शशि कपूर के निधन के बाद सामने आए उनके जीवन से जुड़े दर्दनाक राज, पहले करते थें ये काम

वैसे तो बॉलीवुड में कई ऐसे डायलॉग हैं जो काफी मशहूर हैं लेकिन वहीं अगर बात करें शशि कपूर की तो उनका सबसे मशहूर डायलॉग रहा है “मेरे पास माँ हैं”। अफसोस की बीते सोमवार को वो हम सब को अलविदा कहकर चले गए लेकिन इस निधन से पूरा बॉलीवुड शोक में आ गया। आज हम आपको शशि कपूर के जीवन से जुड़े कुछ राज के बारे में बताने जा रहे हैं जो शायद ही आप जानते होंगे।

सबसे पहले तो आपको ये बता दें कि ये जानकारी काफी कम लोगों को थी कि शशि कपूर कपूर खानदान के इकलौते ऐसे शख्स हैं जिन्होंने एक विदेशी महिला जेनिफर केंडल से शादी की थी। जेनिफ़र अंग्रेजी नाटकों की अभिनेत्री थी। शादी के बाद शशि कपूर और जेनिफ़र की तीन संताने भी थी जिनका नाम कुणाल, करण और संजना कपूर हैं।

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वहीं शशि कपूर के बारे में ये भी कहा जाता है कि उन्होंने चार साल की उम्र में ही एक्टिंग करियर की शुरुआत कर ली थी जिसकी जानकारी भी काफी कम लोगों को हैं। अपने करियर के दौरान शशि कपूर ने शंकुतला नाम के नाटक में भी काम किया था। जिसके बाद उन्‍हें तीन बार नेशनल अवार्ड भी हासिल कर चुके हैं। शशि कपूर की भूमिका से कश्‍मीर की वादियां और भी खुबसूरत लगने लगी ये कहना शायद गलत नहीं होगा। इतना ही नहीं आपको बता दें कि इस बात की चर्चा बहुत से लोगों ने शशि कपूर को श्रद्धांजलि देते समय भी इस बात का ज़िक्र किया था।

अब सबसे आखिरी और गहरा राज कह सकते हैं इसे तो बता दें कि शशि कपूर ने एक फिल्म प्रोडूस की थी जिसका नाम था 36 चौरंगी लेन। ये फिल्म ऑस्कर के लिए गयी थी, बहुमत में ये बात निकल कर आई कि ये फिल्म काफी अच्छी है और इसलिए इसे ऑस्कर देना चाहिए कहा जाता है कि इसके लिए सबकुछ तय हो गया था।

लेकिन कहा गया कि अचानक से पता निर्णायक मंडल के एक सदस्य ने कहा कि टैक्निकल ग्राउंड पर इस फ़िल्म को पुरस्कार नहीं मिल सकता क्योंकि यह अंग्रेज़ी भाषा में बनी फ़िल्म है और इसकी वजह से इस फिल्‍म की एंट्री भारतीय भाषा की फ़िल्म के तौर पर हुई है। इस फिल्म को टैक्निकल प्रॉबल्म की वजह से ऑस्कर नहीं मिल पाया। यही शशि कपूर के जीवन का सबसे कड़वा सच था। जिसे आजतक कोई नहीं जानता है।
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