मांग भरते समय महिलाएं इन बातों का अवश्य रखें ध्यान, इससे भाग्य बनेगा बलवान

सुहागन स्त्रियाँ अपने मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र धारण करती हैं| ये दोनों ही स्त्री के सुहाग का प्रतीक माना जाता हैं| बता दें कि स्त्रियाँ मांग के जिस स्थान पर सिंदूर लगाती हैं, वह स्थान ब्र्हारंध्र और अध्मि नामक मर्म के ठीक ऊपर का भाग होता हैं और यह पुरुष की अपेक्षा स्त्री का ज्यादा कोमल होता हैं इसलिए शास्त्रकारों ने उस भाग की सुरक्षा के लिए सिंदूर का विधान किया| सिंदूर में पारा जैसी अलभ्य धातु भरपूर मात्रा में पायी जाती हैं| दरअसल यह स्त्री के शरीरस्थ वैद्युतिक शक्ति को भी नियंत्रित नहीं रखती अपितु मर्मस्थान को बाह्य दुष्प्रभाव से बचाती हैं| ऐसे में आज हम आपको बताने वाले हैं कि मांग भरते समय किन-किन बातों का ध्यान रखना चाहिए|

मांग में सिंदूर भरते समय निम्न बातों का ध्यान रखे

(1) सिंदूर को ऐसी डिब्बी में ना रखे जो टूटी हो यानि सिंदूर को साबुत डिब्बी में रखे|

(2) कभी भी अपना सिंदूरदानी किसी अन्य स्त्री को ना दे यानि अपना सुहाग किसी से ना बाटें|

(3) पार्लर में जाने पर सभी सुहाग के समान किसी अन्य स्त्री से लगवा ले| लेकिन कभी भी सिंदूर अन्य किसी से ना लगवाएँ बल्कि उसे खुद ही लगाए|

(4) विवाहित स्त्रियाँ सिंदूर, अपने मांग के बीचों-बीच भरे क्योंकि ऐसा करने से आपके पति की आयु लंबी होती हैं|

(5) यदि कोई भी विवाहित स्त्री सिंदूर को अपने मांग के इधर-उधर भरती हैं तो उनके और उनके पति की बीच दूरियाँ बढ़ती हैं|

(6) कई बार विवाहित स्त्रियाँ सिंदूर भरकर उसे अपने बालों से छिपा लेती हैं| लेकिन कभी ऐसा ना करे क्योंकि ऐसा करने से उनके पति के मान-प्रतिष्ठा में हानी होती हैं|

(7) आप अपने पति के दीर्घायु के लिए हल्दी में नींबू का रस निचोल ले, ऐसा करने से हल्दी सिंदूर के जैसा लाल हो जाएगा| अब इसे अपने मांग में भरते समय ‘ॐ जुं सः पालय सः जुं ॐ’ का जाप तीन बार करे|

(8) मांग भरते समय अपने सिर पर चुन्नी जरूर रख ले, खुले मांग कभी भी सिंदूर ना भरे|

(9) मांग कभी भी खड़े होकर ना भरे बल्कि बैठकर आराम से भरे और कभी भी टूटे शीशे के सामने अपना मांग सिंदूर से ना भरे|

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(10) कभी भी मांग दक्षिण दिशा की ओर मुख करके ना भरे| आप मांग पूर्व, पश्चिम और उत्तर की ओर मुख करके भरे, मांग हमेशा अनामिका उंगली से भरे|

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