किन्नरों के जीवन से जुडी इन बातों को सुनकर उड़ जाएंगे आपके होश

समाज में जो चीज हमसे छुपाई जाती है अक्सर हमें उसी के बारे में सबसे जायदा जानने की इच्छा जागृत होती है, एसे ही समाज में स्त्री- पुरुष से जुड़े कई तथ्यों के अलावा लोगों को किन्नरो के जीवन से जुड़े तथ्यों को भी जानने की उत्सुकता होती है। किन्नर समुदाय समाज से अलग ही रहता है और इसी कारण आम लोगों में उनके जीवन और रहन-सहन को जानने की जिज्ञासा बनी रहती है। आज हम आपको उन्ही के बारे में कुछ बाते बताएँगे।

ज्योतिष के अनुसार वीर्य की अधिकता से पुरुष (पुत्र) उतपन्न होता है। रक्त (रज) की अधिकता से स्त्री (कन्या) उतपन्न होती है, वीर्य और रज़ समान हो तो किन्नर संतान उतपन्न होती है। एक मान्यता है कि ब्रह्माजी की छाया से किन्नरों की उत्पत्ति हुई है, दूसरी मान्यता यह है कि अरिष्टा और कश्यप ऋषि से किन्नरों की उतपत्ति हुई है फिलहाल देश में किन्नरों की चार देवियां हैं। बताना चाहेंगे की किसी नए वयक्ति को किन्नर समाज में शामिल करने के भी नियम है। इसके लिए कई रीती-रिवाज़ है, जिनका पालन किया जाता है। नए किन्नर को शामिल करने से पहले नाच-गाना और सामूहिक भोज होता है।

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कुंडली में बुध, शनि, शुक्र और केतु के अशुभ योगों से व्यक्ति किन्नर या नपुंसक हो सकता है। किसी किन्नर की मृत्यु के बाद उसका अंतिम संस्कार बहुत ही गुप्त तरीके से किया जाता है। हिंजड़ों की शव यात्राएं रात्रि को निकाली  जाती है। शव यात्रा को उठाने से पूर्व जूतों-चप्पलों से पीटा जाता है, किन्नर मुर्दे को जलाते नहीं बल्कि दफनाते हैं। किन्नर के मरने उपरांत पूरा हिंजड़ा समुदाय एक सप्ताह तक भूखा रहता है। किन्नर समाज कि सबसे बड़ी विशेषता है मरने के बाद यह मातम नहीं मनाते हैं। किन्नर समाज में मान्यता है कि मरने के बाद इस नर्क रूपी जीवन से छुटकारा मिल जाता है, इसीलिए मरने के बाद हम खुशी मानते हैं।

किन्नर समुदाय के सदस्य स्वयं को मंगल मुखी कहते है क्योंकि ये सिर्फ मांगलिक कार्यो में ही हिस्सा लेते हैं मातम में नहीं। किन्नरों की दुनिया का एक खौफनाक सच यह भी है कि यह समाज ऐसे लड़कों की तलाश में रहता है जो खूबसूरत हो, जिसकी चाल-ढाल थोड़ी कोमल हो और जो ऊंचा उठने के ख्वाब देखता हो। यह समुदाय उससे नजदीकी बढ़ाता है और फिर समय आते ही उसे बधिया कर दिया जाता है। बधिया, यानी उसके शरीर के हिस्से के उस अंग को काट देना, जिसके बाद वह कभी लड़का नहीं रहता। किन्नर अपने आराध्य देव अरावन से साल में एक बार विवाह करते है। हालांकि यह विवाह मात्र एक दिन के लिए होता है। अगले दिन अरावन देवता की मौत के साथ ही उनका वैवाहिक जीवन खत्म हो जाता है।

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