नए कानून के अनुसार तीन तलाक दिया तो हो जाएगी तीन साल की जेल, जानें इससे जुड़ी कुछ खास बातें

तीन तलाक को लेकर कई विवाद हुए है। कहीं कई लोगो को लगता है कि तीन तलाक मुनासिफ है क्योंकि यह मुस्लिमों की शुरू से परम्परा रही है। वहीँ कई लोगो को ऐसा लगता है कि ये महिलाओ पर अत्याचार है। कुछ लोगो यह भी माना है कि एक बार में तीन तलाक होना गैरकानूनी है। कई लोग यह चाहते है कि तीन तलाक देने की कुछ परम्परा है, जो मुस्लिमो की बदलनी नही चाहिए। अब यह विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुँच गयी है।

जिस पर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद सरकार का यह मानना था कि अब यह परम्परा बंद कर देनी चाहिए लेकिन ऐसा हो न सका यह सिलसिला जारी रहा। आपको यह बता दे कि इस तरह के मामले इस साल फैसले से पहले जो तीन तलाक से सम्बन्ध रखते है थे वो 177 आये थे। वहीँ इस फैसले के बाद 66 मामले दर्ज किये गये है। तो आइये आपको बताते है तीन तलाक के कानून से जुडी 10 खास बाते –

यह भी पढ़े :-IPL 2018 में इंडियन प्रीमियर लीग के नए सीजन में हो सकते हैं दो बड़े बदलाव

  1. इस नए कानून का मसौदा एक अंतर-मंत्री के समूह ने तैयार किया है, जो मंत्री राजनाथ सिंह के अध्यक्षता में हुआ और इसके अन्य सदस्यों में विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, वित्त मंत्री अरुण जेटली, विधि मंत्री रविशंकर प्रसाद और विधि राज्यमंत्री पीपी चौधरी उपस्थित थे।
  2. इस कानून के अंतर्गत एक बार में तीन तलाक से पीड़ित महिला को अपने तथा अपने  बच्चों के लिए गुजारा भत्ता मांगने के लिए मजिस्ट्रेट से गुहार लगाने की शक्ति देगा।
  3. इस कानून के अंतर्गत पीड़ित महिला को मजिस्ट्रेट से अपने नाबालिक बच्चों के संरक्षण का अनुरोध भी कर सकती है, जिस पर मजिस्ट्रेट अंतिम फैसला लेगी।
  4. इस कानून के अनुसार कोई भी किसी भी तरह का तीन बार तलाक बोलकर, लिखकर, ईमेल, एस.एम.एस. और व्हाट्सएप जैसे आदि चीजो के द्वारा तलाक देना गैरकानूनी होगा।
  5. इस कानून के अनुसार एक बार में तीन तलाक देना  गैरकानूनी होगा और ऐसा जो करेगा उसे तीन साल के लिए जेल की सजा हो सकती है। यह अपराध गैर-जमानती होगा।
  6. यह कानून केवल जम्मू-कश्मीर को छोड़कर पूरे देश में लागू किया जाएगा।
  7. तलाक और विवाह दोनों ही संविधान के समवर्ती सूची में आते है और सरकार आपातकालीन स्थिति में यह कानून बनाने में सक्षम है। लेकिन सरकार ने राज्यों से सलाह लेने का फैसला किया है।
  8. इस कानून को लाने के लिए अधिकारी ने कहा कि इसे संसद के शीतकालीन सत्र में लाने की योजना है।
  9. आपको हम यह बता दे कि संसद का शीतकालीन सत्र 15 दिसंबर से शुरू होगा जो कि 5 जनवरी तक चलेगा।
  10. आपको हम यह भी बता दे कि हाल ही में गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने यह कहा था कि भारत के लोगों की यह मजबूत इच्छा है कि संसद तीन तलाक और राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग इन दोनों मुद्दों पर कानून बनाए। जिस पर सरकार इस इच्छा को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
Share this on

Leave a Reply