Thursday, December 14

छोटी बचत से करें बड़ी शुरुआत

सीमित आमदनी, बढती महंगाई और ढेर सारी जरूरतें….आज का आम मध्यवर्गीय व्यक्ति इन्हीं तीन शब्दों के साथ जूझ रहा है। इस हालात को पूरी तरह बदलना नामुमकिन है, पर आकस्मिक परेशानियों से बचने के लिए इमर्जेंसी फंड बनाना बहुत जरूरी है। यह तभी संभव होगा जब साल की शुरुआत से ही अपने अनावश्यक खर्चों में कटौती करते हुए परिवार की वित्तीय योजना कुछ इस ढंग से बनाई जाए कि उसमें बचत की गुंजाइश हमेशा बनी रहे। आइए सखी के साथ जानें इमर्जेंसी फंड को मजबूत बनाने के लिए कुछ खास तरीके।

पहले प्लान करें

इमर्जेंसी फंड बनाने से पहले एक ऐसी सूची बनाएं, जिसमें हर महीने होने वाली कुल आमदनी और कुछ खर्च का विस्तृत विवरण हो। इस सूची में कार और होमलोन के लिए चुकाई जाने वाली िकस्तें भी शामिल करें। सभी जरूरतों को अनिवार्य, आपातकालीन और टालने योग्य खर्चों की तीन श्रेणियों में विभाजित करें। ईएमआइ की िकस्तों और अनिवार्य घरेलू खर्चों का कुल योग निकालें। इस तरह आपको हर महीने होने वाले जरूरी खर्च का सही हिसाब मिल जाएगा। इसके अलावा आपके पास जो भी राशि बचती है, उसका इस्तेमाल आकस्मिक जरूरतों के लिए कर सकती हैं।

आय का विश्लेषण

यदि कोई व्यक्ति बिजनेस या फ्रीलांसिंग करता है तो उसकी आमदनी हर महीने अलग-अलग हो सकती है क्योंकि बोनस और कमीशन जैसे माध्यमों से भी उसे लाभ मिल सकता है, जो नियमित नहीं होता। यदि किसी व्यक्ति का खुद का बिजनेस है तो वह पिछले 12 महीनों की कुल मासिक आय का विश्लेषण करके उसका औसत निकाल सकता है। यदि आप वेतनभोगी हैं तो केवल अपने निश्चित वेतन पर ही भरोसा करें। आपको इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि किसी भी निवेश से पहले आपको इमर्जेंसी फंड के लिए सबसे पहले आमदनी का निश्चित हिस्सा निकाल कर अलग रखना बहुत जरूरी है।

निर्धारित करें बचत राशि

इमर्जेंसी फंड के लिए अपनी निवेश योजना कुछ इस ढंग से बनाएं- 50 प्रतिशत एफडीआर कराएं, 30 प्रतिशत शॉर्ट टर्म बॉन्ड/इक्विटी फंड/ म्यूचुअल फंड, 10 प्रतिशत नगद और 10 प्रतिशत सेविंग अकाउंट में होना जरूरी है। हर व्यक्ति के लिए इमर्जेंसी फंड की जरूरत अलग-अलग हो सकती है। वैसे, इसके लिए आदर्श स्थिति यही मानी जाती है कि व्यक्ति के इमर्जेंसी फंड में कम से कम छह महीने के अनिवार्य घरेलू खर्च के बराबर राशि जरूर होनी चाहिए, ताकि लंबी बीमारी या आकस्मिक दुर्घटना जैसी स्थितियों की वजह से अगर कोई व्यक्ति काम करने में असमर्थ हो तो उसे उस स्थिति से उबरने के लिए कुछ समय की छूट मिल सके।

सही विकल्प चुनना

हर महीने के घरेलू खर्चों में कटौती करने के बाद तय करें कि आकस्मिक निधि की राशि का निवेश कैसे करें? वैसे बेहतर निवेश वही है, जिस पर अच्छा रिटर्न मिले और जिसे कभी भी आसानी से निकाला जा सके। इसके लिए रिकरिंग डिपॉिजट बेहतर विकल्प है। आजकल बैंक में संबंधित फॉर्म भरकर इसकी राशि आसानी से जमा हो जाती है। आप चाहें तो खुद हर माह बैंक के रिकरिंग डिपॉजिट में धनराशि जमा कर सकते हैं या फिर प्रतिमाह आपके सेविंग अकाउंट से आपके द्वारा तय की गई निश्चित रकम अपने आप निकलकर रिकरिंग डिपॉिजट खाते में जमा होती जाएगी। इससे आपको अच्छा ब्याज भी मिलता है। आकस्मिक स्थिति में अकाउंट ख्ााली करने पर आपको कोई नुकसान भी नहीं होता। इसी तरह शॉर्ट टर्म बॉन्ड भी ठीक रहते हैं। इससे आप जब जाहें पैसे निकाल सकते हैं। इसके अलावा एमओडी (मल्टी ऑप्शन डिपॉजिट) भी सेविंग अकाउंट से जुडा होता है। इसमें आपकी कुल रकम में से एक निर्धारित राशि हर महीने अपने आप एफडी में जमा होती है। इसमें एफडी से अच्छा ब्याज भी मिल जाता है, लेकिन किसी भी बैंक में एमओडी अकाउंट खोलने से पहले उसके फायदे-नुकसान को अच्छी तरह समझ लें।

खर्च में कटौती

अनावश्यक शॉपिंग, बाहर का खाना, फिल्में देखना और महंगे उपहार देना जैसे खर्चों में कटौती करके प्रतिमाह बचाई गई राशि को जोडकर उससे निवेश करें। बचत की आदत बनाएं। धीरे-धीरे आप खुद ही देखेंगे कि आपके खर्चे कम हो गए हैं। इस तरह अपनी निवेश योजना पर अमल करने के साथ आप गैर जरूरी ख्ार्च से छुटकारा भी पा सकेंगे।

इमर्जेंसी फंड की जरूरतों का मूल्यांकन भी जरूरी है क्योंकि बढती महंगाई के कारण आज जो रकम खर्च के लिए पर्याप्त है, पांच साल बाद वह कम पड जाएगी। इसलिए जब आपकी आर्थिक स्थिति में सुधार हो तो इमर्जेंसी फंड के लिए कुछ रकम अलग निकाल लें, ताकि आकस्मिक स्थिति में आपको लोन या कर्ज का बोझ न उठाना पडे। अगर आप साल की शुरुआत से ही इन बातों का ध्यान रखेंगी तो आपके लिए इमर्जेंसी फंड तैयार करना आसान हो जाएगा।

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