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…तो बिहार के इस जगह प्रकटे हुए थे भगवान नृसिंह, यही हुआ था पहला ‘होलिका’ दहन

…तो बिहार के इस जगह प्रकटे हुए थे भगवान नृसिंह, यही हुआ था पहला ‘होलिका’ दहन

Religion
जैसा के हम सभी जानते है की रंगो के त्योहार होली के पहले पाप और अधर्म का नाश करने के लिए होलिका दहन की प्रथा सालो से चली आ रही है | लोगों को पता होगा कि असुर हिरन्यकश्यप की बहन होलिका नारायण भक्त प्रहलाद को गोद में लेकर जलती चिता पर बैठ गई थी | लेकिन यह आपको ये नही पता होगा कि ये घटन बिहार के पूर्णिया जिले के सिकलीगढ़ में की है जहा भक्त की रक्षा के लिए भगवान विष्णु ने नृसिंह अवतार लिया था। यह भी पढ़े :इस होली पर शुक्रदेव कर रहे मीन राशि में प्रवेश, इन 8 राशि वालों के बंद किस्‍मत का खुलेगा ताला आज भी जिले के बनमनखी प्रखंड के नाम से सिकलीगढ़ में उस स्थान का अस्तित्व मौजूद है | जहां असुर हिरण्यकश्यप के अमरता का अहंकार उसके विनाश का करें बना | उसने अपने पुत्र प्रहलाद जो की भगवान विष्णु का भक्त था जिसकी हत्या करने के लिए अपनी बहन होलिका की गोद में देकर जलती चिता पर बैठा दिया। इसके बा
आज सफला एकादशी की रात यहां रखें एक दीपक इतना आयेगा पैसा की संभाल नहीं पाओगे आप

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हिन्दू धर्म  में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।। पौषमास के कृष्णपक्ष में सफला नाम की एकादशी होती है। इस दिन भगवान नारायण की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए, यह एकादशी कल्याण करने वाली है। एकादशी समस्त व्रतों में श्रेष्ठ है। पद्मपुराण में पौषमास के कृष्णपक्ष की एकादशी के विषय में युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण बोले-बडे-बडे यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है। इसलिए एकादशी-व्रत अवश्य करना चाहिए, इस बार सफला एकादशी बुधवार यानि 13 दिसम्बर को मनाई जाएगी। सफल एकादशी का पूजन विधि सफला एकादशी की सुबह स्नान करने के बाद माथे पर चंदन लगाकर कमल अथवा अन्य कोई फूल, फल, गंगा जल, पंचामृत व धूप-दीप से भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा एवं आरती कर
आज है शंख पूजन, दूध भरे शंख से करें श्रीहरी का अभिषेक, दरिद्रता से मिलेगी मुक्ति

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Religion
शास्त्रों के अनुसार मार्गशीर्ष माह को श्रीकृष्ण का स्वरूप कहा जाता है और इस दिन शंख पूजन का विशेष महत्व रहता है जो आज के दिन है विष्णु पुराण अनुसार जब समुद्र मंथन हुआ था उस समय कुल 14 रत्न प्राप्त हुए थे जिसमे से एक रत्न शंख भी है |पौराणिक कथाओ के अनुसार कहा जाता है की लक्ष्मी समुद्र पुत्री हैं और शंख उनका सहोदर भाई है। और इसी वजह से भी अष्टसिद्धि व नवनिधी में शंख का स्थान महत्वपूर्ण है। शंख को विजय, समृद्धि, सुख, यश, र्कीत व लक्ष्मी का साक्षात प्रतीक माना गया है। अपने घर में सुख समृद्धि लाने के लिए शंख को अपने घर में स्थापित करें । मान्यताओं के अनुसार अगहन के महीने में शंख पूजन का विशेष महत्व है। और ऐसा माना जाता है की अगहन के महीने में किसी भी शंख को भगवान श्रीकृष्ण का पंचजन्य शंख मान कर उसका पूजन-अर्चन करने से मनुष्यम की समस्त इच्छाएं पूरी होती हैं और घर में लक्ष्मी जी की कृपा बन