आइए मिलते हैं देश की 10 मजबूत इरादों वाली महिला IAS ऑफिसर से जिनके लिए नामुमकिन कुछ भी नहीं

भारत का हर नागरिक आईएएस बनने का सपना देखता है लेकिन ये सपना स्वीकार कुछ ही लोगो के हो पाते है। भारत जहाँ पुरुषो को ज्यादा जिमेदारियां दी जाती थी, वहीँ बदलते वक्त के साथ आज देश में महिलाए भी किसी मामले में पुरुषों से कम नहीं है। आज हम आपको ऐसी ही महिलाओ के बारे में बताएगें। जिन्होंने अपनी कड़ी मेहनत से सफलता हासिल की और साथ ही देश का नाम भी गर्वान्वित किया।

हम बात कर रहे है 10 ऐसी महिला आईएएस अधिकारियों की जिन्होनें हमारे देश में समाज की सोच को बदल कर रख दिया। आईएएस तो सभी बनना चाहते है लेकिन आईएएस अधिकारी के पद की जिम्मेदारी बहुत ही चुनौतीपूर्ण और बहुत ही कठिन होती है, इसके लिए काम की दिशा में योगदान और क्षमता की आवश्यकता होती है। अपनी मेहनत, लगन और ईमानदारी से इन महिला अधिकारियों ने समाज को बदलने का बीड़ा उठाया है, तो आइए आपको बताते हैं महिला अधिकारियों  के बारे में :-

1. किंजल सिंह (2008 बैच की आईएएस, डीएम लखीमपुर) :

किंजल सिंह जो 2008 बैच की आईएएस अधिकारी है। उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बना रखी है, जो काफी तेज-तर्रार अफसर है। इनके काम करने के अलग अंदाज से जिले के सारे अपराधीय इनके नाम से ही कापने लगते हैं। किंजल सिंह थारु जनजाति की लड़कियों को मेन स्ट्रीम में लाने के लिए विशेष प्रोजेक्ट चला रही हैं, जिसमे लड़कियों को लो कॉस्ट बिल्डिंग मटेरियल, पेपर बनाने के अलावा अपने स्वास्थ्य पर कैसे ध्यान दे यह भी सिखाया जा रहा है। किंजल जब 6 महीने की थीं तभी उनके पिता की एनकाउंटर में हत्या कर दी गई थी। उन्होंने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर ये मुकाम पाया है।

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2. बी. चंद्रकला (2008 बैच की आईएएस, डीएम बुलंदशहर) :

बी. चन्द्रकला उत्तर प्रदेश कैडर की जो 2008 बैच की आईएएस अधिकारी हैं। चन्द्रकला ने सिविल सेवा परीक्षा मे 409वीं रैंक हासिल की और फिलहाल में बुलंदशहर व उत्तर प्रदेश की जिला मजिस्ट्रेट है। बी. चंद्रकला का जन्म 27 सितम्बर 1979 में हुआ था जो एक जनजाति परिवार से बिलोंग करती है। चन्द्रकला को सोशल मीडिया पर नगरपालिका में करप्शन उजागर करने के बाद एक वायरल हुए वीडियो से काफी पहचान मिली। बी. चन्द्रकला को उनकी ईमानदारी, मेहनत और लगन के लिए जाना जाता है। डीएम चन्द्रकला बहुत सुलभ छवि की है जिससे आम जनता में बहुत लोकप्रिय हैं।

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3. सौम्या अग्रवाल (2008 बैच की आईएएस, डीएम उन्नाव) :

आईएएस अधिकारी सौम्या अग्रवाल को बहुत लोग जानते हैं जिन्होंने ‘ई-अनुश्रवण’  नाम से एक प्रोजेक्ट शुरू करके सरकार द्वारा चलाए गए अलग-अलग विभाग में जो योजनाए चल रही है जिससे उनकी मॉनिटरिंग हो सके। ऐसे में जो काम धीमी गति से होता था, उसे ओर तेजी से किया जा सकेगा। अभी ई-अनुश्रवण प्रोजेक्ट उन्नाव में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर चल रहा है।

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4. रौशन जैकब (2004 बैच की आईएएस) :

रोशन जैकब जो केरल से है। इनका जन्म 25 दिसंबर 1978 में हुआ था। रोशन ने 2004 में यूपीएससी की परीक्षा पास की थी। इन्होंने कानपुर में महिला सशक्तिकरण के लिए ‘शक्ति दिवस” की शुरुआत की जिसमें दहेज से उत्पीड़त महिलाए, घरेलू हिंसा से, यौन संबंधो से उत्पीड़त आदि घटनाओं को सुनवाई में रखा। इस योजना की सफलता को देखते हुए सरकार ने भी इसे पूरे प्रदेश में लागू किया।

5. शुभ्रा सक्सेना (2009 बैच की आईएएस, डीएम शाहजहांपुर) :

शुभ्रा सक्सेना हम सभी के लिए एक मिसाल हैं। शुभ्रा सक्सेना सिविल सर्विसेज के लिए जमकर की तैयारी की और 2008 में शुभ्रा का परीक्षा परिणाम पूरे देश में टॉप पर रहा। उन्होंने असंगठित क्षेत्र के मजदूरों को सरकारी योजना का लाभ देने के लिए एक सॉफ्टवेयर तैयार किया जिसमें मजदूरों का रजिस्ट्रेशन करा कर और उनके मोबाइल नंबर लेकर उन्हें योजनाओं से संबंधित एसएमएस भेजा जाएगा।

6. कामिनी रतन चौहान, (उम्र- 43 साल) :

कामिनी रतन चौहान जो 1997 बैच की आईएएस ऑफिसर हैं। इन्होंने डीएम बुलंदशहर रहते हुए मतदाताओं को जागरू करने के लिए सबसे बडी रंगोली बनवा कर काफी फ़ेमस हुई जिसके लिए इन्हें पूर्व उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने ‘निर्वाचन आयोग बेस्ट इलेक्ट्रल प्रेक्टिसेज अवार्ड’ से सम्मानित किया। कामिनी रतन के गरीब और अनाथ बच्चों की अच्छे स्कूलों में शिक्षा दिलाने के प्रयासों की भी काफी तारीफ हुई।

7. नीलम अहिलावत (2000 बैच की आईएएस, डीएम चित्रकूट) :

नीलम अहिलावत जो 2000 बैच की आईएएस‌ ऑफिसर है। इन्होंने ‘कुपोषण पुनर्वास केंद्र’ के माध्यम से कुपोषण को दूर करने में सफलता हासिल की और कस्तूरबा गांधी विद्यालय में बालिकाओं के लिए सोलर लैंप की भी व्यवस्था करावाई है। इन कामो के द्वारा इन्हें एक अलग पहचान मिली है।

8. दुर्गा शक्ति नागपाल (2009 बैच की आईएएस) :

दुर्गा शक्ति नागपाल जो 2009 बैच की आईएएस‌ ऑफिसर हैं । इनका जन्म 25 जून 1985 को हुआ था। इन्होंने नोएडा में उप-जिलाधिकारी रहते हुए बालू खनन माफिया के खिलाफ अभियान चलाया था। अपने कार्यकाल के दौरान दुर्गा शक्ति नागपाल ने नोएडा में 1.36 करोड़ रुपए की राजस्व वसूली की और एफआईआर दर्ज की जिसे लेकर प्रदेश में काफी चर्चा में भी   रहीं।

9. डॉ. काजल (2008 बैच की आईएएस) :

डॉ. काजल जो 2008 बैच की आईएएस ऑफिसर हैं। ये भी तेज-तर्रार अधिकारी हैं। इन्होंने ‘मीनोपॉज हाइजीन मैनेजमेंट’ को लेकर रिसर्च की है जिसके बाद निकले परिणाम के आधार पर हाइजीन को लेकर जिला पंचायतीराज विभाग महोबा के तहत कुटीर उद्योग के जरिए कम दर पर सैनेटरी नैपकीन उपलब्ध कराने में सफलता हासिल की है।

10. कंचन वर्मा (2005 बैच की आईएएस) :

कंचन वर्मा जो 2005 बैच की आईएएस ऑफिसर हैं जिन्हें 20 अगस्त 2016 को कॉमनवेल्थ असोसिएशन ऐंड मैनेजमेंट इंटरनैशनल इनोवेशंस अवॉर्ड से पुरस्कृत किया जा चुका है। इन्होंने 2012 में फतेहपुर में डीएम रहते हुए सूख चुकी 46 किलोमीटर लंबी  ठीठौरा झील और ससुर खदेरी नदी को पुनर्जीवित किया है। इन्होंने 38 किलोमीटर तक खुदाई करवाई जिससे झील अपने पुराने स्वरुप में आ गया और नदी 12 से लेकर 45 मीटर की चौड़ाई में बहनी भी शुरू हो गई। आईएएस अधिकारी कंचन प्रशासनिक क्षेत्र में बेहतर कार्य के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सम्मानित भी हो चुकी है।

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