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रविवार को कर लें इनमें से कोई भी 1 उपाय, हनुमान जी हर मुश्किल करेंगे आसान

रविवार को कर लें इनमें से कोई भी 1 उपाय, हनुमान जी हर मुश्किल करेंगे आसान

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हनुमान अष्टमी पर्व जोकि हर पौस मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। वह पर्व इस साल के 10 दिसंबर दिन रविवार को पढ़ रही है। जो लोग इस समय काफी कष्ट, परेशानी और आर्थिक तंगी से परेशान है। तो वो इस पर्व के अवसर पर इस दिन इस विशेष उपाय को करके वह अपनी सारी परेशानीयों का निवारण कर सकते है। तो चलिए आपको बताते है। क्या है? वो उपाय जिसे करने मात्र से आप पर से सारे संकटों के बादल छट जाएंगे। तो आइये जानते हैं। ऐसे चढाएं हनुमान जी को चोला हनुमान अष्टमी जो कि 10 दिसंबर दिन रविवार को पढ़ रहा है। इस दिन आप हनुमान जी की विशेष कृपा पाने के लिए हनुमान जो को चोला चढ़ाएं। हनुमान जी को चोला चढ़ाने से पहले आप स्नान करके शुद्ध हो जाए और साफ वस्त्र धारण करें। यदि आप स्नान के बाद केवल लाल रंग की धोती पहने तो यह काफी शुभ होगा। चोला चढ़ाने के लिए आप चमेली के तेल का प्रयोग करें और चोला चढ़ाते वक्त आप एक दीपक
18 नवम्बर को है शनि अमावस्या, शनिदोष से मुक्ति पाने का है सबसे अच्छा समय

18 नवम्बर को है शनि अमावस्या, शनिदोष से मुक्ति पाने का है सबसे अच्छा समय

Religion
शनिदेव भाग्यविधाता हैं, यदि निश्छल भाव से शनिदेव का नाम लिया जाये तो व्यक्ति के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं, श्री शनिदेव तो इस जगत में कर्मफल दाता हैं जो व्यक्ति के कर्म के आधार पर उसके भाग्य का फैसला करते हैं। 18 नवम्बर 2017 को शनिवार के दिन शनि अमावस्या है जो की बहुत ही शुभ दिन है क्योंकि अमावस्या और शनिवार दोनों एक साथ ही है  इसलिए इस दिन शनिदेव का पूजन सफलता प्राप्त करने एवं दुष्परिणामों से छुटकारा पाने हेतु बहुत उत्तम है। इस दिन शनि देव का विधिवत  पूजन  करने से सभी मनुष्यो की  मनोकामनाएं अवश्य पूर्ण  होंगी और शनि देव की कृपा भी सदैव उनपर बनी रहेगी। यह भी पढ़ें : अपनी राशि के अनुसार जानें किस खूबी के लिए आप हैं मशहूर, इस एक राशि के लोग हमेशा कर देते हैं इरिटेट अमावस्या का विशेष महत्व है और अमावस्या अगर शनिवार के दिन पड़े तो इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है। शनिदेव को अमावस्या अधिक प्रिय है
आज है शंख पूजन, दूध भरे शंख से करें श्रीहरी का अभिषेक, दरिद्रता से मिलेगी मुक्ति

आज है शंख पूजन, दूध भरे शंख से करें श्रीहरी का अभिषेक, दरिद्रता से मिलेगी मुक्ति

Religion
शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष माह को श्रीकृष्ण का स्वरूप कहा जाता है और इस दिन शंख पूजन का विशेष महत्व रहता है जो आज के दिन है विष्णु पुराण अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ था उस समय कुल 14 रत्न प्राप्त हुए थे जिसमे से एक रत्न शंख भी है |पौराणिक कथाओ के अनुसार कहा जाता है की लक्ष्मी समुद्र पुत्री हैं और शंख उनका सहोदर भाई है। और इसी वजह से भी अष्टसिद्धि व नवनिधी में शंख का स्थान महत्वपूर्ण है। शंख को विजय, समृद्धि, सुख, यश, र्कीत व लक्ष्मी का साक्षात प्रतीक माना गया है। अपने घर में सुख समृद्धि लाने के लिए शंख को अपने घर में स्थापित करें । मान्यताओं के अनुसार अगहन के महीने में शंख पूजन का विशेष महत्व है। और ऐसा माना जाता है की अगहन के महीने में किसी भी शंख को भगवान श्रीकृष्ण का पंचजन्य शंख मान कर उसका पूजन-अर्चन करने से मनुष्यम की समस्त इच्छाएं पूरी होती हैं और घर में लक्ष्मी जी की कृपा बन
आज मनाया जा रहा है संकष्टी चतुर्थी, गणेश जी की शुभदृष्टि प्राप्त करने का है अच्छा दिन

आज मनाया जा रहा है संकष्टी चतुर्थी, गणेश जी की शुभदृष्टि प्राप्त करने का है अच्छा दिन

Religion
विद्वानो और शास्त्रों के अनुसार ऐसा माना जाता है की पूर्णिमा के बाद आने वाली कृष्ण पक्ष की चतुर्थी को संकष्टी चतुर्थी के नाम जाना जाता है। आपको बताना चाहेंगे की यदि संकष्टी चतुर्थी मंगलवार के दिन पड़ती है तो यह अंगारकी चतुर्थी होती है जो कई मायनों में बहुत ही शुभ माना जाता है। आज हम आपको इसके बारे मे कुछ विशेष बातें बताने जा रहे है जो श्री गणेश जी कृपा प्राप्त करने हेतु है। अक्सर यही कहा जाता है की किसी भी देवी-देवता की पूजा करने में आपकी भाषा से ज्यादा आपके मन के भाव का ज्यादा महत्व होता है और इसी वजह से सलाह दी जाती है की हमेशा पवित्र मन से भगवान श्रीगणेश का पूजन करते है तो इससे आपको मानसिक शान्ति तो मिलती ही है साथ ही साथ आपके घर-परिवार-व्यवसाय में सुख-समृद्धि की भी वृद्धि होती है। यह भी पढ़ें : 150 साल बाद आज की रात दिखेगा सुपर ब्लू ब्लड मून, कुछ ऐसा होगा नजारा जैसा की हम सभी जा
जानेें, आपको राशी के अनुसार कौन से भगवान की करनी चाहिए पूजा

जानेें, आपको राशी के अनुसार कौन से भगवान की करनी चाहिए पूजा

Religion
अक्सर हमारे साथ ऐसा होता है की हमरी कड़ी मेहनत करने के बावजूद भी वो सफलता नहीं मिल पाती  है जिसकी हम चाहत रखते है और इसीलिए जीवन में हर कोई किसी न किसी कारण से कभी न कभी कोई न कोई पूजा पाठ या अनुष्ठान अवश्य ही करता है। कुछ लोग ऐसे होते है जो सामान्य पूजा पाठ के माध्यम से ही अपने ईस्ट को प्रसन्न कर लेते है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है जो कठिन से कठिन अनुष्ठान करने के बावजूद भी उनकी मनोकामना पूर्ण नहीं होती है इसका क्या कारण हो सकता है चलिए हम आपको बताते है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमें अपनी राशी के अनुसार ही देवी देवताओ की पूजा करना चाहिए ऐसा करने से हमें मनवांछित फल की प्राप्ती हो सकती है इसीलिए आज हम आपको बतायेगे कौन से राशी वाला व्यक्ति किस देवी देवता की पूजा कर सकता है। मेष राशि मेष राशि का स्‍वामी मंगल ग्रह है इसलिए इस राशि के लोगों को कुंडली में मंगल की स्थिति मज़बूत