आज सफला एकादशी की रात यहां रखें एक दीपक इतना आयेगा पैसा की संभाल नहीं पाओगे आप

हिन्दू धर्म  में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष चौबीस एकादशियाँ होती हैं। जब अधिकमास या मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 26 हो जाती है।। पौषमास के कृष्णपक्ष में सफला नाम की एकादशी होती है। इस दिन भगवान नारायण की विधिपूर्वक पूजा करनी चाहिए, यह एकादशी कल्याण करने वाली है। एकादशी समस्त व्रतों में श्रेष्ठ है।

पद्मपुराण में पौषमास के कृष्णपक्ष की एकादशी के विषय में युधिष्ठिर के पूछने पर भगवान श्रीकृष्ण बोले-बडे-बडे यज्ञों से भी मुझे उतना संतोष नहीं होता, जितना एकादशी व्रत के अनुष्ठान से होता है। इसलिए एकादशी-व्रत अवश्य करना चाहिए, इस बार सफला एकादशी बुधवार यानि 13 दिसम्बर को मनाई जाएगी।

सफल एकादशी का पूजन विधि

सफला एकादशी की सुबह स्नान करने के बाद माथे पर चंदन लगाकर कमल अथवा अन्य कोई फूल, फल, गंगा जल, पंचामृत व धूप-दीप से भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा एवं आरती करें। भगवान श्रीहरि के विभिन्न नाम-मंत्रों को बोलते हुए भोग लगाएं। पूरे दिन निराहार (बिना कुछ खाए-पिए) रहें, शाम को दीपदान के बाद फलाहार कर सकते हैं।

धर्म ग्रंथो के अनुसार रात को वैष्णव संप्रदाय के लोग भगवान श्रीहरि का नाम-संकीर्तन करते हुए जागते हैं। सफला एकादशी की रात जागरण करने से जो फल प्राप्त होता है, वह हजारों वर्ष तक तपस्या करने पर भी नहीं मिलता। इसके उपरांत द्वादशी (14 दिसंबर, गुरुवार) को श्रीहरी की पूजा के बाद ब्राह्मणों को भोजन कराएँ और जनेऊ एवं दक्षिणा देकर विदा करने के बाद ही स्वयं भोजन करें।

एकादशी की व्रत कथा

पद्मपुराणके उत्तरखण्ड में सफला एकादशी के व्रत की कथा विस्तार से वर्णित है | इस एकादशी के प्रताप से ही पापाचारी लुम्भकभव-बन्धन से मुक्त हुआ । जो व्यक्ति भक्ति-भाव से इस एकादशी-व्रत करता है, वह निश्चय ही श्रीहरि का कृपापात्र बन जाता है। एकादशी के माहात्म्य को सुनने से राजसूय यज्ञ का फल प्राप्त होता है।

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सफला एकादशी के व्रत का उद्देश्य

सफला एकादशी का व्रत अपने नामानुसार मनोनुकूल फल प्रदान करने वाला है। भगवान श्री कृष्ण इस व्रत की बड़ी महिमा बताते हैं। इस एकादशी के व्रत से व्यक्तित को जीवन में उत्तम फल की प्राप्ति होती है और वह जीवन का सुख भोगकर मृत्यु पश्चात विष्णु लोक को प्राप्त होता है यह व्रत अति मंगलकारी और पुण्यदायी है।

ये रहा वो उपाय

आज की रात एक दीपक लेकर पूजा घर के सामने बैठ जाना है और उस दीपक को जलाने से पहले आपको अपने दोनों हाथ जोड़कर “ओम् ह्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं लक्ष्‍मी वासुदेवाय नम:” इस महामंत्र का 21 बार जाप करना होगा और फिर उसके बाद उस दीपक में थोड़ा सा देशी घी डाल देना है इसके बाद आपको दोनों हाथ जोड़कर मन में अपनी जो भी इच्‍छा हो उसे बोलना होगा। फिर उसके बाद उस दीपक को उठाकर मुख्‍य दरवाजें पर आ जाना है और फिर वहीं दायीं तरफ रख देना है। वहीं ध्‍यान रहे कि ये दीपक जितने देर जले जलने देना है इसे आप सुबह हटा सकते हैं।

अत: जो मनुष्य इस परम पवित्र सफला एकादशी का व्रत करता है उसे अंत में मुक्ति मिलती है। जो नहीं करते वे पूँछ और सींगों से रहित पशुओं के समान हैं। इस सफला एकादशी के माहात्म्य को पढ़ने से अथवा श्रवण करने से मनुष्य को अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है।
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