शास्त्रों के अनुसार इस समय में नहाना माना गया है पाप, कहीं आप भी तो नहींं करते राक्षसी स्नान

हम बहुत सारे ऐसे काम करते है जिससे हमे लगता है ये सही ही है लेकिन हमे उसके बारे में अच्छे से जाँच पड़ताल कर लेनी चाहिए। उसके बारे में पूरी जानकारी हो तभी कोई काम करे वरना बिना जानकारी आप कोई काम करेंगे तो आपका जीवन संकट में आ सकता है। आपके जीवन में कोई परेशानी न आए इसके लिए हम अपने इस पोस्ट के माध्यम से आपको कुछ जानकारी की बाते बताएँगे।

हमरे हिन्दू धर्म में कई सारी चीजे है जिसका काफी महत्व है उसमे से ही एक है स्नान। स्नान हिन्दू धर्म में काफी महत्व रखता है। इसके लिए प्राचीन कल में तो कुछ महत्वपूर्ण नियम भी बनाए गए। प्राचीन कल में महिलाए सूरज निकलने से पहले ही स्नान कर लिया करती थी। ऐसा क्यों ?

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ऐसा इसलिए की घर के बड़े-बुजुर्गो का ये मन्ना था की सूरज निकलने से पहले स्नान करने से घर में लक्ष्मी माता का वास होता है। और आज के जमाने में देख लीजिए घर के 5 सदस्य भी कमाते है तो भी उनका घर अच्छे से नहीं चल पता है। ऐसा होने का कारण आज का मनुष्य खुद ही है। प्रकृति के नियमो के विपरीत चलने से ऐसा ही तो होगा। तो इससे बचने के लिए हमे कुछ नियम का पालन करना चाहिए।

शास्त्र के अनुसार 4 स्नान है:-

(i) मुनि स्नान
(ii) देव स्नान
(iii) मानव स्नान
(iv) राक्षसी स्नान

(i) मुनि स्नान:-

ये स्नान सुबह के 4 से 5 बजे के अंदर करना होता है। इस समय स्नान करने से घर में सुख-समृद्धि हमेशा रहती है।

(ii) देव स्नान:-

ये स्नान सुबह के 5 से 6 बजे ले अंदर करना होता है। ऐसा करने मात्र से घर में आर्थिक स्थिती पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।

(iii) मानव स्नान:-

मानव स्नान सुबह 6 से 8 बजे के भीतर करना होता है। इसको करने से सामान्य फल मिलता है।

(iv) राक्षसी स्नान:-

ये स्नान सुबह 8 बजे के बाद किया जाता है उसका सबकुछ धीरे-धीरे नष्ट होने लगता है।

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