Thursday, December 14

चुपचाप आज के दिन करें इन मंत्रों का जाप, बन जाएगी आप पर शनिदेव की कृपा

देखा जाए तो हिन्दू धर्म में हर दिन का कोई ना कोई खास महत्व होता है, सप्ताह के सात दिन होते है जिनमे हर दिन किसी ना किसी भगवान की पूजा की जाती है। जैसे आज शनिवार का दिन है और इस दिन को खास शनिदेव का दिन माना जाता है जिन्हे सभी भगवानों में सबसे क्रोधित देवता भी कहा जाता है। ऐसा माना जाता है की जिस व्यक्ति पर भगवान शनिदेव की कृपा होती है उसे जीवन में कोई परेशानी नहीं होती। मनुष्य द्वारा किए गए पापों का दंड शनि देव ही देते हैं, शनि देव की आराधना करने से गृह क्लेश समाप्त हो जाता है तथा घर में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसलिए कहा जाता है की हर शनिवार को शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए कुछ उपाय करना चाहिए जिससे उनकी कृपादृष्टि हम पर बनी रहे।

अमूमन देखा गया है कि शनि की पूजा लोग डर में करते हैं लेकिन यह पूरा सच नहीं है। आपको बता दे की शनिदेव मनुष्य कर्तव्यों के आधार पर ही सजा तय करते हैं मगर इससे बचे रहने के लिए मनुष्य ने कई मंत्र इजात किये हैं। इन मंत्रों में शनि के प्रकोप से बचने से लेकर उन्हें खुश रखने तक के उपाय बताए गए हैं। इसी संदर्भ में हम आज आपके लिए शनिदेव को प्रससन करने के लिएकूच मंत्रो को लेकर आए है जिनका जाप करनेसे शनि भगवान की कृपा बनी रहती है और बिगड़े काम भी बनाने लगते है।

शनि देव का तांत्रिक मंत्र

ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनये नमः।

शनि देव के वैदिक मंत्र :-

ऊँ शन्नो देवीरभिष्टडआपो भवन्तुपीतये।

शनि देव का एकाक्षरी मंत्र :-

ऊँ शं शनैश्चाराय नमः।

शनि देव का गायत्री मंत्र :-

ऊँ भगभवाय विद्महैं मृत्युरुपाय धीमहि तन्नो शनिः प्रचोद्यात्।।

आपको बता दे की शनिवार को की गई शनि-उपासना अन्य दिनों से कई गुणा ज्यादा प्रभावशाली असर होता है मगर इसी के साथ यदि आप हर रोज एक मंत्र बोलते है तो निश्चित रूप से आपके जीवन में बड़ा बदलाव दिखेगा साथ हियापको बताना चाहेंगे की शनि मंत्र किसी की भी इच्छा को पूरी करने की पूरी क्षमता रखता है। फिर चाहे तिजोरी भरनी हो या फिर मनचाहा नौकरी पाना हो। एक बात का हमेशा ध्यान रखिएगा की शनिदेव खुश होने पर कंगाल को भी मालामाल बना सकते है। इसके अतिरिक्त कुंडली में शनि अशुभ दे रहे हों, साढ़ेसाती का प्रभाव चल रहा हो तो ऐसे में भी इन शनि मंत्रों का जाप जरूर करें।

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे पुष्टिवर्धनम। उर्वारुक मिव बन्धनान मृत्योर्मुक्षयी मा मृतात।।

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