अनूठी मिसाल: जिस बैंक में चपरासी बनकर किया था काम, आज बन गए उसी के प्रमुख

अक्सर फिल्मों में हमने देखा हैं कि कोई अति साधारण व्यक्ति कैसे अपनी मेहनत के बलबूते समाज में एक उच्च पद हासिल कर लेता हैं पर क्या केवल ऐसा फिल्मों में ही होता हैं? जी नहीं कभी-कभी असल जिंदगी में भी ऐसा हो जाता हैं आज हम आपको एक ऐसे व्यक्ति के बारें में बताने जा रहें हैं जो पहले तो एक बैंक के चपरासी थे लेकिन अपनी मेहनत के बलबूते वो उसी बैंक के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख बन गए। उनका नाम हैं डॉ राजू एल भाटिया, इनके जीवन की संघर्ष की कहानी भी हर किसी को प्रोत्साहित करने के लिए काफी हैं खासकर उन लोगों के लिए जो केवल अपनी किस्मत के बूते ही बैठे रहते हैं।

डॉ राजू एल भाटिया के संघर्ष की शुरूआत

मुख्य रूप से महाराष्ट्र के मुंबई से नाता रखने वाले राजू भाटिया का जन्म मुंबई में ही एक अति-निर्धन परिवार में हुआ था, इनके पिता जीविकोपार्जन के लिए हर घर जाकर सामान बेचा करते थें। पर उनकी कमाई परिवार के लिए काफी नहीं रहती थीं और कई बार तो उनका परिवार दिन में दो रोटी के लिए भी तरस जाता था। घर की गरीबी के कारण उन्हें स्कूली शिक्षा प्राप्त करने में बहुत ज्यादा मशक्कत करनी पड़ी, पर उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और किसी ना किसी तरह से उन्होंने अपनी प्राथमिक शिक्षा सरकारी स्कूल से पूरी की।

महज 15 वर्ष की आयु में ही उन्हें अपने परिवार की जीविका चलाने के लिए एक बैंक में बतौर चपरासी कार्य करना पड़ा।

कैसे तय किया चपरासी से एक विभाग प्रमुख बनने का सफर

भले ही उन्होंने बैंक में चपरासी का कार्य करना शुरू कर दिया था लेकिन उनके अंदर आगे पड़ने की ज्वाला कभी शांत नहीं हुई और उन्होंने अपनी पढ़ाई लगातार जारी रखी। बैंक की ड्यूटी शुरू होने से पहले सुबह तीन घंटे तक कॉलेज में पढ़ाई करते थे और बैंक की ड्यूटी खत्म होने के बाद वो बच्चों को पढ़ाने का कार्य करते थे जिससे कि इनकी पढ़ाई का पुनरावृत्ति हो सकें।

उन्होंने स्नातक की पढ़ाई बॉम्बे विश्वविद्यालय में वाणिज्य धारा में करी जिनमें उन्हें प्रथम स्थान प्राप्त हुआ था इसके बाद उन्होंने एमबीए की पढ़ाई के लिए भारत के प्रतिष्ठित कॉलेज आईआईएम (IIM) में दाखिला लिया। उनके ज्यादा प्रतिभावान होने की वजह से उन्हें छात्रवृत्ति मिली और उन्होंने एक प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय से मानव संसाधन में पीएचडी करी। पीएचडी करने के बाद 1988 में ही उन्होंने टाटा निर्यात में अपने बेहतरीन कैरियर की शुरुआत की।

कभी नहीं देखा पीछे मुड़ कर

टाटा कंपनी में नौकरी की शुरुआत के बाद उन्होंने टाटा की सभी कंपनियों में अपनी सेवा देनी शुरू कर दी और उन्होंने मानव संसाधन विकास विभाग बनाने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उसके बाद उन्होंने ऐसा कार्य किया जिसके बाद वो अन्य लोगों के लिए एक प्रेरणा स्त्रोत बन गए, जिस बैंक में उन्होंने चपरासी के रूप में कार्य करना शुरू किया था उसी बैंक में उन्होंने बतौर मानव संसाधन विकास विभाग के मुख्य के रूप में पद ग्रहण किया।

इसके अलावा उन्होंने वर्ष 1998 में एचआर (HR) कंसल्टेंसी की स्थापना की और अपनी कंपनी की स्थापना से पहले ही वो दो अन्य कंपनी अर्नस्ट और यंग एवं मैकेंजी को अपनी सेवा प्रदान कर चुके थें। वर्तमान में डॉ राजू एल भाटिया एक मुख्य कंपनी के सलाहकार होने के साथ-साथ एक मशहूर लेखक हैं जिन्होंने अभी तक कई बहुचर्चित किताबें लिखी हैं, साथ ही उन्होंने सेंटर फॉर चेंज मैनेजमेंट की स्थापना करी थी और फिलहाल उसके संस्थापक के रूप में पदासीन हैं।

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