जानें, आखिर फ़िल्म सर्टिफिकेट पर लिखे इन अक्षरों का क्या होता है मतलब

भारतीय फिल्म इंडस्ट्री को सबसे बड़ी इंडस्ट्री के रूप में जाना जाता है। यह प्रती वर्ष 1250 फीचर फिल्में और भारी संख्या में लघु फिल्में बनती हैं। सबसे पहले तो हम आप सब को ये बताएंगे की फिल्म का सर्टिफिकेट होता क्या है, यह कितने प्रकार का होता है और इनके मतलब क्या होते हैं।

क्या होता है फिल्म का सर्टिफिकेट

किसी भी फिल्म में जो कंटेंट दिखाए जाते हैं उसके आधार पर भारत में फिल्मों को रिलीज करने के लिए सीबीएफसी यानी कि सेंसर बोर्ड फॉर फिल्म सर्टिफिकेशन सर्टिफिकेट देता है। इसका अर्थ ये है कि फिल्म सर्टिफिकेट के अनुसार ही ये तय होता है कि फिल्म कैसी है और इसे किस वर्ग के लोग देख सकते हैं। बोर्ड के 9 ऑफिस हैं – नई दिल्ली, मुंबई, तिरुवनंतपुरम, चेन्नई, बेंगलुरु, हैदराबाद, कटक, कोलकाता और गुवाहाटी में स्थित हैं।

कितनी तरह की होती है सर्टिफिकेट?

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U सर्टिफिकेट

यह फिल्म का सर्टिफिकेट उन फिल्मों को दिया जाता है जो हर प्रकार के दर्शकों को दिखाए जाने के लिए बनाई गई है। इस तरह की फिल्म कोई भी दर्शक देख सकते हैं।

U/A सर्टिफिकेट

ये सर्टिफिकेट देने का तात्पर्य ये है कि कोई भी बच्चा जो 12 साल से कम उम्र का हो वो अपने माता पिता के साथ देख सकता है।

A सर्टिफिकेट

इस तरह की फिल्में बस वयस्कों के लिए ही बनाई जाती है। जो लोग 18 साल से ज्यादा है वे इस फिल्म को देख सकते हैं। अधिकांशतः ये सर्टिफिकेट उन फिल्मों को मिलती है जिसमें एडल्ट कॉमेडी या बोल्ड सीन्स दिखाए जाते हैं।उन्हीं फिल्मों के ये सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है।

S सर्टिफिकेट

ये सर्टिफिकेट कुछ खास तरह के ऑडियंस के देखने के लिए दिया जाता है । इससे तात्पर्य ये है कि ऐसे फिल्मों को केवल डॉक्टर्स या या सेना के जवानों के लिए ही दिखाया जा सके उसे ही ये सर्टिफिकेट प्रदान किया जाता है ।

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