लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार ने लिया बड़ा फैसला, अब सवर्णों को भी मिलेगा आरक्षण

साल 2019 में लोकसभा चुनाव होने वाले हैं और केंद्र सरकार इस साल भी सत्ता में आना चाहती हैं और इसके लिए वह पुरज़ोर तैयारी में जुट गयी हैं| दरअसल हाल में नरेंद्र मोदी की सरकार ने एक फैसला लिया हैं जो सामान्य वर्गों के हित में हैं, आपकी जानकारी के लिए बता दें कि आर्थिक रूप से कमजोर सामान्य वर्ग के लोगों के लिए सरकारी नौकरियों व शिक्षण संस्थानों में दस प्रतिशत आरक्षण देने का फैसला लिया है। केंद्र सरकार इसके लिए मंगलवार को लेकर सभा में संविधान संशोधन विधेयक पेश करेगी। पीएम नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस संबंध में संवैधानिक संशोधन के प्रस्ताव को अपनी मंजूरी दे दी है|

मोदी सरकार मंगलवार को आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक 2018 (कांस्टीट्यूशन एमेंडमेंट बिल टू प्रोवाइड रिजर्वेशन टू इकोनॉमिक वीकर सेक्शन -2018) लोकसभा में लेकर आने वाली हैं| इस विधेयक के जरिये संविधान की धारा 15 और 16 में संसोधन किया जाएगा, दरअसल सामान्य वर्ग को दिया जाने वाला आरक्षण इस समय उपलब्ध 50 प्रतिशत आरक्षण से अलग होगा| इतना ही नहीं इस संसोधन में पात्रता के लिए कुछ जरूरी मानक भी तैयार किए गए हैं|

आरक्षण के लिए जरूरी मानक

इस आरक्षण का लाभ उठाने के लिए सामान्य वर्ग के लोगों के कुछ मानक तय किए गए हैं यानि इस आरक्षण का लाभ वहीं लोग उठा सकेंगे जो इन मानकों को पूरा करेंगे| दरअसल जिन परिवारों की सालाना आय आठ लाख से कम होगा, वो लोग आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के श्रेणी में आएंगे| बता दें कि यह मानक ओबीसी आरक्षण क्रिमि लेयर की सीमा हैं और इसी को आधार बनाया गया हैं|

इसके अलावा जिन लोगों की कृषि योग्य भूमि पाँच एकड़ से कम होगी| इस आरक्षण का लाभ पाने के लिए आवासीय घर एक हजार वर्ग फिट से कम होना चाहिए| अधिसूचित नगरपालिका में सौ गज से कम का प्लॉट होने पर ही सामान्य वर्ग के लोग आरक्षण का लाभ पा सकेंगे| गैर अधिसूचित नगरपालिका इलाके में आवासीय प्लॉट की सीमा दो सौ गज रखी गयी हैं, अर्थात जो इन मानको को पूरा करेगा वही लोग इस आरक्षण का लाभ पा सकेंगे।

संवैधानिक संशोधन जरूरी

मीडिया के मुताबिक आरक्षण 50 प्रतिशत की सीमा से अलग होगा, इसलिए संवैधानिक संशोधन किया जाएगा। इसके लिए संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई से अधिक बहुमत से विधेयक पारित कराना जरूरी होगा। संसद के दोनों सदनों मे पारित होने के बाद इस विधेयक पर कम से कम 50 फीसदी राज्यों में विधानसभा की मंजूरी भी आवश्यक हैं| हालांकि इसे सियासी मामला माना जा रहा हैं और लोगों का कहना हैं कि यह लोकसभा चुनाव के लिए लोगों को लुभाने का एक जुमला हैं|

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