Friday, December 15

अपने पति को निर्वस्त्र देखते ही क्यों छोड़कर चली गयी उर्वशी?

हमारे हिन्दू धर्म के कई सारी पौराणिक कथाएं प्रचलित है जो हमारे धर्म ग्रंथों में सुनहरे अक्षरों में लिखी है।  हिन्दू धर्म में कई मान्यताएं और कथाएं हैं जिनसे जीवन की सच्चाई का सार पता चलता है।  इन्ही कथाओ में से एक कथा है स्वर्ग की सबसे सुंदर अप्सरा उर्वशी और धरती के चंद्रवंशी राजा पुरुरवा के प्यार की | यह कथा एक मानव और स्वर्ग की अप्सरा के बीच हुए प्यार की दास्तां बयां करता है| सदियों सच्चे प्यार को लेकर कई सारी कहानियां चर्चित हुई है और प्यार की दास्तां न केवल आज के समय में बल्कि पौराणिक समय में भी देखने को मिलती है |आज हम आपको इसी पौराणिक  कथा को बताने जा रहे है जो की  एक सच्चे प्यार की अत्यंद ही दुख भरी कहानी है।

धर्म ग्रंथो के अनुसार  ऐसी मान्यता है की बुद्ध और ईला के पुत्र  पुरुरवा एक चंद्रवंशी राजा थे और वो अत्यंत पराक्रमी भी थे | कई बार असुरो के खिलाफ युद्ध के दौरान खुद इन्द्रदेव ने पुरुरवा से मदद मांगी थी |

उर्वशी जो की इंद्र देव की सबसे प्रिय अप्सरा थी वो स्वर्ग में रहते रहते स्वर्ग की जिंदगी से उब गयी थी तो उसने फैला किया की वो कुछ दिन धरती लोक पर बिताना चाहती है और जब वो धरती लोक पर आई तो उसे पृथ्वी लोक की जिंदगी स्वर्ग से भी अच्छी लगने लगी लेकिन उर्वशी को स्वर्ग तो लौटना ही था इसीलिए जब वो अन्य अप्सराओ के साथ स्वर्ग लौट रही थी

तभी एक राक्षस के द्वारा उनका अपहरण हो गया और तब राजा पुरुरवा ने उर्वशी को उस राक्षस के चंगुल से आजाद करवाए और इसी दौरान राजा पुरुरवा और उर्वशी का एक दुसरे से स्पर्श हो गया और ऐसा पहली बार हुआ था की किसी मानव द्वारा किसी अप्सरा का स्पर्श होना | इसके बाद राजा उर्वशी की तरफ मोहित हो गये और धीरे धीरे उर्वशी भी उन्हें चाहने लगी और दोनों के बीच प्यार हो गया वक्त की साथ ये प्यार परवान चढ़ता गया और दोनों ने अपने प्यार का इजहार करते हुए साथ जिंदगी बिताने का फैसला कर लिए|

उर्वशी पुरुरवा के साथ पूरी जिंदगी रहने के लिए तैयार हो गई लेकिन उसने पुरुरवा के सामने कुछ शर्ते रखीं|

उर्वशी ने पहली शर्त रखी कि पुरुरवा को उसकी दो बकरियों की हमेशा सुरक्षा करनी होगी.

दूसरी शर्त थी की वो हमेशा घी का ही सेवन करेगी.

उर्वशी ने पुरुरवा के सामने तीसरी शर्त रखी कि वह शारीरिक संबंध बनाने के अलावा कभी एक-दूसरे को निर्वस्त्र नहीं देखेंगे.

पुरुरवा ने उर्वशी की सारी शर्तें मानकर  साथ रहना शुरू कर दिया| यह सब देखकर स्वर्गलोक में देवताओं को ईर्ष्या हो रही थी. उर्वशी और पुरुरवा के बीच का यह प्रेम उनसे बर्दाश्त नहीं हो रहा था देवताओ ने उन्हें अलग करने के लिए एक योजना बनाई|

 

एक रात गांधर्वों ने उर्वशी की बकरियों को चुरा लिया. जब बकरियों की आवाज उर्वशी ने सुनी तो उसने राजा पुरुरवा से उन्हें बचाने के लिए कहा उस दौरान पुरुरवा निर्वस्त्र थे और  बकरियों को बचाने की जल्दी में वह निर्वस्त्र ही बाहर निकल गए |इसी समय देवताओं ने स्वर्ग से बिजली चमका दी और उजाला कर दिया| इस उजाले में उर्वशी और पुरुरवा ने एक-दूसरे को निर्वस्त्र देख लिया |

तीसरी शर्त टूटते ही उर्वशी को स्वर्ग जाना पड़ा | हालांकि उर्वशी पुरुरवा से हुए बच्चे को अपने साथ ले गई और बाद में ऐसे कई घटनाएँ हुई जिसकी वजह से उर्वशी को कई बार धरती पर आना पड़ा और  इस दौरान पुरुरवा और उर्वशी के कई बच्चे हुए|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

%d bloggers like this: