जानें, आरबीआई द्वारा जारी किए गए 100 रुपये के नए नोट का क्या है गुजरात से कनेक्शन

खबरों के मुताबिक भारतीय रिजर्व बैंक जल्द ही 100 रुपये के नये नोट जारी करने वाला है| इस नये नोट का रंग हल्के बैंगनी रंग का होगा| 100 रुपये के नये नोट का आकार 66 मिलीमीटर x 142 मिलीमीटर का होगा | बैंक ने इस संबंध में एक प्रेस विज्ञप्ति जारी की है जिसे ट्वीट भी किया गया है| इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा हैं कि बैंक द्वारा जारी 100 रुपये के पुराने नोट भी चलन में रहेंगे|

100 रुपये के नये नोट पर पहले ही की तरह महात्मा गांधी की तस्वीर है, अशोक स्तंभ, प्रॉमिस क्लॉज़ और अन्य फ़ीचर्स के साथ मौजूदा गवर्नर उर्जित पटेल के हस्ताक्षर भी होंगे लेकिन नोट के पिछले हिस्से पर कुछ बदलाव किए गए हैं| इसमें एक तस्वीर होगी जिस पर लिखा होगा “रानी की वाव|”

 

ये रानी का वाव क्या है?

हम आपको बता दे की ये “रानी की वाव” गुजरात के पाटन ज़िले में स्थित एक प्रसिद्ध बावड़ी (सीढ़ीदार कुआं) है जिसे यूनेस्को ने चार साल पहले 2014 में विश्व विरासत में शामिल किया था| यूनेस्को की वेबसाइट के मुताबिक रानी की वाव सरस्वती नदी से जुड़ी है| इसे ग्यारहवीं सदी के एक राजा की याद में बनवाया गया था|

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क्या खास है रानी की वाव में ?

भूमिगत जल संसाधन और जल संग्रह प्रणाली का एक उत्कृष्ट उदाहरण है रानी की वाव, जो भारतीय महाद्वीप में बहुत ही लोकप्रिय रही है| वहाँ इस तरह के सीढ़ीदार कुएं का निर्माण ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी से किया जा रहा है| इस वाव में सात मंज़िला मारू-गुर्जर स्‍थापत्‍य शैली का सुन्‍दर उपयोग किया गया है जो जल संग्रह की तकनीक, बारीकियों और अनुपातों की अत्यंत सुंदर कला क्षमता की जटिलता को दर्शाता है| जल की पवित्रता और इसके महत्व को समझाने के लिए इसे औंधे मंदिर के रूप में डिजाइन किया गया था|

इसके अलावा वाव की दीवारों और स्तंभों पर सैकड़ों नक्काशियां की गई हैं| इसे सात तलों में विभाजित किया गया हैं तथा इसके सीढ़ीदार कुएं में भी नक्‍काशी की गई हैं| इसमें 500 से भी अधिक बड़ी मूर्तियां है और एक हज़ार से अधिक छोटी मूर्तियां हैं| जिसमें धार्मिक, पौराणिक और धर्मनिरपेक्ष चित्रों को बड़ी बारीकियों से उकेरा गया है जो साहित्यिक संदर्भ भी प्रदान करती हैं|

इन सभी में नक्काशियां, राम, वामन, महिषासुरमर्दिनी, कल्कि आदि जैसे अवतारों के विभिन्न रूपों में भगवान विष्णु को ही समर्पित किया गया हैं| रानी के वाव का चौथा तल सबसे गहरा है जो एक 9.5 मीटर से 9.4 मीटर के आयताकार टैंक तक जाता है और जो 23 मीटर गहरा है| इस परिसर के एकदम पश्चिमी छोर पर यह कुआं स्थित है जिसमें 10 मीटर व्‍यास और 30 मीटर गहराई का शाफ़्ट शामिल है|

विरासत की छवि हैं रुपयों पर

ऐसा पहली बार नहीं हुआ है जब भारत में किसी ऐतिहासिक धरोहर को नोट पर छापा गया है| इस तरह का प्रचलन पहले भी रहा है| 2016 में नोटबंदी के बाद आए नये 500 रुपये के नोट पर लाल किले की तस्वीर, 200 रुपये के नोट पर सांची का स्तूप, 50 रुपये के नोट पर हम्पी के रथ की तस्वीर छापी गई और 10 रुपये के नोट पर कोणार्क के सूर्य मंदिर के रथ का पहिया छापा गया हैं| इसके पहले भी 50 रुपये के नोट पर भारतीय संसद, 20 रुपये के नोट पर कोणार्क के सूर्य मंदिर के रथ का पहिया इत्यादि छापे गए हैं|

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