Friday, December 15

ये हैं वो भारतीय उद्योगपति जो अपनी आधी से ज्‍यादा कमाई कर देते है दान, जानें किसका है इस लिस्‍ट में नाम

किसी भी देश या समाज की अर्थव्यवस्था का मापक उसका व्यापार और उद्योग होता है, प्राचीन काल से ही मनुष्य विभिन प्रकार के उद्योग और व्यापार में लिप्त है और भारत भी इससे कभी अछूता नहीं रहा है। भारतीय अर्थव्यवस्था का लगभग 100 वर्षों का इतिहास देखें तो आप तमाम ऐसे नाम पाएंगे जिन्होंने अपने अथक परिश्रम, कुशाग्रता और दूर-दृष्टि से अपने उद्योग और समूह को ऐसी उंचाईयों तक पहुँचाया जिससे उनका नाम हमेशा के लिए इतिहास के पन्नों में दर्ज हो गया मगर आज के इस टेक्निकल ज़माने में ह्यूमन रिसोर्स की जरूरत कम पड़ रही है और इसीलिए लोगो को लग रहा है की ये उद्योगपति उनकी नौकरिया खा रहे है और वे बेरोजगार हो रहे हैं।

लेकिन ये आधा सच है क्योंकि शायद लोगो को इस बात का अभी पता ना हो की बेंगलुरु में सरकार भी शायद लोगों का इतना भला न कर रही हो, जितना यहाँ के उद्योगपति कर रहे हैं. आज हम आपको ऐसे ही कुछ उद्योगपतियों के बारे में बताने वाले है जो अपनी आधी से ज्यादा इनकम जरुरतमंदो की सेवा में ही खर्च कर देते हैं।

अज़ीम प्रेमजी

अज़ीम प्रेमजी  जो की विप्रो लिमिटेड के चेयरपर्सन है और इनकी इनकम लगभग 1.2 लाख करोड़ रुपए( नवंबर 2017) है इन्होने साबुन की फैक्ट्री से लेकर सॉफ्टवेयर सेक्टर में अग्रणी बनने तक लंबा सफर तय किया है। अज़ीम प्रेमजी फ़ाउंडेशन नाम का एक NGO है और देश के 3 लाख 50 हज़ार से ज़्यादा गांव के सरकारी स्कूलों में इनका काम चल रहा है. साल 2001 से लेकर अब तक अज़ीम प्रेमजी अपनी जेब से 63 करोड़ रुपए इस फ़ाउंडेशन को दान कर चुके हैं।

किरण मजूमदार शॉ

किरण मजुमदार शॉ जो की बायोकॉन की चेयरपर्सन और मैनेजिंग डायरेक्टर है और इनकी इनकम लगभग 16 हजार करोड़ रुपए ( नवंबर 2017) है 2011 में किरण मजूमदार शॉ फाइनेंशियल टाइम्स की टॉप 50 बिज़नेसवुमन रह चुकी है अब तक इन्होने अपनी आधी कमाई दान कर चुकी हैं. इनका कैंसर सेंटर बेंगलुरु में है जिसमे पैसों में कैंसर का इलाज करता है। 2016 में इस नेक काम के लिए किरण मजूमदार शॉ ने 40 करोड़ रुपए दान किए थे।

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सुधा मूर्ति और एन आर नारायणमूर्ति

सुधा मूर्ति- इनफ़ोसिस फ़ाउंडेशन की चेयरपर्सन और एन आर नारायणमूर्ति इनफ़ोसिस के को-फ़ाउंडर और इनकी इनकम लगभग 12 हज़ार करोड़ रुपए है. ये दोनों अपना समय समाजसेवा में लगाते हैं। ये दोनों मिलकर इनफ़ोसिस फ़ाउंडेशन नाम का NGO चलाते हैं, 2017 में सुधा ने इस फ़ाउंडेशन में 302.6 करोड़ रुपए लगाए।

नंदन नीलेकणी और रोहिनी नीलेकणी

नंदन नीलेकणी इंफोसिस के एग्ज़ेक्यूटिव चेयरपर्सन और को-फ़ाउंडर हैं और  रोहिनी नीलेकणी- एक पत्रकार, लेखक और सोशल एक्टिविस्ट रही हैं. इनकी इनकम लगभग 11 हज़ार करोड़ रुपए है रोहिणी नीलेकणी ‘प्रथम बुक्स’ की फ़ाउंडर हैं। पिछले एक दशक में ‘प्रथम बुक्स’ 18 भारतीय भाषाओं में 2 हज़ार से ज़्यादा किताबें छाप चुका है। इनका सपना यही है की हर बच्चे तक ये कहानियां पहुचें, वो भी उसी की मातृभाषा में ताकि हर बच्चा इसे पढ़ सके।

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