Wednesday, December 13

जानें, क्‍या है GPS और यह कैसे करता है काम

GPS यानि कि ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम, इस नाम से आप वाकिफ तो बेहतर ही होंगे क्योंकि आजकल स्मार्टफोन का जमाना है और शायद ही ऐसा कोई स्मार्टफोन होगा जिसमें यह सुविधा ना दी गयी हो। यह तो हम सभी जानते ही होंगे की जीपीएस की मदद से किसी जगह को खोजने में हमे मदद मिलती है या फिर खुद की लोकेशन देने में यह सिस्टम काफी मददगार है। मगर क्या आपको पता है जीपीएस असक्ल में है क्या, यह काम करता कैसे है और इसे बनाने के पीछे मकसद क्या रहा होगा। आपने इस सब के बारे में कभी सोचा ही नही होगा, खैर कोई बात नहीं आज हम आपको इसी सब के बारे में बताने के लिए यह लेख लेकर आये है जो शायद आपकी जानकारी में कुछ इजाफा कर दे।

ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम एक सैटेलाइट आधारित नेविगेशन सिस्टम है जो आपकी लोकेशन तो बताती ही है साथ में मौसम और समय की जानकारी भी देती है। इस सिस्टम को यूनाइटेड स्टेट्स ऑफ़ अमेरिका के रक्षा विभाग द्वारा बनाया गया है जिसका सबसे पहले अमेरिकी नौसेना ने 1960 में इस्तेमाल किया था। शुरुवाती दौर में जीपीएस का प्रयोग सेना के लिए ही किया जाता था मगर कुछ वर्षों के बाद 1995 में इसका इस्तेमाल आम नागरिकों के लिए भी किया जाने लगा।

 

GPS का काम

देखा जाये तो जीपीएस का ज्यादाटार इस्तेमाल ट्रांसपोर्ट में किया जाता है जिसके जरिये वो एक जगह से दूसरे जगह तक पहुचने का बेहतर रास्ते का चुनाव करते है। असल में जीपीएस रिसीवर से जुड़कर सैटेलाइट से डाटा प्राप्त कर उसकी गाणना करने का काम करता है। देखा जाये तो जीपीएस इनके जरिये संदेशों का आदान प्रदान करता है। आपको बता दे की जीपीएस तीन प्रमुख क्षेत्रों से मिलकर बना हुआ है स्पेस सेगमेंट, कण्ट्रोल सेगमेंट और यूजर सेगमेंट।

जीपीएस साइड उपग्रह से जुड़ा होता है जो वास्तिविक जगह की पहचान करता है। इसकी मदद से दूर बैठकर किसी की भी स्थिति को जाना जा सकता है। सबसे महत्वपूर्ण बात यारह है कि जीपीएस के जरिये आप अपनी वास्तविक स्थिति पर तुरंत मदद पा सकते है। आपको बताना चाहंगे की सैटेलाइट से मिले डाटा की गणना को ट्राइएंगुलेशन कहते है जहाँ पोजीशन को कम से कम तीन बार सैटेलाइट की मदद से पता किया जाता है। पोजीशन को हमेशा लोंगीट्यूड और लैटीट्यूड से दर्शाया जाता है। जीपीएस की एक रेंज होती है जिसमे यह सिस्टम 10 से 100 मीटर तक का अनुमान देता है।

 

GPS का प्रयोग

आपने अक्सर देखा होगा आजकल की ऐप आधारित टैक्सी जैसे ओला, उबेर, मेरु आदि जीपीएस पर पूरी तरह से निर्भर है। जिस तरह से आप घर बैठे इन्हें बुला लेते है और बिना आपको जाने पहचाने ये टैक्सी आपके घर तक आ भी जाती है ये सब जीपीएस का ही तो कमाल है मेरे दोस्त। आपको जानकार ख़ुशी होगी की भारत में भी जीपीएस का इस्तेमाल वैश्विक तौर पर होने लगा है। दक्षिण रेलवे ने जीपीएस आधारित यात्री सुचना प्रणाली वाली ईएमयू आरम्भ कर रहा है। इस तरह की सबसे पहले ईएमयू ट्रैन ताम्बरम स्टेशन से चेन्नई बीच तक चलेगी।

जीपीएस का इस्तेमाल सिर्फ लोकेशन पता लगाने या टैक्सी बुलाने तक ही नही है बल्कि बड़े बड़े संस्थानों में भी इसका काफी बड़ा स्थान है। एस्ट्रोनॉमी, कार्टोग्राफी, ऑटोमेटेड व्हीकल्स, फ्लीट ट्रैकिंग, जियोफेसिंग, डिजास्टर रिलीफ और सबसे महत्वपूर्ण इमरजेंसी सेवा के लिए जीपीएस का इस्तेमाल होता है, हालाँकि यह सूची यहीं पर ख़त्म नही है यह बहुत ही लंबी है हमने बस कुछ ज्यादा महत्वपूर्ण इस्तेमाल आपको बताये है। उम्मीद करते है शायद यहाँ दी गयी जानकारी आपका कुछ ज्ञान बड़ा सके।

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