Saturday, February 24

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इस मंदिर में आधी रात को भगवान बन जाते हैं डॉक्टर, इलाज़ के लिए लगती है भीड़

इस मंदिर में आधी रात को भगवान बन जाते हैं डॉक्टर, इलाज़ के लिए लगती है भीड़

News, Religion
भारत देश में अनेकों प्राचीन मंदिर है। हर मंदिर के निर्माण से जुडी अपनी एक कहानी है। इनमे से अनेक कहानियां ऐसी है जो हैरान करने वाली है।आज हम आपको ऐसे ही एक मन्दिर के विषय में बताने वाले है जहाँ भगवन स्वयं डॉक्टर बन कर अपने भक्तो का इलाज करते है और बड़े से बड़े रोग से अपने भक्तो को बचाते है | भारत देश में यह मंदिर ग्वालियर चम्बल अंचल के भिंड जिले के द्न्द्रौया गाँव में में स्थित है और इस गाँव के लोगो जब भी बीमार पड़ते है तो किसी अस्पताल या डॉक्टर के पास नहीं जाते है बल्कि इस मंदिर में आते है और खुद भगवान् उनका इलाज करते है और इस मंदिर की खासियत ये है की इस मंदिर की भभुती लगाने मात्र से लोगो की बीमारी ठीक हो जाती है भले ही कितनी बड़ी बीमारी क्यूँ ना हो | इस मंदिर की वर्षो पुराणी मान्यता है की इस मंदिर के हनुमान जी स्वयं डॉक्टर बन कर अपने भक्तो का इलाज करने पहुचते थे और एक बार इसी गाँव
सोम दुर्गाष्टमी: इस मुहूर्त में करें पूजन, जमीन जायदाद व सुख-सुविधा में होगी वृद्धि

सोम दुर्गाष्टमी: इस मुहूर्त में करें पूजन, जमीन जायदाद व सुख-सुविधा में होगी वृद्धि

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आज सोमवार के दिन मार्गशीर्ष शुक्ल अष्टमी पर सोम दुर्गाष्टमी पर्व मनाया जा रहा है। भविष्य पुराण के उत्तर-पूर्व में दुर्गाष्टमी पूजन हेतु श्रीकृष्ण और युधिष्ठिर का संवाद हुआ है। इसमें दुर्गाष्टमी के पूजन का सम्पूर्ण वर्णन किया गया है। दुर्गाष्टमी पूजन हर युग, कल्पों और मन्वंतरों में किया जाता था। धार्मिक मान्यताओं कि माने तो दुर्गम नाम का एक राक्षस जिससे तीनों लोक उसके नाम से ही डरा करते थे। ऐसे समय में भगवान शिव की शक्ति मूल प्रकृति नें देवी दुर्गसैनी नाम से अवतार लिया और दुर्गमासुर का वध किया। यही कारण है कि लोग इन्हें देवी दुर्गा कहते हैं। हमारे शास्त्रों के अनुसार हर माह में शुक्ल पक्ष की अष्टमी पर मासिक दुर्गाष्टमी मनाई जाती हैं। आज के दिन आदिशक्ति भवानी का प्रादुर्भाव हुआ था। यही कारण है जो हर शुक्ल अष्टमी को वार अनुसार आद्य शक्ति की दुर्गा, काली, भवानी, जगदंबा, दुर्गा, गौरी, पार्वत
आज शनिवार को पाना हो शनिदेव की कृपा तो जरूर कर ले यह छोटा सा काम

आज शनिवार को पाना हो शनिदेव की कृपा तो जरूर कर ले यह छोटा सा काम

Religion
शास्त्रों और पुराणों के अनुसार बताया गया है की शनिदेव को न्याय का देवता माना जाता है अर्थात शनिदेवता हर उस व्यक्ति को जो अच्छे कर्म करता है उसको अच्छा फल और बुरे कर्म करने वालों को बुरा फल देते हैं। बताना चाहेंगे की शनिवार का दिन भगवान शनि की पूजा की जाती है। ऐसा मान अजाता है की यदि किसी की कुंडली में शनिदोष है तो उस व्यक्ति को शनि के दुष्प्रभाव को कम करने के लिए घोड़े की नाल को काम में लेना चाहिए। लोगों का मानना है की घोड़े की नाल बहुत ही प्रभावशाली होती है और यदि वह किसी काले घोड़े के अगले दाहिने पांव की पुरानी नाल हो तो उसका प्रभाव कई गुना अधिक बढ़ जाता है। आज शनिवार के दिन आज हम आपको बताएँगे की कैसे बहुत ही साधारण तरह से यह छोटा सा उपाय कर के आप शनि के टेढ़े प्रभाव को कम कर सकते है। बता दे की अगर किसी व्यति के उपाय शनि की साढ़े साती या ढय्या चल रही हो तो उस व्यक्ति को शनिवार के दिन को
धरती पर दीपावली मनाने आएंगे देवता, इस तरह पूजन कर अपने संकटों का करें अंत

धरती पर दीपावली मनाने आएंगे देवता, इस तरह पूजन कर अपने संकटों का करें अंत

Religion
देव दिवाली कार्तिक माह की पूर्णिमा के दिन यानि दिवाली से ठीक 15 दिन बाद मनाई जाती है। यूं तो सभी त्योहार देश के हर कोने में मनाया जाता है लेकिन कुछ त्योहार हैं जो विशेषकर किसी राज्य से जुड़े होते हैं। इसी तरह देव दिवाली का महत्व विशेषकर भारत की सांस्कृतिक नगरी वाराणसी से जुड़ा है। मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान शंकर ने देवताओं की प्रार्थना पर सभी को उत्पीड़ित करने वाले राक्षस त्रिपुरासुर का वध किया, जिसके उल्लास में देवताओं ने दीपावली मनाई, जिसे "देव दीपावली" के रूप में मान्यता मिली। इसी तिथि को भगवान शंकर ने अपने हाथों से बसाई काशी के अहंकारी राजा दिवोदास के अहंकार को नष्ट कर दिया। यह पर्व ऋतुओं में श्रेष्ठ शरद, मासों में श्रेष्ठ कार्तिक व तिथियों में श्रेष्ठ पूर्णमासी के दिन मनाया जाता है, इसे देवताओं का भी दिन माना जाता है। इस माह किए हुए स्नान, दान, होम, यज्ञ और उपासना आदि का
जानेें, आपको राशी के अनुसार कौन से भगवान की करनी चाहिए पूजा

जानेें, आपको राशी के अनुसार कौन से भगवान की करनी चाहिए पूजा

Religion
अक्सर हमारे साथ ऐसा होता है की हमरी कड़ी मेहनत करने के बावजूद भी वो सफलता नहीं मिल पाती  है जिसकी हम चाहत रखते है और इसीलिए जीवन में हर कोई किसी न किसी कारण से कभी न कभी कोई न कोई पूजा पाठ या अनुष्ठान अवश्य ही करता है। कुछ लोग ऐसे होते है जो सामान्य पूजा पाठ के माध्यम से ही अपने ईस्ट को प्रसन्न कर लेते है लेकिन कुछ लोग ऐसे भी होते है जो कठिन से कठिन अनुष्ठान करने के बावजूद भी उनकी मनोकामना पूर्ण नहीं होती है इसका क्या कारण हो सकता है चलिए हम आपको बताते है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार हमें अपनी राशी के अनुसार ही देवी देवताओ की पूजा करना चाहिए ऐसा करने से हमें मनवांछित फल की प्राप्ती हो सकती है इसीलिए आज हम आपको बतायेगे कौन से राशी वाला व्यक्ति किस देवी देवता की पूजा कर सकता है। मेष राशि मेष राशि का स्‍वामी मंगल ग्रह है इसलिए इस राशि के लोगों को कुंडली में मंगल की स्थिति मज़बूत
ये 6 पाप करने पर भगवान शिव देते है भयंकर दंड

ये 6 पाप करने पर भगवान शिव देते है भयंकर दंड

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भगवन शिव जो देवो देव महादेव है, संसार के कण कण में बसी हुयी असीम उर्जा शिव है, शिव जी को प्रेम का प्रतिक मन जाता है, उन्हें एक अछे पति के तौर पर भी जाना जाता है और एक अछे पिता के तौर भी उन्हें पूजा जाता है, जो कुवारी लडकिया नंदी के कान में अच्छा पति पाने की इच्छा प्रकट करती है, उन्हें शिवजी कभी निराश नहीं करते, वैसे तो शिवजी भोलेनाथ है, शिव जी को किसी भी स्थान पर पूजा जा सकता है, उन्हें एक लोटा पानी चढ़कर भी प्रसन्न किया जा सकता है, आज मैं आपको शिव पूरण में बताये हुए ऐसे 6 पापो के बारे में बताने जा रहा हु जिन्हें करने पर शिवजी अत्यंत भयंकर दंड देते है। शादी तोड़ने की कोशिश : जो भी लड़की शिवजी के वहां नंदी के कान में स्वयं के लिए अच्छा पति मिलने की इच्छा प्रकट करती है, उनपर शिव हमेशा कृपा करते है, लेकिन अगर कोई व्यक्ति किसी दुष्ट वजह से शादी तोड़ने की कोशिश करता है, कोई स्त्री किसी दुसरे
भगवान करें किसी के हाथ में न हो ऐसी रेखा, कहीं आपके हाथ में तो नहीं

भगवान करें किसी के हाथ में न हो ऐसी रेखा, कहीं आपके हाथ में तो नहीं

Religion
हमारे ज्योतिष शास्त्र की कई शाखाऐ है, जिनके द्वारा हम विभिन्न प्रकार के तरीकों से अपने भविष्य के बारे में पता लगा सकते है। ज्योतिष शास्त्र में लोगो का भविष्य जानने के लिए एक ‘हस्तरेखा शास्त्र’ का निर्माण किया गया है, जिसके द्वारा हम अपने हाथ की रेखाओं को देखकर हम अपने भविष्य के बारे में पता लगा सकते है। हमारे हथेली में कई प्रकार की रेखाएं होती हैं, जो ज्योतिष के अनुशार हमारे भाग्य, जीवन और विवाह जैसी आदि प्रमुख जानकारी का पूर्व संकेत देती हैं। इसके साथ ही साथ हथेली पर कुछ शुभ और अशुभ चिह्न भी होते है। हस्तरेखा शास्त्र के अनुसार हमारी हथेली पर ऐसे कई निशान होते हैं, जो छोटी छोटी रेखाओं के मिलने या टकराने से बनते हैं। इनमें कुछ निशान हमें शुभ फल प्रदान करते हैं तो वहीँ कुछ बेहद अशुभ होते हैं। यह भी पढ़ें : आपके हाथो की रेखाएं बताएँगी आपकी सरकारी नौकरी की सम्भावनायेँ ‘एम’ अक्षर का निश