बैठे-बैठे आपको भी है पैर हिलाने की आदत, तो आपके शरीर में इस चीज की कमी

आप ने कभी ध्यान दिया होगा तो आपको पता होगा कि आप भी रह रह कर अपने पैरो को अनजाने में ही हिलाना शुरू कर देते है। पैर हिलाना कई लोगो की आदत भी बन जानती है, वो कभी भी बैठे रहने के दौरान या लेटने के दौरान सिर्फ अपने पैर को हिलते ही रहते हैं। लेकिन आपने क्‍या कभी यह सोचा है कि ऐसा आखिर क्यों होता है? क्या यह किसी तरह की कोई बीमारी है? शायद आपने इस विषय पर कभी न सोचा हो लेकिन आज हम आपको इसी के बारे में बताने वाले है कि आखिर इसके पीछे का कारण क्या है और ऐसा क्यों होता है?

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अक्सर पैर को हिलाते देख हमारे घर के बड़े सदस्य इसके लिए तुरंत टोका करते हैं। उनके अनुसार ऐसा इसलिए नहीं किया जाता क्योकि ज्‍योतिष के अनुसार पैर हिलाने से शनि की कुदृष्टि आप पर पड़ती हैं। वहीँ इस विषय पर वैज्ञानिको का मानना है कि बैठे या लेटे हुए पैर हिलाते रहना एक तरह का सिंड्रोम है। यदि आप कुर्सी पर बैठे-बैठे पैर हिलाते रहने के आदि हो गये है तो यह आपकी कोई नॉर्मल प्रॉब्‍लम नहीं है बल्कि यह एक तरह का सिंड्रोम है। पैर हिलाते रहने की इस क्रिया को वैज्ञानिक भाषा में रेस्टलेस लेग सिंड्रोम कहा जाता है। डॉक्‍टर्स की माने तो यह एक न्यूरोलॉजिकल समस्या है। इस प्रॉब्लम के लक्षण ही कुर्सी या फिर सोफे पर बैठ कर पैरों को लगातार हिलाते रहना है।

कई बार ऐसा देखा गया है कि जब कोई व्‍यक्ति मानसिक रूप से काफी परेशान होता है तो वह अपने पैर को हिलाने लगते है। ऐसा करने से उन्हें रात को चैन नींद नहीं आ पाती और कई बार पैरो में बहुत ज्‍यादा दर्द भी होने लगता है। यदि आपको पैर हिलाने के बाद दर्द नहीं होता है तो इसका मतलब यह नही की आप इस समस्या से नहीं जूझ रहे है। आपको हम बता दे इस प्रॉब्‍लम के चलते आपको ईलाज की जरूरत भी पड़ सकती है। जिसका समय पर होना आवश्यक है। वक्‍त रहते इस प्रॉब्‍लम का सॉल्‍यूशन ना किया जाए तो आगे चलकर आपको न्‍यूरोलॉजिस्ट या फिर साइकोलॉजिस्‍ट से ट्रीटमेंट लेने की जरूरत पड़ सकती है। रेस्टलेस लेग सिंड्रोम आपको तरह परेशान कर सकता है, ये कैसे आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है, दरअसल ये बीमारी उन लोगों में होती है जो पूरी नींद नहीं ले पाते हैं। या फिर बहुत थके हुए होते हैं।

पैर हिलाने की आदत दरअसल शरीर में पोषक तत्‍वों की कमी की वजह से भी हो सकती है। शरीर में आयरन, मैग्नीशियम और विटामिन बी12 जैसे न्‍यूट्रीशनल फैक्‍टर्स जब कम होने लगते हैं तो व्‍यक्ति के अंदर परेशान करने वाले हार्मोन तेजी से पैदा होने लगते हैं, जो दिमागी रूप से उसे रेस्‍टलेस फील कराते हैं। इसी के चलते हम बैठे-बैठे अपने पैर हिलाने लगते हैं। कई बार ऐसा भी होता है कि डिप्रेशन या एलर्जी की दवाई लगातार खाने के कारण रेस्टलेस लेग सिंड्रोम की समस्या उत्पन्न हो जाती है, यह आदत हर व्‍यक्ति में मानसिक रोग का कारण हो ये जरूरी नहीं।
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