जानें, क्रिसमस ट्री के बारे में कुछ ऐसे तथ्य, जिसे शायद आपने पहले कभी नहीं सुना होगा

हमारा भारत विश्व  की चार प्रमुख धार्मिक परम्पराओं का जन्मस्थान है हिन्दू धर्म ,जैन धर्म ,बौद्ध धर्म और ईसाई धर्म  जिसमे ईसाई धर्म का सबसे प्रमुख पर्व है क्रिसमस का पर्व जो हरवर्ष  25 दिसंबर को दुनियाभर में बहुत ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। क्रिसमस ट्री को मसीही परिवार प्रभु यीशू की तरह  ही मानते हैं और इसीलिए क्रिसमस के मौके पर क्रिसमस वृक्ष का विशेष महत्व होता है। आस्था के साथ-साथ इसमें स्वास्थ्य और खुशहाली कि मान्यताएं भी जुडी हैं।

आज हम आपको इसी क्रिसमस ट्री के बारे में कुछ रोचक तथ्य बताने वाले है जो शयद ही आप जानते हो

क्रिसमस ट्री एक सदाबहार पेड़ है, जिसकी पत्तियां न ही  तो किसी मौसम में झड़ती हैं और न ही  कभी मुरझाती हैं।

क्रिसमस ट्री की मान्यता है की इसे  घर में रखने से बुरी आत्माएं दूर होती हैं तथा सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता इसीलिए यूरोपीय देशो बेल्जियम, नार्वे, स्वीडन तथा हॉलैंड में भूत भगाने के लिए क्रिसमस के पेड़ की टहनियों का उपयोग किया जाता था |

क्रिसमस ट्री को सजाने पर सजाने की परंपरा की शुरुआत जर्मनी से मानी जाती है |आज दुनियाभर में क्रिसमस ट्री लगाना एक अनिवार्य परम्परा बन गई है। इसीलिए यदि इसका प्राकृतिक वृक्ष न हो तो नकली पेड़ खरीद कर लोग घरो में सजाकर रखते हैं |

वैसे तो क्रिसमस ट्री की कहानी प्रभु यीशु मसीह के जन्म से है। जब उनका जन्म हुआ तब उनके माता पिता मरियम एवं जोसेफ को बधाई देने वालो ने, जिनमे स्वर्गदूत भी थे, एक सदाबहार फर को सितारों से रोशन किया था। तब से ही सदाबहार क्रिसमस फर के पेड़ को क्रिसमस ट्री के रूप में मान्यता मिली।

क्रिसमस ट्री को इंग्लैंड में लोग किसी के जन्मदिन, विवाह या किसी परिजन की मृत्यु हो जाने पर भी उसकी स्मृति में रोपते है। और ये  कामना करते हैं कि इससे पृथ्वी हमेशा हरी भरी रहे।

क्रिसमस ट्री पर छोटी छोटी मोमबत्तियाँ लगाने का प्रचलन 17वी शताव्दी से शुरू हो गया था। और क्रिसमस ट्री पर इलेक्ट्रिक लाइट लगाने का विचार 1882 में थॉमस एडिसन के सहायक एडवर्ड जॉनसन के दिमाग में आया था।

प्राचीन काल में क्रिसमस ट्री को जीवन की निरंतरता का प्रतीक माना जाता था। मान्यता थी कि इसे सजाने से घर के बच्चों की आयु लम्बी होती है। इसी कारण क्रिसमस डे पर क्रिसमस वृक्ष को सजाया जाने लगा।

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