Tuesday, January 16

नाथूराम गोडसे का ये अंतिम बयान आपको सिर से पाँव तक हिला के रख देगा, मैंने गांधी को क्यों मारा?

महात्मा गांधी जो की हमारे देश के राष्ट्रपिता कहे जाते हैं  इनकी  मौत 30 जनवरी 1948  को हुई थी लेकिन जैसा की हम सभी जानते हैं की उनकी ये मौत प्राकृतिक नहीं  हुई थी बल्कि उनकी हत्या की गयी थी और जिस शख्स ने बापू की  हत्या की थी उसका नाम था नाथूराम गोड़से| नाथूराम गोडसे का जन्म 19 मई साल 1910 को पुणे के चित्पावन ब्राह्मण परिवार में हुआ था। गोडसे के पिता विनायक वामनराव गोडसे पोस्ट ऑफिस में काम करते थे और माँ का नाम लक्ष्मी था। ये कहना गलत नहीं होगा की नाथूराम एक बड़े देश भक्त थे और ये बात उनके इस बयांन  से साबित हो जाती है जो उन्होंने गाँधी जी की हत्या करने के बाद दिया था |

नाथूराम गोडसे जो की एक हिंदूवादी कार्यकर्ता और पत्रकार था और यही नहीं नाथूराम की एक खासियत ये भी थी की वह हिंदूवादी तो  ज़रूर था लेकिन वह हिन्दू धर्म में मौजूद बुराइयों जैसे जाति के आधार पर भेदभाव और छुआछूत आदि  का कट्टर विरोधी था और जैसा की हम जानते हैं की गांधी जी  की हत्या करने के बाद नाथूराम मौके से भागे नहीं थे।

बल्कि उसने खुद आत्मसमर्पण किया था और गांधी जी  की हत्या करने के मामले में नाथूराम सहित कुल 17 लोगो पर अदालत में मुकदमा चलाया गया था और करवाई के दौरान नाथूराम ने अदालत के सामने अपना पक्ष रखते हुए अपना जो अंतिम बयान दिया था वो सच में बहुत खास था और इसीलिए  उस दिन नाथूराम के बयान को सुनने के बाद अदालत में मौजूद सभी लोगों की आँखें नम हो गई थी आज हम आपको बतायेंगे की उस दिन नाथूराम गोड़से ने अपने बयां में क्या कहा था |

नाथूराम ने अपने बयान में कहा था कि –

नाथूराम के कहा था की  मैं ये नहीं मानता कि किसी आक्रामक शक्ति का विरोध करना गलत या अन्यायपूर्ण हैं लेकिन कर्तव्य, सम्मान और देश से प्यार कभी कबार हमें अहिंसा के रास्ते से हटने पर मजबूर कर देता हैं और मेरे हिसाब से शत्रु का प्रतिरोध करना या बल के प्रयोग से उसे काबू में लाना एक धार्मिक और नैतिक कर्तव्य है। उसका कहना था की यहाँ  मर्जी चला रहे थे और इसीलिए  कांग्रेस या तो उनकी इच्छाओं के आगे आत्मसमर्पण कर दे या फिर उन्ही की मनमानी चलने दे।

15 अगस्त 1947 के बाद इस देश की धरती के एक तिहाई हिस्से को हम विदेश भूमि कहने को मजबूर हो गए। गांधी  जी के कहने पर ही  कांग्रेस के बड़े बड़े नेताओं ने भारत  देश के टुकड़े कर डाले जिसे हम भारत माँ कह कर पूजा  किया  करते थे और मई ये सब नहीं देख पा रहा था और यह देख मेरा अंग अंग भयंकर गुस्से से भर उठा और इसीलिए मैंने गाँधी जो के मार दिया और इस बात का मुझे कोई दुःख नहीं है और  मैं साहस के साथ ये बात  कहता हूँ कि गांधी जी  अपने कामों  में असफल रहे और उन्होंने  ये बात साबित कर दिया कि वे  भारत के नहीं बल्कि पाकिस्तान के राष्ट्रपिता हैं|क्योंकि उन्होंने हमेशा मुश्लिमों का साथ दिया था |

आगे नाथूराम गोडसे कहता है की मेरी गोली उस व्यक्ति पर चली हैं जिसकी नीतियों के चलते करोड़ो हिन्दुओं की मौत हुई है और उन्हें  विनाश और बर्बादी ही मिली हैं और उस वक्त  ऐसी कोई भी कानूनी प्रक्रिया  भी नहीं थी जिसके चलते  मई  उस अपराधी को सजा दिलवा सकता जिसने इतने लोगों की जन ली है इसीलिए अंत में मेरे लिए यही एक का रास्ता ही शेष बचा था और इसीलिए मैं खुद के लिए कभी भी  माफ़ी नहीं मांगूंगा क्योंकि मैंने जो कुछ भी किया उस पर मुझे गर्व हैं क्योंकि मैंने कुछ गलत नहीं किया बल्कि एक अपराधी को मैंने सजा दी है और मुझे पूरा यकीन हैं कि आने वाले समय में लोग मेरे द्वारा किए गए कृत्य सही मानेगे बस मई  चाहता हूँ कि जब तक सिन्धु नदी भारतीय तिरंगे के नीचे से  ना  बहे  तब तक मेरी अस्थियों का विसर्जन बिलकुल  ना किया जाए.|

मैं ये स्वीकार करता हूँ कि गांधी जी एक बड़े देशभक्त थे. उन्होंने बिना किसी स्वार्थ के देश की सेवा की. मैं उनकी इस  निस्वार्थ देश भक्ति  के लिए उनका बहुत आदर करता हूँ  लेकिन मैं ये नहीं देख सकता था की कोई देशभक्त देश के टुकड़े करता और सम्प्रदाय के नाम पर पक्षपात करना ये मै नहीं देख सकता हूँ और इसी वजह से मेरे पास  कि गांधी जी की हत्या के सिवा  कोई  भी दूसरा विकल्प नहीं था|

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