Tuesday, November 21News That Matters

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बड़े काम के हैं ये आठ मंत्र, प्रतिदिन इनका जाप करने से हर इच्‍छा होगी पूरी

बड़े काम के हैं ये आठ मंत्र, प्रतिदिन इनका जाप करने से हर इच्‍छा होगी पूरी

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मंत्र अर्थात ऐसी ध्वनि जो  मन को तारने वाली हो उसे मंत्र कहते है |हमारे धार्मिक शास्त्रों में बताया गया है की मंत्र जाप अपने आराध्य देवी देवता के मन तक पहुचने का एक मार्ग है, चंद शब्दों मेल किस तरह व्यक्ति के जीवन को परिवर्तित कर सकता है, ये बात वो लोग अच्छी तरह जानते हैं जो मंत्रों की ताकत देख चुके हैं। शास्त्रों के अनुसार माता लक्ष्मी के आठ स्वरुप है और यही आठ स्वरुप किसी भी व्यक्ति के जीवन की आधारशिला कहलाती है और अगर कोई व्यक्ति माता के इन्ही आठो स्वरुप की श्रद्धा भाव से पूजा अर्चना करता है तो उसका जीवन खुशियों से भर जाता है और उसके जीवन की  सारी विप्पतिया दूर हो जाती है। आज हम आपको माता लक्ष्मी के इन आठो स्वरुप को प्रसन्न करने के लिए आठ मंत्रो के विषय में बताएँगे। यह भी पढ़ें: साल 2018 की शुरुआत में ही इन 2 राशियों पर चारों दिशाओं से बरसेगा धन, बन रहा महासंयोग श्री आदि लक्ष्
आज शनि अमावस्या के दिन इन 8 राशियों के खुलने वाले हैं भाग्‍य

आज शनि अमावस्या के दिन इन 8 राशियों के खुलने वाले हैं भाग्‍य

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हम सभी शनिदेव के प्रकोप से बचना और उनकी कृपा हम सब पर बनी रहे यही हम सभी प्रार्थना करते है। अगर आप भी अपने ऊपर शनिदेव की कृपा चाहते हो या फिर आपके ऊपर शनि की साढ़ेसाती या ढय्या चल रही हो तो आज का दिन आप लोगो के लिए बेहद खास है। क्योकि इस बार 18 नवंबर को शनिवार के दिन शनि अमावस्या का योग बन रहा है। जो बहुत ही खास अमावस्या है। ज्योतिषियों की माने तो, यह योग 30 साल बाद बना है जो शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए बहुत ही शुभ व अत्यंत ही फलदाई माना गया है। ज्योतिषानुसार 16 नवंबर को सूर्यदेव ने अपना राशि परिवर्तन किया जिससे वह तुला राशि मे गोचर कर रहें थें। लेकिन 16 तारीख के बाद सूर्यदेव वृश्चिक राशि मे गोचर कर रहें थे और आज शनिवार के दिन अमावस्या होने के कारण कई राशियों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकता है। विशेषतः इन 8 राशियों को अधिक लाभदायक होने की संभावनाए हैं तो आइए जानते हैं सभी राशियों का राशि
आज है वृश्चिक संक्रांति, अगर छात्र करेंगे ये उपाय तो हर परीक्षा में मिलेगी सफलता

आज है वृश्चिक संक्रांति, अगर छात्र करेंगे ये उपाय तो हर परीक्षा में मिलेगी सफलता

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अगर आप सफलता पाने चाहते है और अपने कैरियर को सवारना चाहते है। तो गुरुवार को मार्गशीर्ष कृष्ण त्रियोदशी तिथि पर सूर्यदेव के वृश्चिक राशि में आगमन पर वृश्चिक संक्रांति पर्व मनाया जाएगा। जो छात्रो के लिए अत्यंत शुभ माना गया है। ज्योतिषानुसार सूर्यदेव एक माह में राशि परिवर्तन करते हैं। जब सूर्यदेव किसी राशि में प्रवेश करते हैं, तो उस काल को संक्रांति कहते हैं। हिंदू पंचांग के अनुसार मार्गशीर्ष माह में जब सूर्य राशि परिवर्तन करते हैं तो उस संक्रांति को वृश्चिक संक्रांति कहते हैं। इस संक्रांति में सूर्य तुला से वृश्चिक राशि में प्रवेश करते हैं। भारतीय पंचांग के अनुसार सूर्यदेव तुला राशि से वृश्चिक राशि में गुरुवार को दोपहर 12:36 पर प्रवेश करेंगे। यह संक्रांति गुरुवार पर पड़ने के कारण देव संक्रांति कहलाएगी जो आज है। वृश्चिक संक्रांति से धार्मिक व्यक्तियों, वित्तीय कर्मचारियों, छात्रों व
अगर सुबह सुबह उठते ही कर लेते हैं ये काम तो बन जाएंगे सभी बिगड़े हुए काम

अगर सुबह सुबह उठते ही कर लेते हैं ये काम तो बन जाएंगे सभी बिगड़े हुए काम

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हर इंसान चाहता है की अगर वो मेहनत कर रहा है तो उसका फल भी उसे अवश्य मिलना चाहिए और इसीलिए इंसान किसी काम में सफल होने के लिए दिन रात मेहनत करता है लेकिन कई बार कठिन मेहनत करने के बाद भी उसे मनचाही सफलता नहीं मिल पाती है क्योंकि कभी कभी भाग्य साथ नहीं देता लेकिन ज्योतिष शास्त्रों में ऐसे कई उपाय बताए गए है जिसे अपनाने से सफलता आसानी से मिल जाती है। अगर आप चाहते हैं कि हर काम में आपका भाग्य हमेशा साथ दे तो नियमित रुप से सुबह जल्दी उठना चाहिए। ऐसा करने से आपका पूरा दिन शुभ और एनर्जी से भरा रहता है। सुबह जल्दी उठने से आपका पूरा दिन शुभ होता है इसलिए रोजाना सूर्योदय से पूर्व उठकर नितक्रिया करने के बाद स्नान करने से आपके जीवन में और घर परिवार में सुख और शांति बनी रहती है। पूजा पाठ तो हम रोजाना करते ही है लेकिन अगर आप नियमित गायत्री मंत्र का जाप करते है तो आपके घर से नकारात्मक उर्जा
शनिवार को सूर्यास्त के समय करें ये उपाय, दूर हो जाएगा बुरा समय

शनिवार को सूर्यास्त के समय करें ये उपाय, दूर हो जाएगा बुरा समय

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हम सभी के लाइफ में बुरा वक्त आता है जब सभी को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। हमारे ज्योतिष में कुछ ऐसी बाते बताई गयी है जिससे ये बुरा समय टल सकता है और दूर भी हो सकता है। कुछ लोगो का मनना है कि बुरे वक्त के लिए शनिदेव जिम्मेदार होते है जो हमारे पापों का दण्ड देते है। जिसे कुछ लोग साढ़े साती भी कहते है इसलिए बुरे वक्त के दौरान शनि देव की पूजा करनी चाहिए। जिससे बुरा समय दूर हो सके और हमारे पापों का नाश हो सके। ज्योतिष के अनुसार शनिदेव की कृपा पाने के लिए शनिवार श्रेष्ठ दिन माना गया  है। शनिवार के दिन किए गए उपायों और पूजा अर्चना से शनि के दोष शांत हो जाते है और बुरा समय भी दूर हो जाता है। बहुत सारे लोगो की मान्यता है कि हनुमान जी के भक्तों को शनि के अशुभ फलों से मुक्ति मिलती है। यही कारण है जिसके चलते कई लोग शनिवार को हनुमान जी की पूजा करते है। तो आइए आज हम आपको बताते शनिवार को
आज है कालभैरव अष्‍टमी, इस विधी से करेंगे पूजन तो दूर हो जाएंगे सारे कष्‍ट

आज है कालभैरव अष्‍टमी, इस विधी से करेंगे पूजन तो दूर हो जाएंगे सारे कष्‍ट

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वेदों के अनुसार मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी को भगवान शिव ने भैरव रूप में अवतार लिया था और इस दिन भगवान शिव के भैरव रूप की पूजा की जाती है। इस दिन को लोग काल भैरवाष्टमी के रूप में याद रखते है, जो इस वर्ष के 10 नवंबर और 11 नवम्बर दोनों दिन पड़ रही है। बता दे की इस दिन श्रद्धालु लोग श्री महाकाल भैरव अष्टमी, श्री महाकाल भैरव जी की जयंती, काल अष्टमी, भैरव अष्टमी आदि नामो से बुलाते है और बहुत श्रद्धा भाव से पूजा भी करते है। यूं तो कालभैरव को खुश करना बेहद आसान है, लेकिन जब वे रुष्ट हो जाते है तो मनाना बहुत मुश्किल हो जाता है। शिव पुराण की शतरूद्र संहिता के अनुसार इस दिन खुद भगवान शिव, काल भैरव रूप में अवतरित हुए। भक्तो का मानना है भगवान शिव के दो रूप हैं- पहला वो, जो भक्तों को अभयदान देते है अर्थात विश्वेश्वर रूप और दूसरा जो दुष्टों को दंड देते है काल भैरव के रूप में। ऐसा माना जा
रुक गई है शादी या अटक गया है कोई भी काम तो पान के पत्ते से करें ये टोटका, मिल जाएगा समाधान

रुक गई है शादी या अटक गया है कोई भी काम तो पान के पत्ते से करें ये टोटका, मिल जाएगा समाधान

Interesting, Religion
अक्सर हम टोटको के बारे में सुनते आ रहे जो पुराने ज़माने से ही चले आ रहे है। आज हम आपको कुछ ऐसे ही टोटको के बारे में बतायंगे जिससे आप के जीवन में आ रही सारी समस्याओ का निवारण हो जाएगा। तो आइये जानते है- हमारे ज्योतिष में पान के पत्तो के कुछ ऐसे टोटके बताये गए है, जिन्हें करके आप सारी परेशानीयों से मुक्ति पा सकते है। ये है, कुछ टोटके इसमें से एक भी करेंगे तो आपका इसका लाभ मिलेगा- हर मंगलवार या शनिवार को मीठा पान हनुमान जी को चढ़ाए। अगर दुकान पर नजर लगी हो तो शनिवार को पांच पीपल और आठ पान के पत्ते एक धागे में पिरोकर पूर्व दिशा में लगा दे ऐसा पांच शनिवार करे। पुराने पत्तो को नदी में डाले दे। यह भी पढ़ें : आज मनाया जा रहा है संकष्टी चतुर्थी, गणेश जी की शुभदृष्टि प्राप्त करने का है अच्छा दिन अगर आपके काम अटक जाते हो तो रविवार को पान का पत्ता जेब में लेकर निकले बिगड़े काम बन जायेंगे।
नाख़ूनों पर बना यह निशान बताता है कि जल्द ही आने वाली है ‘मृत्यु’

नाख़ूनों पर बना यह निशान बताता है कि जल्द ही आने वाली है ‘मृत्यु’

Interesting, Religion
क्या आप जानते हैं कि नाख़ून आपकी पूरी सेहत की जानकारी दे देते हैं, लिवर, फेफड़ों और दिल के स्वास्थ में कहीं कोई समस्या हो तो उसके प्रमाण नाखूनों से मिल जाते हैं। आपको यह जानकार आश्चर्य होगा की नाखूनों से जुड़े चिकित्सा विज्ञान का इतिहास काफी पुराना है। पुरातन काल में जब बीमारी की जांच के लिए टेस्ट की सुविधा नहीं होती थी, तब हकीम और वैद्य सबसे पहले हाथ के नाखूनों के रंग से बीमारी की जांच करते थे। आयुर्वेद व होमियोपैथी में आज भी कुछ विशेषज्ञ स्वास्थ्य की जांच के समय नाखूनों के रंग को देखते हैं। विभिन्न शोधों में यह बात साबित हो चुकी है कि कई रोगों के पनपने के साथ-साथ नाखूनों का रंग अचानक बदलने लगता है। यह भी पढ़ें:  नाखुन पर बने ये निशान बताते हैं की आप हो बुद्धिमान इंसान आज हम आपको नाखुनो के कुछ रंगों के बदलने से होने वाली परेशानियों के विषय में बताएँगे साथ ही यह भी बताएँगे की क्या होता
जानें आखिर हिन्दू धर्म में क्यों किया जाता है नवजात शिशु का मुंडन, क्‍या है इसके पीछे का रहस्‍य

जानें आखिर हिन्दू धर्म में क्यों किया जाता है नवजात शिशु का मुंडन, क्‍या है इसके पीछे का रहस्‍य

Religion
सदियों से हिन्दू धर्म को परम्पराओ से भरा हुआ धर्म माना जाता है और इस धर्म में व्यक्ति के जन्म से लेकर मृत्यु तक तमाम तरह की परम्पराओ का पालन करना पड़ता है। उन्ही परम्पराओ में से एक है व्यक्ति के जन्म के कुछ समय बाद में मुंडन संस्कार की परंपरा, जो बेहद अहम मानी जाती है। सदियों से चली आ रही इस परंपरा को पहले हमारे पूर्वज मानते थे और अब हम मानते है। करीब-करीब हर हिन्दू परिवार इस परंपरा का वर्षों से पालन करता आ रहा है, शायद इसलिए भी क्योंकि हमारे जीवन में इनका अपना विशेष महत्व रहा है। शास्त्रों के अनुसार मुंडन संस्कार में शिशु के सिर के सारे बाल उतारे जाते हैं, जिसे हिन्दुओं में बहुत ही पवित्र संस्कार माना जाता है। अक्सर इस तरह के संस्कारों को निभाने के लिए एक विशेष मुहूर्त का होना अनिवार्य होता है। बताना चाहेंगे की हिन्दू धर्म में इसे चूड़ाकर्म संस्कार भी कहा जाता है, क्योंकि अगर आपने
आइए जानते हैं हिन्दू धर्म में क्‍या है रुद्राक्ष का वास्तविक महत्व

आइए जानते हैं हिन्दू धर्म में क्‍या है रुद्राक्ष का वास्तविक महत्व

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रुद्राक्ष का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है जिसके बारे में ऐसी मान्यता है कि इसकी उत्पत्ति भगवान शंकर की आँखों के जलबिंदु से हुई है। रुद्राक्ष का अर्थ है रुद्र अर्थात शिव की आंख से निकला अक्ष यानी आंसू। रुद्राक्ष के बारे में एक कथा प्रचलित है। ऐसा कहा जाता है की एक बार भगवान शिव ने अपने मन को वश में कर संसार के कल्याण के लिए सैकड़ों सालों तक तप किया, तभी एक दिन अचानक ही उनका मन दु:खी हो गया और जब उन्होंने अपनी आंखें खोलीं तो उनमें से कुछ आंसू की बूंदें गिर गई। इन्हीं आंसू की बूंदों से रुद्राक्ष नामक वृक्ष उत्पन्न हुआ। शिवपुराण की विद्येश्वर संहिता के अनुसार रुद्राक्ष 14 प्रकार बताए गए हैं तथा सभी का महत्व व धारण करने का मंत्र अलग-अलग है। इन्हें माला के रूप में पहनने से मिलने वाले फल भी भिन्न होते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इन रुद्राक्षों को विधि-विधान से धारण करने से विशेष लाभ