ऐलान किया हैं, ऐसे में आइए जानते हैं कि उन्होने कॉरपोरेट टैक्स से जुड़े कौन से बड़े ऐलान किए हैं|

बता दें कि वित्त मंत्री ने कंपनियों के लिये आयकर की दर लगभग 10 प्रतिशत घटाकर 25.17 प्रतिशत तथा नयी विनिर्माण कंपनियों के लिये कॉरपोरेट टैक्स की प्रभावी दर घटाकर 17.01 प्रतिशत करने का ऐलान किया हैं| दरअसल सरकार ने यह कदम ऐसे समय उठाया हैं जब चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर छह साल के निचले स्तर 5 प्रतिशत पर आ गयी है। इन घोषणाओं से निवेश को प्रोत्साहन मिलने तथा रोजगार सृजन को गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।

वित्त मंत्री ने कहा कि इन बदलाओं को आयकर अधिनियम के लिये एक अध्यादेश के जरिये अमल में लाया जाएगा। इतना ही नहीं उन्होने मीडिया से कहा कि ‘आर्थिक वृद्धि तथा निवेश को बढ़ावा देने के लिये आयकर अधिनियम में एक नया प्रावधान किया गया है, जो वित्त वर्ष 2019-20 से प्रभावी होगा। इससे किसी भी घरेलू कंपनियों को 22 प्रतिशत की दर से आयकर भुगतान करने का भी विकल्प मिलेगा। लेकिन उन्हें किसी प्रोत्साहन का लाभ नहीं मिलेगा|’

यदि अधिशेष और उपकर को मिला दिया जाये तो इसका प्रभावी दर 25.17 प्रतिशत होगा| दरअसल 30 प्रतिशत कंपनी कर की दर पर कॉरपोरेट टैक्स की मौजूदा प्रभावी दर 34.94 प्रतिशत है। वित्त मंत्री ने कहा कि ‘विनिर्माण के क्षेत्र में नया निवेश आकर्षित करने तथा ‘मेक इन इंडिया’ को बढ़ावा देने के लिये आयकर अधिनियम में नये प्रावधान किये जा रहे हैं| अब एक अक्टूबर 2019 या फिर इसके बाद से गठित किसी भी कंपनी को विनिर्माण में निवेश करने तथा 31 मार्च 2023 से पहले परिचालन शुरू करने पर 15 प्रतिशत की दर से आयकर भरने का भी विकल्प मिलेगा और इन कंपनियों के लिये प्रभावी दर 17.01 प्रतिशत तक होगा|’

बता दें कि अभी इन कंपनियों के लिये 25 प्रतिशत की टैक्स पर प्रभावी दर 29.12 प्रतिशत है और इसके साथ ही इन कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स का भुगतान भी नहीं करना होगा। वित्त मंत्री ने कहा कि यदि कोई भी कंपनी कम की गयी दरों पर भुगतान करने का विकल्प नहीं चुनती है लेकिन कर छूट एवं प्रोत्साहन का लाभ उठाती है तो वो कंपनी पुरानी दरों पर भुगतान करना जारी रखेंगी। इसके आगे उन्होंने कहा कि ‘ये कंपनियां छूट व प्रोत्साहन की अवधि समाप्त होने के बाद संशोधित दरों का विकल्प भी चुन सकती हैं।’

जो कंपनी छूट व प्रोत्साहन का लाभ जारी रखने का विकल्प चुनती है तो उन्हें राहत पहुंचाने के लिए न्यूनतम वैकल्पिक टैक्स की दर 18.5 प्रतिशत से घटकरा 15 प्रतिशत किया गया हैं| इतना ही नहीं वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने 5 जुलाई को अपने पहले बजट आय पर अधिक अधिभार के रूप में घोषित उच्च दर को भी खत्म करने की भी घोषणा की| इसके अलावा सीतारमण ने कहा कि जो कंपनियाँ सूचीबद्ध हैं उन्हें 5 जुलाई से पहले शेयर की दोबारा खरीद की घोषणा की हैं, उन्हें भी अब किसी प्रकार का टैक्स नहीं देना होगा| दरों में कमी और अन्य की गयी घोषणाओं से राजस्व में सालाना 1.45 करोड़ रुपये की कमी का अनुमान लगाया गया हैं|

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