इस रविवार कुत्तो को कराएँ भोजन ,जीवन में होगा शुभता का संचार

कालाष्टमी का त्यौहार हर माह की कृष्णपक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है, इस दिन कालभैरव की पूजा की जाती है जिन्हें शिवजी का एक अवतार माना जाता है। इसे कालाष्टमी, भैरवाष्टमी आदि नामों से जाना जाता है। आज के दिन मां दुर्गा की पूजा और व्रत का भी विधान माना गया है। इस बार काल भैरव अष्टमी रविवार को दिनांक 10.12.2017 को मनाया जायेगा।

कालाष्टमी की व्रत कथा

पौराणिक कथा के अनुसार एक दिन भगवान ब्रह्मा और विष्णु के बीच श्रेष्ठ होने का विवाद उत्पन्न हुआ, विवाद के समाधान के लिए सभी देवता और मुनि देवो के देव महादेव जी के पास पहुंचे, सभी देवताओं और मुनि की सहमति से शिव जी को सबसे श्रेष्ठतम माना गया परंतु ब्रह्मा जी इससे सहमत नहीं हुए और ब्रह्मा जी, शिव जी का अपमान करने लगे।

ब्रह्म देव की अपमान जनक बातें सुनकर शिव जी को क्रोध आ गया जिससे कालभैरव का जन्म हुआ। उसी दिन से कालाष्टमी का पर्व शिव के रुद्र अवतार कालभैरव के जन्म दिन के रूप में मनाया जाने लगा।

कालाष्टमी व्रत फल

कालाष्टमी का व्रत बहुत ही फलदायी माना जाता है, इस दिन पूरे श्रद्धा भाव से  व्रत रखने और पूरे विधि-विधान से कालभैरव की पूजा करने से व्यक्ति के सारे कष्ट मिट जाते हैं और काल उससे दूर हो जाता है। इसके अलावा व्यक्ति रोगों से दूर रहता है और उसे हर कार्य में सफलता प्राप्त होती है।

पूजन की विधि

कालाष्टमी की संध्या के समय भैरव का विधिवत पूजन करें। सरसों के तेल का चौमुखी दीपक जलाएं, गुग्ल धूप करें, केसर का तिलक लगाएं, लाल फूल चढ़ाएं एवं मीठी रोटी का भोग लगायें इसके साथ ही इस दिन शक्ति अनुसार रात को माता पार्वती और भगवान शिव की कथा सुन कर जागरण का आयोजन करना चाहिए. कालभैरव की सवारी कुत्ता है। अतः इस दिन कुत्ते को भोजन करवाना शुभ बहुत ही माना जाता है।

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शुभ मुहूर्त

कालाष्टमी की पूजन मुहूर्त आज संध्या के 05:45 से संध्या 06:45 तक ही है, इसी शुभ मुहूर्त में पूजा करना अत्यधिक शुभकारी है।

कालभैरव मन्त्र

शिव पुराण में कहा गया है कि कालभैरव परमात्मा शिव के ही रूप हैं इसलिए आज के दिन इस मंत्र का जाप करना फलदायी होता है।

अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्,
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!
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