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तो इस वजह से महिलाएं नहीं फोड़ती नारियल, जानें क्‍या है कारण

तो इस वजह से महिलाएं नहीं फोड़ती नारियल, जानें क्‍या है कारण

Lifestyle, Religion
भारतीय वैदिक परंपरा अनुसार श्रीफल शुभ, समृद्धि, सम्मान, उन्नति और सौभाग्य का सूचक माना जाता है। किसी को सम्मान देने के लिए उनी शॉल के साथ श्रीफल भी भेंट किया जाता है। भारतीय सामाजिक रीति-रिवाजों में भी शुभ शगुन के तौर पर श्रीफल भेंट करने की परंपरा युगों से चली आ रही है। विवाह की सुनिश्चित करने हेतु अर्थात तिलक के समय श्रीफल भेंट किया जाता है। बिदाई के समय नारियल व धनराशि भेंट की जाती है। यहां तक की अंतिम संस्कार के समय भी चिता के साथ नारियल जलाए जाते हैं। वैदिक अनुष्ठानों में कर्मकांड में सूखे नारियल को वेदी में हूम किया जाता है। प्राचीन समय से ही नारियल से संबंधित कई प्रकार की परंपराएं प्रचलित हैं।इन्ही परंपराओं में से एक अनिवार्य परंपरा यह है कि हिन्दू धर्म में स्त्रियां नारियल नहीं फोड़ती हैं। आमतौर पर स्त्रियों द्वारा नारियल फोड़ने को अपशकुन माना जाता है।इसीलिए घर के बुजुर्ग और
चाय बनाने के बाद बची हुई चाय पत्ती को भूल कर भी नहीं फेंके, होेते हैं उसके गजब के फायदे

चाय बनाने के बाद बची हुई चाय पत्ती को भूल कर भी नहीं फेंके, होेते हैं उसके गजब के फायदे

Health & Fitness, Interesting
आज हम आपको एक ऐसी चीज़ के बारे में बताने वाले है जिसके बिना हमारी सुबह और शाम दोनों ही अधूरी रहती है | जी हां ! वह है चाय | और फिर हो भी क्यों  ना हमारा भारत चाय पीने में कई देशो से आगे है | चाय बूढ़े ,जवान और बच्चे सभी को पसंद आती है और अगर कोई मेहमान घर पे आये तो सबसे पहले चाय ही पूछी जाती है | चाय तो हम सभी के घर पर बनती है पर हम उस चाय के बनने के बाद उसमे इस्तेमाल हुई चाय-पत्ती को फेक दिया करते है और यह कोई नई बात नही है लेकिन आज हम आपको उस बची हुई चाय-पत्ती को दोबारा कई और जगह इस्तेमाल करने के तरीके बताने जा रहे है | तो चलिए हम आपको उस बची हुई चायपत्ती के उपयोग बताते है | अगर आप उस बची हुई चाय-पत्ती को अपने की जख्म या चोट पर लगते है तो वह उसे बहुत ही असरदार ढंग से भरने में मदद करती है | हम आपको बता दे कि ऐसा इसलिए होता है क्योकि चाय की पत्ती में बहुत ही असरदार एंटी-आक्स़ीडन्ट्