जानिए, गुरुवार का महत्व और इस दिन क्या करना रहेगा शुभ और अशुभ

गुरुवार लक्ष्मी नारायण का दिन होता है, इस दिन लक्ष्मी और नारायण का एक साथ पूजन जीवन में खुशियों की अपार वृद्धि कराने वाला होता है। इस दिन लक्ष्मी और नारायण की एक साथ पूजन करने से पति-पत्नी के बीच कभी दूरिया नहीं आती है। साथ ही धन की वृद्धि होती है। गुरुवार का दिन धर्म का दिन होता है और  ब्रह्मांड में स्थित नौ ग्रहों में से गुरु वजन में सबसे भारी ग्रह है। गुरु धर्म व शिक्षा का कारक ग्रह है। गुरु ग्रह को कमजोर करने से शिक्षा में असफलता मिलती है। साथ ही धार्मिक कार्यों में झुकाव कम होता चला जाता है।

शास्त्रों के अनुसार गुरुवार की रात का जो समय होता है वो इन्द्र पत्नी रति को समर्पित है और रति का उद्गमन रात्रि शब्द से हुआ है और इस चराचर जगत में देवी महालक्ष्मी को रात की देवी कहा गया है इसीलिए अगर गुरूवार को रात में कुछ काम किए जाते हैं तो उन कार्यों को करने से माता लक्ष्मी रुष्ट  हो जाती हैं और घर में दुख और दरिद्रता उत्पन्न कर देती हैं इसलिए गुरूवार की रात में इब बताये गए कार्यों को भूल कर भी नहीं करना चाहिए।

अगर आप शादी शुदा है तो गुरूवार को रात के समय भूल से भी अपने जीवन साथी से झगड़ा न करें।

गुरुवार के दिन रात को सोने से पहले अपने बालो को खुला हुआ ना छोड़े बल्कि इसे अच्छे से बांध लें क्योंकि गुरूवार की रात को बाल खोलकर सोने से लक्ष्मी जी क्रोधित होती हैं।

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गुरुवार के दिन महिलाओ को अपने  बाल नहीं धोने चाहिए क्योंकि महिलाओं की जन्मकुंडली में बृहस्पति पति का कारक होता है। साथ ही बृहस्पति ही संतान का कारक होता है। इस प्रकार अकेला बृहस्पति ग्रह संतान और पति दोनों के जीवन को प्रभावित करता है।

गुरुवार को नेल कटिंग और शेविंग करना गुरु ग्रह को कमजोर करता है। इससे आपकी आयु कम होती है।

गुरूवार को रात के समय कभी भी चाबियों का छल्ला न हिलाएं।

गुरूवार की रात को भोजन में भूल से भी चावल न खाएं और ना ही दूध पिए।
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